US Russia Diesel Deal: अमेरिका में मिडटर्म चुनाव से पहले डोनाल्ड ट्रंप ने रूस से डीजल खरीदने का ऐलान किया है। पुतिन ने 3 लाख टन की तत्काल सप्लाई को मंजूरी दी है, जिससे जेलेंस्की नाराज हैं।

US Russian Oil News: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक फैसले ने रूस से तेल खरीदने को लेकर अमेरिकी नीति पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। दावा किया जा रहा है कि ईंधन की बढ़ती कीमतों पर काबू पाने के लिए अमेरिका रूस से डीजल खरीदने की तैयारी में है। अगर यह योजना आगे बढ़ती है, तो इसका असर रूस पर लगे प्रतिबंधों और अमेरिका की विदेश नीति पर भी पड़ सकता है। वहीं, इस घटनाक्रम से यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की की नाराजगी बढ़ने की बात कही जा रही है।

ट्रंप ने रूस से डीजल खरीदने का क्यों लिया फैसला?

रिपोर्ट में इस फैसले के पीछे अमेरिका में बढ़ती ईंधन कीमतों को प्रमुख वजह बताया गया है। ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध के बाद तेल की कीमतों में उछाल आने से अमेरिकी बाजार पर दबाव बढ़ा है। डीजल महंगा होने का असर केवल वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि माल ढुलाई, खेती और खाद्य पदार्थों की लागत भी बढ़ जाती है। ऐसे में सस्ता ईंधन अमेरिकी प्रशासन के लिए अहम मुद्दा बन गया है।

पुतिन ने कितने डीजल की सप्लाई को दी मंजूरी?

ट्रंप के सोशल मीडिया पोस्ट के मुताबिक, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने वैश्विक बाजार में तत्काल 3 लाख टन से अधिक डीजल भेजने पर सहमति जताई है। पोस्ट में नवंबर में 5 लाख टन और इसके बाद 10 लाख टन तक सप्लाई की संभावना का भी जिक्र किया गया। हालांकि, इन आंकड़ों और अमेरिका को होने वाली वास्तविक सप्लाई की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।

क्रेमलिन के बयान के अनुसार, पुतिन ने अमेरिका और वैश्विक बाजारों को तेल तथा पेट्रोलियम उत्पाद उपलब्ध कराने की इच्छा जताई है। रिपोर्ट में एक पूर्व वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी के हवाले से कहा गया है कि इस तरह की घोषणा का बाजार की धारणा पर भी असर पड़ सकता है।

भारत और चीन पर टैरिफ, रूस से खरीद पर नरमी क्यों?

रूस से डीजल खरीदने की संभावित योजना इसलिए भी चर्चा में है, क्योंकि ट्रंप प्रशासन पहले रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर दबाव बनाता रहा है। भारत और चीन जैसे देशों को रूसी तेल के व्यापार को लेकर टैरिफ की चेतावनियां दी गई थीं। अमेरिका और उसके सहयोगी देशों का तर्क रहा है कि रूसी ऊर्जा कारोबार से होने वाली कमाई यूक्रेन युद्ध में रूस की मदद करती है।

अब अगर अमेरिका खुद रूस से पेट्रोलियम उत्पाद खरीदता है, तो उसकी नीति में विरोधाभास का सवाल उठ सकता है। हालांकि, किसी संभावित खरीद समझौते और दूसरे देशों पर लगाए गए व्यापारिक प्रतिबंधों की शर्तें अलग हो सकती हैं। इसलिए दोनों की तुलना करते समय संबंधित नियमों और समझौते की वास्तविक शर्तों को देखना जरूरी होगा।

क्या ट्रंप के फैसले से अमेरिकी प्रतिबंधों पर उठेंगे सवाल?

अमेरिकी विदेश विभाग की प्रतिबंध नीति से जुड़े रहे रिचर्ड नेफ्यू ने इस तरह के फैसले से पैदा होने वाले विरोधाभास पर सवाल उठाए हैं। मूल चिंता यह है कि यदि अमेरिका अपनी घरेलू आर्थिक जरूरतों के लिए रूस से ऊर्जा खरीदने को उचित ठहराता है, तो दूसरे देशों को ऐसा करने से रोकने की उसकी दलील कितनी प्रभावी रहेगी।

यह मुद्दा केवल तेल की खरीद तक सीमित नहीं है। इसका संबंध अमेरिकी प्रतिबंधों की विश्वसनीयता और दूसरे देशों के साथ उसके कूटनीतिक संबंधों से भी है। यदि ऊर्जा की कीमतें घरेलू नीति पर हावी होती हैं, तो अमेरिका को अपनी आर्थिक जरूरतों और रूस पर दबाव बनाने की रणनीति के बीच संतुलन बनाना पड़ सकता है।

अमेरिकी चुनाव और जेलेंस्की की नाराजगी का क्या है कनेक्शन?

अमेरिका में मिडटर्म चुनाव से पहले ईंधन की कीमतें राजनीतिक रूप से अहम हो सकती हैं। महंगे डीजल का असर खेती, परिवहन और रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर पड़ता है, जिससे महंगाई का दबाव बढ़ सकता है। ऐसे में ईंधन सस्ता करना ट्रंप प्रशासन के लिए आर्थिक और राजनीतिक, दोनों लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकता है।

दूसरी ओर, यूक्रेन रूस के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय आर्थिक दबाव बनाए रखने का समर्थन करता रहा है। ऐसे माहौल में अमेरिका और रूस के बीच ऊर्जा कारोबार बढ़ने की संभावना जेलेंस्की के लिए चिंता का विषय बन सकती है। हालांकि, इस फैसले का वास्तविक असर सप्लाई की पुष्टि, प्रतिबंधों की शर्तों और दोनों देशों की आगे की रणनीति पर निर्भर करेगा।