दिल्ली में 200 यूनिट तक मुफ्त बिजली की सुविधा के बावजूद वित्त वर्ष 2025-26 में बिजली वितरण कंपनियों को करीब ₹383 करोड़ का नुकसान हुआ। दक्षिण-पश्चिमी दिल्ली में सबसे ज्यादा नुकसान दर्ज किया गया। जानिए आपके इलाके के आंकड़े और बिजली चोरी रोकने की चुनौती।
दिल्ली में हर महीने 200 यूनिट तक मुफ्त बिजली मिलने के बावजूद बिजली चोरी का मामला चिंता बढ़ा रहा है। वित्त वर्ष 2025-26 के आंकड़ों के मुताबिक, बिजली चोरी और मीटरों से छेड़छाड़ के कारण राजधानी की बिजली वितरण कंपनियों को करीब 383 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। सवाल यह है कि जब उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए मुफ्त बिजली की सुविधा है, तो आखिर बिजली चोरी पर लगाम क्यों नहीं लग पा रही?
Delhi Electricity Theft: बिजली कंपनियों को ₹383 करोड़ का नुकसान
बिजली वितरण कंपनियों BSES और टाटा पावर दिल्ली डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड (TPDDL) के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में बिजली वितरण के दौरान तकनीकी और व्यावसायिक नुकसान का स्तर करीब 5 से 6 प्रतिशत रहा। इसमें बिजली चोरी और मीटरों से छेड़छाड़ भी अहम वजह बताई गई है। हालांकि, तकनीकी और व्यावसायिक नुकसान (AT&C Losses) में केवल बिजली चोरी ही शामिल नहीं होती, बल्कि बिलिंग और भुगतान से जुड़ी कुछ हानियां भी इसका हिस्सा होती हैं।
दक्षिणी दिल्ली से लेकर पूर्वी दिल्ली तक कितना नुकसान?
आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली के अलग-अलग बिजली वितरण क्षेत्रों में नुकसान का ब्योरा इस प्रकार है:
- दक्षिण और पश्चिमी दिल्ली: BSES राजधानी पावर लिमिटेड (BRPL) के क्षेत्र में करीब 211 करोड़ रुपये।
- पूर्वी और मध्य दिल्ली: BSES यमुना पावर लिमिटेड (BYPL) के क्षेत्र में लगभग 136 करोड़ रुपये।
- उत्तर और उत्तर-पश्चिमी दिल्ली: TPDDL के क्षेत्र में करीब 36 करोड़ रुपये।
प्रतिशत के लिहाज से BRPL में नुकसान 6%, BYPL में 5.83% और TPDDL में 5.41% दर्ज किया गया। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि नुकसान का स्तर अलग-अलग वितरण क्षेत्रों में अलग रहा।
2002 में 55% था नुकसान, अब 5-6% तक पहुंचा
दिल्ली में वर्ष 2002 में बिजली वितरण का काम निजी कंपनियों को सौंपे जाने के समय नुकसान का स्तर BSES के क्षेत्रों में करीब 55% और टाटा पावर के क्षेत्रों में 53% बताया गया था। अब यह घटकर लगभग 5 से 6% रह गया है।
इसके बावजूद बिजली चोरी रोकना कंपनियों के लिए चुनौती बना हुआ है। कंपनियां दिल्ली सरकार और पुलिस की मदद से इस पर कार्रवाई कर रही हैं। ध्यान देने वाली बात यह भी है कि मुफ्त बिजली की सुविधा और बिजली चोरी दो अलग मुद्दे हैं—पहली पात्र उपभोक्ताओं को राहत देती है, जबकि दूसरी वितरण व्यवस्था और राजस्व को नुकसान पहुंचाती है।


