Global Hunger Index 2025: ग्लोबल हंगर इंडेक्स की रिपोर्ट में पाकिस्तान में बढ़ते कुपोषण और बच्चों के कम वजन पर चिंता जताई गई है। जानिए दक्षिण एशिया और दुनिया में खाद्य संकट क्यों गहरा रहा है।
पड़ोसी देश पाकिस्तान में महंगाई और आर्थिक बदहाली का असर अब लोगों की थाली तक पहुंच गया है। खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतें, जलवायु आपदाएं और आर्थिक अस्थिरता लोगों के लिए पर्याप्त भोजन जुटाना मुश्किल बना रही हैं। ग्लोबल हंगर इंडेक्स की रिपोर्ट पाकिस्तान में कुपोषण और बच्चों के कम वजन की समस्या को लेकर चिंता जताती है। इतना ही नहीं, दुनिया में भुखमरी के खिलाफ वर्षों की प्रगति भी अब धीमी पड़ती दिख रही है।
पाकिस्तान में कुपोषण बढ़ा, बच्चों पर सबसे ज्यादा असर
ग्लोबल हंगर इंडेक्स की रिपोर्ट के मुताबिक, 2018 के बाद पाकिस्तान और अफगानिस्तान में खाद्य सुरक्षा की स्थिति खराब हुई है। पाकिस्तान में कुपोषण का स्तर पहले की तुलना में बढ़कर मध्यम श्रेणी में पहुंच गया है, जबकि बच्चों में वेस्टिंग यानी उम्र के अनुपात में बेहद कम वजन की समस्या उच्च स्तर पर है।
रिपोर्ट के अनुसार, आर्थिक अस्थिरता और खाद्य पदार्थों की महंगाई ने लोगों की खरीदने की क्षमता घटाई है। इससे पौष्टिक भोजन तक पहुंच भी प्रभावित हुई है।
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दक्षिण एशिया में करोड़ों लोग कुपोषण के शिकार
रिपोर्ट में दक्षिण एशिया का क्षेत्रीय स्कोर 23.5 बताया गया है। यह साल 2000 के 37.5 के स्तर से बेहतर है, लेकिन ज्यादातर सुधार 2018 से पहले हुआ था। खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) के मुताबिक, 2023 से 2025 के बीच दक्षिण एशिया में करीब 21.8 करोड़ लोग कुपोषण से प्रभावित थे।
पाकिस्तान और बांग्लादेश के कुछ हिस्सों में भारी बारिश और बाढ़ से फसलों को नुकसान पहुंचा है। वहीं, अफगानिस्तान में कम बारिश और ज्यादा तापमान ने अनाज उत्पादन को प्रभावित किया है। बच्चों में स्टंटिंग यानी उम्र के हिसाब से कम लंबाई की समस्या भी गंभीर बनी हुई है।
दुनिया में भी भुखमरी का संकट क्यों बढ़ रहा?
रिपोर्ट वैश्विक स्तर पर संघर्षों, प्राकृतिक आपदाओं और खाद्य सहायता में कटौती को भुखमरी बढ़ने की प्रमुख वजहों में गिनाती है। ईंधन, परिवहन और उर्वरकों की बढ़ती लागत खाद्य आपूर्ति को महंगा बना सकती है। रूस-यूक्रेन युद्ध और समुद्री व्यापार में बाधाएं भी अनाज की कीमतों पर दबाव डाल सकती हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, 2018 के बाद 32 देशों में भुखमरी की स्थिति बिगड़ी है। वहीं, 57 देश 2030 तक भुखमरी के निम्न स्तर को हासिल करने में पीछे रह सकते हैं। विशेषज्ञों की रिपोर्ट सरकारों से मानवीय सहायता और खाद्य सुरक्षा से जुड़े डेटा पर निवेश बढ़ाने की जरूरत बताती है।
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