Indian IT Professionals in USA: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ सत्या नडेला को नेशनल मेडल ऑफ टेक्नोलॉजी से सम्मानित किया। वहीं, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने H-1B वीजा को लेकर कंपनी पर कार्रवाई की है।

National Medal of Technology: अमेरिका में विदेशी प्रतिभाओं और कर्मचारियों को लेकर डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की नीति एक बार फिर चर्चा में है। 9 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, एक ही दिन में भारतीय मूल के माइक्रोसॉफ्ट सीईओ सत्या नडेला को अमेरिकी सम्मान से नवाजा गया, जबकि दूसरी ओर माइक्रोसॉफ्ट के खिलाफ H-1B वीजा से जुड़े मामले में कार्रवाई की खबर सामने आई। इन घटनाओं ने अमेरिकी तकनीकी उद्योग में विदेशी पेशेवरों की भूमिका और भारतीयों के भविष्य को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

सत्या नडेला समेत 6 दिग्गजों को मिला अमेरिकी सम्मान

व्हाइट हाउस में आयोजित 'साइंस: ए न्यू गोल्डन एज' कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने छह प्रमुख तकनीकी विशेषज्ञों और उद्योगपतियों को सम्मानित किया। सत्या नडेला और माइकल डेल को नेशनल मेडल ऑफ टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन दिया गया। वहीं, एलन मस्क, सर्गेई ब्रिन, जेनसन हुआंग और लिसा सु को नेशनल मेडल ऑफ साइंस से सम्मानित किया गया।

ट्रंप ने इन सभी को अमेरिका की अनमोल प्रतिभाएं बताते हुए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और तकनीकी विकास में उनके योगदान की तारीफ की। उन्होंने एलन मस्क की तुलना आधुनिक समय के थॉमस अल्वा एडिसन से भी की। रिपोर्ट के अनुसार, सम्मानित छह लोगों में से पांच के परिवार दूसरे देशों से अमेरिका आकर बसे थे।

माइक्रोसॉफ्ट पर H-1B वीजा कार्यक्रम को लेकर कार्रवाई

सत्या नडेला को सम्मानित किए जाने से कुछ घंटे पहले उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने माइक्रोसॉफ्ट के खिलाफ H-1B वीजा से जुड़े सरकारी कार्यक्रम को लेकर सख्त कदम उठाने की घोषणा की। रिपोर्ट में दावा किया गया कि कंपनी को विदेशी कर्मचारियों के लिए ग्रीन कार्ड प्रक्रिया से जुड़े एक सरकारी कार्यक्रम से बाहर कर दिया गया।

वेंस ने आरोप लगाया कि माइक्रोसॉफ्ट ने करीब 6,000 अमेरिकी कर्मचारियों को नौकरी से निकालने के बाद 6,300 विदेशी H-1B कर्मचारियों को नियुक्त किया। उनका कहना था कि कंपनियों को भर्ती के दौरान अमेरिकी नागरिकों को प्राथमिकता देनी चाहिए। हालांकि, इन आरोपों और कार्रवाई के कानूनी दायरे की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।

6,000 H-1B आवेदनों पर माइक्रोसॉफ्ट की सफाई

माइक्रोसॉफ्ट ने आरोपों पर अपना पक्ष रखते हुए कहा कि पिछले वित्त वर्ष में उसने करीब 6,000 H-1B वीजा आवेदन किए थे। कंपनी के मुताबिक, इनमें लगभग 80 प्रतिशत आवेदन मौजूदा कर्मचारियों के वीजा विस्तार या उनमें बदलाव से संबंधित थे। बाकी आवेदन उन लोगों के लिए थे, जो पहले से कानूनी रूप से अमेरिका में मौजूद थे।

कंपनी का यह भी कहना है कि नए विदेशी कर्मचारियों की संख्या उसके कुल अमेरिकी कार्यबल का लगभग एक प्रतिशत है। इस स्पष्टीकरण के जरिए माइक्रोसॉफ्ट ने यह बताने की कोशिश की कि उसके वीजा आवेदनों को नए विदेशी कर्मचारियों की नियुक्तियों के बराबर नहीं माना जाना चाहिए।

H-1B वीजा पर सख्ती का भारतीयों पर क्या असर?

ट्रंप प्रशासन H-1B वीजा व्यवस्था में बदलाव और विदेशी कर्मचारियों की भर्ती पर सख्त निगरानी की वकालत कर रहा है। सरकार का तर्क है कि कंपनियां अमेरिकी कर्मचारियों को प्राथमिकता दें और विदेशों से विशेषज्ञों को तभी बुलाएं, जब उनकी खास प्रतिभा की वास्तविक जरूरत हो।

H-1B वीजा भारतीय आईटी पेशेवरों के लिए अमेरिका में काम करने का एक अहम रास्ता है। ऐसे में वीजा नियमों, फीस और पात्रता में बदलाव का असर भारतीय तकनीकी कर्मचारियों और अमेरिका में नौकरी पाने की योजना बना रहे युवाओं पर पड़ सकता है। सत्या नडेला का सम्मान और माइक्रोसॉफ्ट से जुड़ा विवाद इसी बहस के दो अलग-अलग पहलुओं को सामने लाता है।