George Kurian Resignation : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने केंद्रीय मंत्री जॉर्ज कुरियन का इस्तीफा मंजूर कर लिया है। कुरियन 2024 में मोदी सरकार में मंत्री बने थे।

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार में केंद्रीय राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन ने मंत्रीमंडल और अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने केंद्रीय मंत्रिपरिषद से इस्तीफा मंजूर कर लिया है। राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी एक प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, प्रधानमंत्री की सलाह पर यह इस्तीफा मंगलवार को तत्काल प्रभाव से स्वीकार किया गया।

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डेयरी मंत्रालय में मंत्री थे जार्ज कुरियन

जॉर्ज कुरियन अगस्त 2024 से राज्यसभा में सांसद थे। उन्होंने 9 जून, 2024 को केंद्रीय राज्य मंत्री के तौर पर शपथ ली थी। इसके बाद 11 जून, 2024 को उन्होंने अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय और मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय में राज्य मंत्री का पदभार संभाला था।

कौन हैं जॉर्ज कुरियन?

  • इससे पहले, कुरियन राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के उपाध्यक्ष और तत्कालीन केंद्रीय रेल राज्य मंत्री ओ. राजगोपाल के विशेष कार्य अधिकारी (OSD) के रूप में भी काम कर चुके हैं।
  • जॉर्ज कुरियन का जन्म 20 सितंबर, 1960 को Keralam के कोट्टायम जिले की एटुमानूर नगर पालिका के नम्बियाकुलम में हुआ था। उन्होंने अपने होमटाउन से स्कूली पढ़ाई पूरी करने के बाद कानून में ग्रेजुएशन और पोस्ट-ग्रेजुएशन किया। वह भारत के सुप्रीम कोर्ट में वकील के तौर पर प्रैक्टिस भी कर चुके हैं। 

1980 में बीजेपी से जुड़े हैं जॉर्ज कुरियन

बता दें कि कुरियन की गिनती बीजेपी की सबसे सीनियर नेताओं में होती है। उन्होंने अटल बिहारी और लालकृष्ण आडवाणी के साथ काम किया है। यानि वह पार्टी की स्थापना के शुरुआत से ही जुड़े हैं। 1980 में बीजेपी के गठन के बाद से ही वह पार्टी में कई अहम पद और जिम्मेदारियां उठा चुके हैं। उन्होंने केरल जैसे राज्य में बीजेपी का विस्तार किया।

क्यों जॉर्ज कुरियन ने दिया इस्तीफा

बता दें कि कुरियन राज्यसभा सांसद हैं, इसी कोटे से अगस्त 2024 में वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीसरे कार्यकाल के दौरान केंद्रीय मंत्री बनाए गए थे। उन्हें अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय और मत्स्य पालन मंत्रालय में राज्य मंत्री बनाया था। लेकिन अब उनकी उनकी राज्यसभा सदस्यता की अवधि अब पूरी हो चुकी है। ऐसे में भारतीय संविधान के अनुसार किसी भी केंद्रीय मंत्री का संसद के किसी सदन का सदस्य होना जरूरी होता है। तभी वह मंत्री बन सकता है। इसलिए उन्हें इस्तीफा देना पड़ा है।