कानपुर के दवा कारोबारी विनीत मिनोचा की हत्या और बेटे सुब्रत के जेल जाने के बाद कारोबार चलाने में परेशानी हो रही है। पुनीता मिनोचा ने पावर ऑफ अटॉर्नी के लिए अदालत से अनुमति मांगी।
कानपुर में दवा कारोबारी विनीत मिनोचा की हत्या के बाद उनके परिवार के सामने अब कारोबार संभालने की चुनौती खड़ी हो गई है। पति की मौत के बाद जिम्मेदारी संभाल रहीं पुनीता मिनोचा को बैंक खाते से रकम निकालने, कर्मचारियों को वेतन देने और दवा कंपनियों का भुगतान करने में परेशानी हो रही है। वजह है कि उनका बेटा सुब्रत मिनोचा जेल में बंद है और बैंक खाते से रकम निकालने के लिए संयुक्त हस्ताक्षर की शर्त बताई गई है। इस समस्या के समाधान के लिए पुनीता ने अदालत से पावर ऑफ अटॉर्नी पंजीकृत कराने की अनुमति मांगी है।
पति की हत्या के बाद कारोबार संभाल रहीं पुनीता
कल्याणपुर के इंदिरा नगर स्थित रतन आर्बिट अपार्टमेंट के फ्लैट नंबर C-104 में 5 सितंबर को विनीत मिनोचा का शव मिला था। उनकी चाकू से वार कर हत्या की गई थी। पुलिस ने मामले में पुराने नौकर विशाल गौतम, उसके साथी राजकिशोर और बेटे सुब्रत मिनोचा को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। विनीत की मौत के बाद पुनीता ने कारोबार की जिम्मेदारी संभाली, लेकिन सुब्रत के जेल में होने से रोजमर्रा के वित्तीय कामों में अड़चनें आने लगीं।
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बैंक में पैसा जमा, फिर भी भुगतान में परेशानी
वरिष्ठ अधिवक्ता एवं पूर्व डीजीसी पीयूष शुक्ला के मुताबिक, बिरहाना रोड स्थित मेसर्स फार्मा ट्रेडर्स की आय ICICI बैंक खाते में जमा हो रही है। लेकिन खाते से रकम निकालने के लिए दोनों के हस्ताक्षर की शर्त होने के कारण पुनीता को दिक्कत आ रही है। इसका असर कर्मचारियों के वेतन और दवा कंपनियों के बकाये के भुगतान पर पड़ रहा है। कारोबार से जुड़े जरूरी कामों को सुचारु रखने के लिए अदालत में अर्जी दाखिल की गई है।
फर्म में किसकी कितनी हिस्सेदारी?
अधिवक्ता के अनुसार, फर्म में पहले विनीत की 50 प्रतिशत, सुब्रत की 30 प्रतिशत और पुनीता की 20 प्रतिशत हिस्सेदारी थी। विनीत की वसीयत में उनकी हिस्सेदारी पत्नी को देने का उल्लेख है। इसके आधार पर पुनीता की हिस्सेदारी 70 प्रतिशत और सुब्रत की 30 प्रतिशत बताई गई है।
पुनीता ने अदालत से सुब्रत की ओर से पावर ऑफ अटॉर्नी पंजीकृत कराने की अनुमति मांगी है। अर्जी में जेल अधीक्षक और सब-रजिस्ट्रार को भी पक्षकार बनाया गया है। अधिवक्ता के मुताबिक, रजिस्ट्रेशन एक्ट, 1908 की धारा 35 का हवाला देते हुए सब-रजिस्ट्रार से जेल जाकर प्रक्रिया पूरी कराने का अनुरोध किया गया है। अब अदालत की सुनवाई और आदेश का इंतजार है।
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