महात्मा गांधी के 688 हस्तलिखित संदेशों का संग्रह ₹16.20 करोड़ में नीलाम हुआ है। इसने सबसे महंगे भारतीय ऐतिहासिक दस्तावेज़ का विश्व रिकॉर्ड बनाया। नीलामी में गांधीजी का पेटी चरखा भी ₹1.02 करोड़ में बिका।
नई दिल्ली: राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के हाथ से लिखे और साइन किए हुए 688 रोज़ाना के संदेशों का एक कलेक्शन हाल ही में 'सैफ्रनआर्ट' (Saffronart) के ऑक्शन में 16.20 करोड़ रुपये में बिका है। इसके साथ ही यह नीलामी में सबसे ज़्यादा क़ीमत पर बिकने वाला 'भारतीय ऐतिहासिक दस्तावेज़' बन गया है, जिसने एक नया वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया है।
एक करीबी साथी के लिए लिखे थे ‘दिन का एक विचार’
गांधीजी ने ये संदेश अपने करीबी साथी और स्वतंत्रता सेनानी आनंद टी. हिंगोरानी के लिए लिखे थे। जब हिंगोरानी की पत्नी विद्या का निधन हुआ, तो उन्हें सांत्वना और मार्गदर्शन देने के लिए गांधीजी ने लगातार दो साल तक हर दिन हाथ से एक संदेश लिखकर दिया। बाद में इन संदेशों को ‘अ थॉट फ़ॉर द डे’ (A Thought for the Day) नाम से किताब की शक्ल दी गई। यह नीलामी ‘गांधी: आनंद टी. हिंगोरानी के कलेक्शन से’ नाम से हुई थी, जिसमें यह पांडुलिपि इतनी बड़ी रक़म में बिकी।
पांडुलिपि में क्या है खास?
इन अहम लेखों में गांधीजी के मूल सिद्धांत जैसे सत्य, अहिंसा, ब्रह्मचर्य, अपरिग्रह (ज़रूरत से ज़्यादा चीज़ें न रखना), निडरता, सर्वधर्म समभाव, छुआछूत मिटाना, प्रार्थना, रामनाम, मेहनत, स्वदेशी, कर्तव्य और स्वराज पर उनके गहरे विचार दर्ज हैं। यह दिखाता है कि गांधीजी सिर्फ़ एक स्वतंत्रता सेनानी ही नहीं थे, बल्कि निजी ज़िंदगी में भी कितने दयालु, अनुशासित और करीबी थे।
₹1 करोड़ में बिका गांधीजी का ‘पेटी चरखा’
इस नीलामी में सिर्फ पांडुलिपि ही नहीं, बल्कि गांधीजी की कई निजी चीज़ें भी करोड़ों रुपये में बिकीं:
पेटी चरखा (Peti Charkha): गांधीजी का इस्तेमाल किया हुआ पेटी चरखा और सूत कातने के आध्यात्मिक अनुशासन पर लिखे 2 पत्र ₹1.02 करोड़ में बिके।
ईश्वर पर विचार (Message on God): भगवद्गीता और ईश्वर पर लिखे 3 हस्तलिखित लेखों का सेट ₹1.68 करोड़ में बिका।
गांधीजी का साइन किया हुआ फ़ोटो: गांधीजी की लिखते हुए एक दुर्लभ तस्वीर ₹78 लाख में नीलाम हुई।
चिट्ठियां और पोस्टकार्ड: आर्थिक आत्मनिर्भरता पर लिखे गए पत्रों का एक कलेक्शन ₹57.60 लाख में बिका।
"गांधीजी के जीवन और सिद्धांतों को इतनी क़रीब से दिखाने वाले ऐसे ऐतिहासिक दस्तावेज़ों का नीलाम होना बहुत बड़ी बात है। ये लेख इस बात का सबूत हैं कि गांधीजी जिन मूल्यों का सार्वजनिक रूप से उपदेश देते थे, उन्हें अपनी निजी ज़िंदगी में कैसे अपनाते थे।"
— दिनेश वज़ीरानी, सैफ्रनआर्ट के संस्थापक।
