New Potato Variety: जामुनी आलू में आम आलू से कई गुना ज्यादा आयरन और विटामिन-C पाया गया है, जो शरीर में खून की कमी को 10 गुना तेजी से दूर कर सकता है। जानें इसके फायदे...

Purple Potato: हर भारतीय घर की रसोई में आलू रोज बनता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि जो आम पीला आलू आप और हम बड़े चाव से खा रहे हैं, वो सिर्फ हमारा पेट भरता है, शरीर को पूरी ताकत नहीं देता? इसी समस्या को खत्म करने के लिए भारत सरकार के कृषि वैज्ञानिकों ने एक ऐसा कमाल का आलू तैयार किया है, जो अंदर और बाहर से बैंगनी या जामुनी (Purple) रंग का है। इस सुपर-आलू का नाम 'कुफरी जामुनिया' (Kufri Jamunia) है। ये आलू इतना ताकतवर है कि शरीर में खून की कमी को तेजी से दूर कर सकता है। आइए जानते हैं कि ये जामुनी आलू क्या है और ये आपकी सेहत कैसे बदल सकता है...

पीले आलू से क्यों बेहतर है 'कुफरी जामुनिया'?

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान (CPRI) ने इस खास आलू को तैयार किया है। अगर हम आम पीले आलू से इसकी तुलना करें, तो इसके फायदे आपको हैरान कर देंगे।

आयरन (खून बढ़ाने वाला)

आम आलू में सिर्फ 0.57 mg आयरन होता है, जबकि इस जामुनी आलू में 3.22 mg आयरन पाया जाता है। यानी ये आपके शरीर में खून की कमी को बहुत तेजी (करीब 5 गुना) से दूर कर सकता है।

विटामिन-C का खजाना

जहां नॉर्मल आलू में 23.15 mg विटामिन-C होता है, वहीं जामुनी आलू में ये 42.75 mg है। ये आपकी इम्युनिटी यानी बीमारियों से लड़ने की ताकत को डबल कर सकता है।

जिंक (Zinc)

आम आलू (0.28 mg) के मुकाबले इसमें 2.28 mg जिंक होता है, जो बच्चों के दिमाग और हड्डियों के लिए बहुत जरूरी है।

एंटीऑक्सीडेंट्स

इसका जामुनी रंग 'एंथोसायनिन' (Anthocyanins) नाम के एक खास तत्व की वजह से है। ये एक नेचुरल एंटीऑक्सीडेंट है जो शरीर को कई गंभीर बीमारियों से बचाता है।

'छिपी भूख' का सबसे सस्ता इलाज

'छिपी हुई भूख' (Hidden Hunger) का मतलब है कि आप दिन में तीन बार भरपेट खाना तो खा रहे हैं, लेकिन फिर भी आपके शरीर को जरूरी विटामिन्स और मिनरल्स नहीं मिल रहे। भारत में लोग चावल, गेहूं और आम आलू ज्यादा खाते हैं, जिससे पेट तो भर जाता है, लेकिन अंदर ही अंदर शरीर कमजोर होता रहता है। एक सर्वे के मुताबिक, भारत में आधी से ज्यादा महिलाएं और दो-तिहाई बच्चे एनीमिया यानी खून की कमी के शिकार हैं। 'कुफरी जामुनिया' इसी छिपी हुई बीमारी का एक सस्ता इलाज बन सकता है, क्योंकि इसे उसी तरीके से पकाया और खाया जा सकता है, जैसे हम नॉर्मल आलू खाते हैं। इससे सब्जी, पराठे या करी बनाते हैं।

बिना केमिकल तैयार हुआ बैंगनी आलू

सबसे अच्छी बात ये है कि इस आलू में ऊपर से कोई केमिकल या दवा नहीं मिलाई गई है। इसे बायोफोर्टिफिकेशन (Biofortification) तकनीक से उगाया गया है। इसका मतलब है कि बीज के अंदर ही खेती के दौरान प्राकृतिक रूप से ये सारे विटामिन्स और मिनरल्स विकसित किए गए हैं। इससे पहले भी ICAR-CPRI कुफरी नीलकंठ और कुफरी माणिक जैसी रंगीन आलू की किस्में विकसित कर चुका है। कुफरी जामुनिया को साल 2024 में आधिकारिक रूप से जारी किया गया था।

किसानों के लिए कितनी फायदेमंद हो सकती है नई किस्म?

किसी नई फसल का फायदा तभी बड़े स्तर पर लोगों तक पहुंच सकता है, जब किसान उसे आसानी से उगा सकें और बाजार में उसकी मांग भी हो। कुफरी जामुनिया की खेती के लिए प्रति हेक्टेयर 32 से 35 टन उपज की सिफारिश की गई है। वहीं, संस्थान के ट्रायल में 90 दिन की अवधि के दौरान करीब 49 टन प्रति हेक्टेयर तक उपज दर्ज की गई। इन परीक्षणों में करीब 90 फीसदी आलू बाजार में बेचने लायक पाए गए। इस किस्म को उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में खेती के लिए सुझाया गया है। इसकी स्टोरेज क्वॉलिटी भी अच्छी बताई गई है।

क्या ये आलू आम जनता तक पहुंचेगा?

वैज्ञानिकों का कहना है कि खेतों में इस आलू की पैदावार बहुत शानदार रही है। अब सरकार और कृषि विभाग की कोशिश है कि इसके बीज ज्यादा से ज्यादा किसानों तक पहुंचाए जाएं। अगर इसे 'मिड-डे मील' (स्कूलों के खाने) और आंगनवाड़ी केंद्रों में शामिल कर लिया जाए, तो भारत से खून की कमी और कुपोषण को काफी हद तक मिटाया जा सकता है।