पूर्व केंद्रीय मंत्री दिनेश त्रिवेदी बांग्लादेश में भारत के नए उच्चायुक्त होंगे। वे प्रणय वर्मा की जगह लेंगे। इस राजनीतिक नियुक्ति का लक्ष्य द्विपक्षीय संबंधों को मजबूती देना है।

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने एक बड़ा फैसला लेते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री और बीजेपी नेता दिनेश त्रिवेदी को बांग्लादेश में भारत का अगला हाई कमिश्नर (उच्चायुक्त) नियुक्त किया है। विदेश मंत्रालय ने सोमवार को इस नियुक्ति का ऐलान किया। मंत्रालय ने बताया कि त्रिवेदी जल्द ही ढाका पहुंचकर अपना पदभार संभालेंगे। दिनेश त्रिवेदी मौजूदा हाई कमिश्नर प्रणय वर्मा की जगह लेंगे। सरकार ने प्रणय वर्मा को बेल्जियम और यूरोपीय संघ में भारत का राजदूत नियुक्त किया है।

Add Asianetnews Hindi as a Preferred SourcegooglePreferred

आमतौर पर हाई कमिश्नर जैसे अहम पदों पर भारतीय विदेश सेवा (IFS) के अधिकारियों को ही तैनात किया जाता है। लेकिन माना जा रहा है कि बांग्लादेश के साथ राजनीतिक और कूटनीतिक संबंधों को और मजबूती देने के मकसद से सरकार ने एक अनुभवी राजनेता को भेजने का फैसला किया है। मनमोहन सिंह सरकार में दिनेश त्रिवेदी केंद्रीय रेल मंत्री और स्वास्थ्य राज्य मंत्री रह चुके हैं। वे 2021 में तृणमूल कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए थे। यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब बांग्लादेश में तारिक रहमान के नेतृत्व वाली बीएनपी सरकार के सत्ता में आने के बाद दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को बेहतर बनाने पर बातचीत चल रही है। ऐसे में दिनेश त्रिवेदी की नियुक्ति को काफी अहम माना जा रहा है।

दिनेश त्रिवेदी का राजनीतिक सफर

दिनेश त्रिवेदी ने 1974 में शिकागो से MBA करने के बाद वहीं नौकरी की। बाद में वे भारत लौट आए। यहां कई कंपनियों में काम करने के दौरान वे 1980 में कांग्रेस में शामिल हो गए। 1984 में उन्होंने नौकरी छोड़कर कोलकाता में अपना कारोबार शुरू किया। 1990 में वे जनता दल में शामिल हुए और 1998 में तृणमूल कांग्रेस (TMC) का हिस्सा बन गए।

2009 में राज्यसभा सदस्य बनने के बाद वे केंद्र में राज्य मंत्री बने। 2011 में उन्होंने अन्ना हजारे के आंदोलन के समर्थन में इस्तीफे की पेशकश भी की थी। जब ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री बनने के लिए केंद्र से इस्तीफा देकर गईं, तो उनकी जगह पर त्रिवेदी को केंद्रीय रेल मंत्री बनाया गया। उन्होंने 2019 का लोकसभा चुनाव लड़ा लेकिन हार गए। इसके बाद वे बंगाल से फिर राज्यसभा पहुंचे, लेकिन जल्द ही उन्होंने इस्तीफा देकर पार्टी छोड़ दी और बीजेपी में शामिल हो गए।