Dharmendra Pradhan News : मोदी सरकार के पूर्व शिक्षा मंत्री इस्तीफे के बाद आज सोमवार को मुस्कुराते हुए संसद पहुंचे। ना तो उनके चेहरे पर मायूसी थी और ना ही कोई नाराजगी। इससे साफ लगता है कि प्रधान के लिए सरकार ने कोई बड़ा सरप्राइज प्लान कर रखा है।

दिल्ली. सोचिए अगर किसी सेंट्रल या स्टेट मिनिस्टर से सरकार इस्तीफा ले ले तो वह कुछ देर के लिए ही सही दुखी तो होता ही है। लेकिन धर्मेंद्र प्रधान ने जिस तरह से आज सोमवार को संसद में एंट्री की है, उससे तो नहीं लगता कि वह मायूस हैं। उनका ना तो तेबर बदले और ना ही अंदाज, वह पहले की तरह इस्तीफे के बाद मुस्कुराते हुए मानसून सत्र में शामिल होने के लिए पहुंचे थे। तो आइए जानते हैं उनके मुस्कुराहट के क्या मायने हैं और क्या मोदी सरकार उनके के लिए कुछ बड़ा प्लान कर रही है।

प्रधान के नारों से गूंज उठा संसद

दरअसल, जैसे ही इस्तीफे के बाद आज धर्मेंद्र प्रधान ने संसद में एंट्री ली तो उनका एनडीए सांसदों ने ग्रैंड वेलकम किया। किसी ने उनको शॉल -श्रीफल दिया तो किसी ने फूलों की माला पहनाई तो किसी ने गुलदस्ता देकर स्वागत किया। प्रधान जैसे ही अपनी कार से नीचे उतरे तो मीडिया का हुजूम उमड़ पड़ा। पत्रकारों ने उनसे जो भी सवाल पूछे उसका उन्होंने साफ साफ शांति से जबाव दिया। इस दौरान उनके चहरे पर मायूसी ना होकर, मुस्कुराहट थी। इसके बाद बीजेपी नेताओं प्रधान जिंदाबाद...जिंदाबाद के नारों से गूंज उठा। हर कोई उनके घेरे हुए खड़ा था। बीजेपी सांसद उनको हाथ पकड़कर अंदर लेकर गए।

धर्मेंद्र प्रधान का क्यों हुआ भव्य स्वागत

धर्मेंद्र प्रधान के इस वेलकम पर राजनीतिक पंडितों का कहना है कि पार्टी द्वारा इस तरह का स्वागत एक तरह का डैमेज कंट्रोल है, ताकि उनकी छवि खराब न हो। साथ ही सरकार साफ कहना चाहती है कि प्रधानमंत्री ने उनसे इस्तीफा नहीं चाहते थे। लेकिन मजबूरी में यह कदम उठाना पड़ा है। क्योंकि धर्मेंद्र प्रधान का नाम बड़े और सीनियर नेताओं में शुमार है। वह संगठन के बड़े नेता हैं, साथ ही आरएसएस में गहरी उनकी पकड़ है।

धर्मेंद्र प्रधान के लिए क्या है बीजेपी का इशारा?

राजनीति को करीब से जानने वाले एक्सपर्ट का कहना है कि धर्मेंद्र प्रधान बीजेपी के रणनीतिकार माने जाते हैं। उन्हें जिस भी राज्य में चुनाव का प्रभारी बनाया गया है, वहां उन्होंने जीत दिलाई। उनका बीजेपी के लिए शानदार रिकॉर्ड है। वह चुनाव प्रबंधन और कठिन परिस्थितियों में फैसले लेने के मामले में वे पार्टी के सबसे भरोसेमंद चेहरों में शामिल हैं। राजनीतिक एक्सपर्ट्स का मानना है कि भले ही उनसे शिक्षा मंत्रालय सरकार ने ले लिया है। लेकिन ऐसा नहीं है कि उनका डिमोशन हो रहा है। यह तो सिर्फ अभी जनता कि मांग और बीजेपी ने बड़े लक्षय के लिए एक कदम पीछे लिया है।

धर्मेंद्र प्रधान को मिलेगा बड़ा तोहफा

धर्मेंद्र प्रधान के पुराने काम और रिकॉर्ड के मुताबिक उन्हें आगामी राज्यों के विधानसभा चुनावों को देखते हुए बीजेपी उन्हें राष्ट्रीय संगठन में बड़ा पद दे सकती है। या फिर ओडिशा की राजनीति में उनकी वापसी हो सकती है। कयास लगाए जा रहे थे कि राज्य के बड़े राजनीतिक फैसलों में प्रधान की अहम भूमिका रहेगी। ऐसे में कहा जा रहा है कि दिल्ली की जिम्मेदारी से मुक्त होने के बाद, वे ओडिशा में बीजेपी के जनाधार को और ज्यादा मजबूत करने के लिए पूरा समय दे सकते हैं।