Agnipath Scheme: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अग्निवीरों के लिए दो साल के अतिरिक्त सेवा विस्तार यानी 'सेकंड टूर ऑफ ड्यूटी' को दिवाली का बड़ा तोहफा बताया है। संशोधित व्यवस्था के तहत शेष 75% अग्निवीरों को छह साल तक सेवा देने और निर्धारित मानकों को पूरा करने पर नियमित सैनिक बनने का मौका मिलेगा।
Agniveer 2 Year Extension: अग्निवीरों के लिए दिवाली के मौके पर बड़ी खबर सामने आई है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शनिवार को अग्निवीर योजना में किए गए बदलावों को जवानों के लिए बड़ा तोहफा बताया। उन्होंने कहा कि अब शेष 75 प्रतिशत अग्निवीरों को उनकी इच्छा के आधार पर दो साल का अतिरिक्त सेवा विस्तार दिया जाएगा। इस व्यवस्था को 'सेकंड टूर ऑफ ड्यूटी' नाम दिया गया है। खास बात यह है कि छह साल की सेवा पूरी करने के बाद निर्धारित मानकों पर खरे उतरने वाले इच्छुक अग्निवीरों को नियमित सैनिक बनने का मौका भी मिलेगा।
75 फीसदी अग्निवीरों को मिलेगा दो साल का एक्सटेंशन
बागडोगरा में सैनिकों को संबोधित करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि अग्निवीरों को अतिरिक्त दो साल तक देश की सेवा करने का अवसर देना एक अहम फैसला है। उन्होंने इसे दिवाली के मौके पर जवानों के लिए बड़ा गिफ्ट बताया। यह सेवा विस्तार अग्निवीरों की इच्छा पर निर्भर करेगा।
रक्षा मंत्री के मुताबिक, अतिरिक्त दो साल की सेवा पूरी करने के बाद इच्छुक अग्निवीरों को तय चयन मानकों के आधार पर नियमित सैनिक के रूप में सेना में शामिल होने का अवसर भी मिलेगा।
छह साल की होगी कुल सेवा अवधि
अग्निपथ योजना की शुरुआत जून 2022 में हुई थी। इसके तहत सेना, नौसेना और वायु सेना में चार साल के लिए अग्निवीरों की भर्ती की जाती है। पुरानी व्यवस्था में प्रत्येक बैच के अधिकतम 25 प्रतिशत अग्निवीरों को मेरिट और संगठन की जरूरत के आधार पर नियमित कैडर में शामिल होने का मौका मिलता था। बाकी 75 प्रतिशत जवानों को चार साल बाद सेवा छोड़नी पड़ती थी।
अब संशोधित व्यवस्था के तहत शेष 75 प्रतिशत अग्निवीर अपनी इच्छा से दो साल का अतिरिक्त कार्यकाल ले सकेंगे। इस तरह उनकी कुल सेवा अवधि छह साल हो जाएगी। इस दौरान उन्हें बेहतर वेतन, उन्नत सेवा निधि पैकेज और वरिष्ठता से जुड़े लाभ भी मिलेंगे।
एयर चीफ मार्शल आशुतोष दीक्षित को दी बधाई
राजनाथ सिंह ने एयर चीफ मार्शल आशुतोष दीक्षित को भारतीय वायु सेना का प्रमुख बनने पर बधाई दी। उन्होंने उनके नाम का जिक्र करते हुए भगवान शिव के स्वरूप से तुलना की। रक्षा मंत्री ने कहा कि भगवान शिव स्वभाव से शांत और सरल हैं, लेकिन जरूरत पड़ने पर रौद्र रूप भी धारण कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि दुश्मनों के लिए बेहतर यही होगा कि उन्हें एयर चीफ मार्शल दीक्षित का रौद्र रूप देखने का मौका न मिले।
अनुशासन और साहस ही सैनिकों की सबसे बड़ी ताकत
रक्षा मंत्री ने सैनिकों को संबोधित करते हुए कहा कि आधुनिक तकनीक कितनी भी आगे क्यों न बढ़ जाए, लेकिन सेना में अनुशासन और साहस का महत्व कभी कम नहीं होगा। अनुशासन ही एक साधारण सैनिक को असाधारण योद्धा बनाता है।
उन्होंने सैनिकों से स्थानीय लोगों के साथ अच्छे संबंध बनाए रखने की अपील भी की। राजनाथ सिंह ने कहा कि सैनिकों का व्यवहार, उनकी वर्दी, भाषा और संयम आम लोगों के मन में सेना की छवि बनाते हैं।
ड्रोन और साइबर सुरक्षा पर भी दिया जोर
राजनाथ सिंह ने कहा कि भारतीय सशस्त्र बलों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार किया जा रहा है। सैनिकों को ड्रोन चलाने और साइबर सुरक्षा जैसी आधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में सेना को और अधिक तकनीक आधारित बनाना जरूरी है।
रक्षा मंत्री ने आत्मनिर्भर भारत अभियान का जिक्र करते हुए बताया कि देश के स्टार्टअप और उद्योग ड्रोन, एंटी-ड्रोन सिस्टम और सैनिकों के लिए आधुनिक उपकरण तैयार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सैनिकों का ऊंचा मनोबल ही देश की सबसे बड़ी ताकत है।












