नोएडा की लेखिका डॉ. अंजना सिंह सेंगर को श्रीलंका के कोलंबो में ‘Asia’s Icon Award 2026’ से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उन्हें हिंदी साहित्य और शिक्षा में उत्कृष्ट योगदान के लिए पूर्व राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरिसेना ने प्रदान किया।

Asia’s Icon Award 2026: नोएडा की प्रसिद्ध लेखिका और शिक्षाविद डॉ. अंजना सिंह सेंगर ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत और हिंदी साहित्य का नाम रोशन किया है। उन्हें श्रीलंका की राजधानी कोलंबो में आयोजित एक भव्य समारोह में ‘Asia’s Icon Award 2026’ से सम्मानित किया गया। डॉ. अंजना की यह उपलब्धि न केवल नोएडा, बल्कि पूरे हिंदी साहित्य जगत के लिए गर्व का क्षण है। साहित्य प्रेमी इसे हिंदी की वैश्विक धमक के रूप में देख रहे हैं।

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श्रीलंका के प्रधानमंत्री आवास में हुआ सम्मान समारोह

यह सम्मान समारोह श्रीलंका के प्रधानमंत्री आवास ‘टेंपल ट्रीज’ के ऐतिहासिक परिसर में आयोजित किया गया। डॉ. अंजना सिंह सेंगर को यह पुरस्कार श्रीलंका के पूर्व राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरिसेना ने प्रदान किया। उन्हें यह सम्मान हिंदी साहित्य लेखन और शिक्षा के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट योगदान के लिए दिया गया।

नोएडा से कोलंबो तक की प्रेरणादायक यात्रा

डॉ. अंजना सिंह सेंगर की यह उपलब्धि केवल एक पुरस्कार नहीं, बल्कि एक प्रेरक यात्रा की कहानी है। नोएडा से कोलंबो तक का उनका सफर यह दिखाता है कि जब जुनून और मेहनत साथ हों, तो सीमाएं मायने नहीं रखतीं।

सरकारी नौकरी छोड़ चुना साहित्य का रास्ता

डॉ. सेंगर की सफलता किसी संयोग का परिणाम नहीं है। उन्होंने केंद्र सरकार की एक प्रतिष्ठित नौकरी छोड़कर साहित्य को अपना जीवन लक्ष्य बनाया। यह फैसला उनके त्याग, समर्पण और हिंदी साहित्य के प्रति गहरे प्रेम को दर्शाता है।

7 किताबें और 8 देशों में गूंजती रचनाएं

अब तक डॉ. अंजना सिंह सेंगर की 7 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। उनकी रचनाएं भारत के साथ-साथ अमेरिका, फ्रांस, दुबई, मॉरीशस समेत 8 देशों तक पहुंच चुकी हैं। यह हिंदी साहित्य की बढ़ती वैश्विक स्वीकार्यता का स्पष्ट प्रमाण है।

Asia के दिग्गजों के बीच भारत की मजबूत मौजूदगी

इस अंतरराष्ट्रीय समारोह में जापान, मलेशिया, मालदीव, भूटान और श्रीलंका की कई प्रमुख हस्तियां शामिल थीं। ऐसे मंच पर डॉ. अंजना का सम्मानित होना हिंदी भाषा की एशियाई और वैश्विक पहचान को और मजबूत करता है।

हिंदी अब केवल भाषा नहीं, एक वैश्विक पहचान

डॉ. सेंगर की उपलब्धि यह साबित करती है कि हिंदी अब सिर्फ संवाद की भाषा नहीं रही, बल्कि सांस्कृतिक और बौद्धिक पहचान बन चुकी है। एशिया के मंच पर हिंदी साहित्य का सम्मान इसकी बढ़ती ताकत को दर्शाता है।

पहले भी मिल चुके हैं कई बड़े सम्मान

इससे पहले डॉ. अंजना सिंह सेंगर को हिंदुस्तानी एकेडमी, प्रयागराज द्वारा प्रतिष्ठित ‘फिराक गोरखपुरी सम्मान’ सहित कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुके हैं। ‘एशियाज आइकॉन अवॉर्ड’ उनकी उपलब्धियों की श्रृंखला में एक और महत्वपूर्ण कड़ी है।