अदियाला जेल से अस्पताल तक... क्या इमरान खान की रिहाई के पीछे सेना की कोई गुप्त डील है? हामिद मीर के सनसनीखेज खुलासे से शहबाज़ शरीफ़ की सरकार में हड़कंप मच गया है। क्या फिर बदलेगी पाकिस्तान की सत्ता?
Imran Khan Secret Deal: पाकिस्तान की राजनीति में एक बार फिर बड़ा भूचाल आ गया है। भ्रष्टाचार के कई मामलों में अगस्त 2023 से रावलपिंडी की अदियाला जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के प्रमुख इमरान खान को सुप्रीम कोर्ट ने गिरते स्वास्थ्य के आधार पर एक निजी अस्पताल में शिफ्ट करने का आदेश दिया है। इस आदेश के सामने आते ही प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ की सरकार और शरीफ़ परिवार में खलबली मच गई है। वरिष्ठ पाकिस्तानी पत्रकार हामिद मीर ने एक साक्षात्कार में दावा किया है कि कोर्ट की यह राहत पाकिस्तान में पर्दे के पीछे चल रही किसी गुप्त डील की ओर इशारा करती है।
इतिहास का पहिया: क्या 2019 फिर दोहराया जा रहा है?
हामिद मीर के अनुसार, पाकिस्तान का उतार-चढ़ाव भरा राजनीतिक इतिहास गवाह है कि जब भी किसी बड़े नेता को जेल से अदालत द्वारा मेडिकल राहत मिलती है, तो उसके पीछे कोई न कोई गुप्त राजनीतिक समझ-बूझ होती है। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ के मामले की याद दिलाते हुए कहा कि 2018 में इमरान खान के शासनकाल में नवाज़ शरीफ़ को भ्रष्टाचार के मामलों में जेल भेजा गया था। लेकिन 2019 में उन्हें भी मेडिकल आधार पर अंतरिम ज़मानत मिली और लाहौर हाई कोर्ट से इलाज के लिए लंदन जाने की अनुमति मिल गई। नवाज़ शरीफ़ 2023 तक विदेश में रहे और इमरान खान के सत्ता से हटने के बाद ही वापस लौटे। मीर ने कहा कि "इतिहास खुद को दोहरा रहा है" और शरीफ़ परिवार को डर है कि जिस रास्ते से वे सत्ता में आए थे, उसी रास्ते से इमरान भी वापसी कर सकते हैं।
पर्दे के पीछे का खेल और शरीफ़ परिवार का खौफ़
पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज़ (PML-N) के नेताओं में इस फैसले से भारी खलबली है। सीनेटर नासिर भट्ट ने तो यहां तक दावा किया है कि शरीफ़ परिवार के खिलाफ साजिश रची जा रही है और इमरान को जल्द ही रिहा कर उनके घर भेज दिया जाएगा। पाकिस्तानी राजनीति में सेना के प्रभाव को लेकर जब हामिद मीर से पूछा गया कि क्या इस अदालती आदेश को सेना की हरी झंडी मिली है, तो उन्होंने फीकी मुस्कान के साथ कहा, "सेना का कहना है कि वह राजनीति में दखल नहीं देती"-एक ऐसा जवाब जिसने कई अनसुलझे सवाल खड़े कर दिए हैं।
तीन बड़े खतरे जो सरकार की नींद उड़ा रहे हैं!
हामिद मीर ने उन तीन प्रमुख कारणों का विश्लेषण किया जो इस समय शहबाज़ शरीफ़ सरकार पर चौतरफा दबाव बना रहे हैं:
- सत्ताधारी गठबंधन में दरार: पाकिस्तान की गठबंधन सरकार में शामिल PPP के नेता बिलावल भुट्टो ज़र्दारी इन दिनों सरकार से बेहद नाराज़ चल रहे हैं। उन्होंने शहबाज़ सरकार पर PoK चुनावों में धांधली का आरोप लगाते हुए सार्वजनिक तौर पर कहा है कि सरकार की "उल्टी गिनती" शुरू हो चुकी है।
- 'सिस्टम कोलैप्स' का दावा: गृह मंत्री मोहसिन नक़वी ने बयान दिया है कि देश का "सिस्टम ठप हो गया है"। सेना प्रमुख आसिम मुनीर के करीबी माने जाने वाले नक़वी की खुद की राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं छिपी नहीं हैं।
- 'कॉकरोच मूवमेंट' और जन-आक्रोश: पाकिस्तान का युवा वर्ग मौजूदा संसद और न्यायपालिका से पूरी तरह असंतुष्ट है। खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री सुहैल अफरीदी द्वारा इस्लामाबाद मार्च के ऐलान ने PTI समर्थकों में नया जोश भर दिया है।
सेना की भूमिका पर भी उठे सवाल
पाकिस्तान की राजनीति में सेना की भूमिका लंबे समय से चर्चा का विषय रही है। ऐसे में इमरान खान को मिली न्यायिक राहत के बाद यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या सेना की इस घटनाक्रम में कोई भूमिका है। मीर ने सीधे तौर पर सेना की भूमिका की पुष्टि नहीं की। उन्होंने सेना के उस आधिकारिक रुख का हवाला दिया कि वह राजनीति में हस्तक्षेप नहीं करती। हालांकि, उनके जवाब ने इस सवाल को और चर्चा में ला दिया।
शरीफ़ सरकार के सामने एक साथ कई चुनौतियां
इमरान खान का मामला ऐसे समय में सामने आया है जब पाकिस्तान की सत्तारूढ़ व्यवस्था को कई राजनीतिक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। PML-N की सहयोगी PPP के नेता बिलावल भुट्टो ने भी सरकार के खिलाफ नाराज़गी जाहिर की है। मीर के मुताबिक, गठबंधन के भीतर मतभेद बढ़ना शरीफ़ परिवार की चिंता का एक कारण हो सकता है। इसके अलावा, गृह मंत्री मोहसिन नक़वी की 'सिस्टम ठप हो गया है' जैसी टिप्पणी ने भी राजनीतिक बहस को हवा दी है।
क्या जेल से निकलकर फिर लौटेंगे इमरान?
इमरान खान ब्लड प्रेशर, दिल की धड़कन में अनियमिता और मानसिक तनाव से जूझ रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, वे शारीरिक रूप से मजबूत हैं, लेकिन उनकी आँखों की रोशनी से जुड़ी समस्या गंभीर बनी हुई है। 1992 विश्व कप विजेता कप्तान की लोकप्रियता आज भी बरकरार है। पाकिस्तान की अनिश्चित राजनीति में अगर नवाज़ शरीफ़ जेल से बाहर आकर फिर से सत्ता के केंद्र में लौट सकते हैं, तो इमरान खान की वापसी को भी खारिज नहीं किया जा सकता। यही वजह है कि अस्पताल स्थानांतरण का यह आदेश एक सामान्य मेडिकल राहत न होकर इस्लामाबाद के सियासी गलियारों में एक बड़े भावी राजनीतिक बदलाव का संकेत माना जा रहा है।
क्या सड़कों पर उतर सकता है इमरान का समर्थक वर्ग?
हामिद मीर ने पाकिस्तान में युवाओं के असंतोष और संभावित विरोध आंदोलनों का भी जिक्र किया। उनके मुताबिक, अगर इमरान खान को अस्पताल से आगे कोई राजनीतिक राहत मिलती है, तो इसका असर PTI समर्थकों और युवाओं पर पड़ सकता है। खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री सुहैल अफरीदी की 27 सितंबर को इस्लामाबाद मार्च की घोषणा भी इसी संदर्भ में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।


