NEET-UG 2026 परीक्षा रद्द होने के बाद गोवा में 17 वर्षीय छात्र की कथित आत्महत्या ने देश को झकझोर दिया। सुसाइड नोट में प्रतियोगी परीक्षाओं के दबाव का जिक्र सामने आया है। मामले में CBI पेपर लीक नेटवर्क की जांच कर रही है।

NEET Exam Controversy: देश की सबसे कठिन मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं में शामिल NEET केवल एक एग्जाम नहीं, बल्कि लाखों छात्रों के सपनों और परिवारों की उम्मीदों का केंद्र बन चुका है. लेकिन जब यही परीक्षा विवादों, पेपर लीक और अनिश्चितता में घिर जाती है, तो उसका असर केवल करियर तक सीमित नहीं रहता. गोवा से सामने आई एक दर्दनाक घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया है.

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गोवा के कर्टोरिम इलाके में रहने वाले 17 वर्षीय छात्र ने कथित तौर पर आत्महत्या कर ली. शुरुआती जांच में सामने आया है कि छात्र NEET-UG 2026 परीक्षा रद्द होने की खबर से बेहद परेशान था और दोबारा परीक्षा देने के दबाव को लेकर मानसिक तनाव में चल रहा था. यह मामला केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि देश की परीक्षा व्यवस्था और छात्रों पर बढ़ते मानसिक दबाव को लेकर गंभीर बहस खड़ी कर रहा है.

घर में अकेला था छात्र, पिता ने लौटकर देखा दर्दनाक मंजर

जानकारी के मुताबिक छात्र मूल रूप से बेंगलुरु का रहने वाला था और गोवा के मारगांव क्षेत्र के एक हायर सेकेंडरी स्कूल में पढ़ाई कर रहा था. वह अपने परिवार के साथ नेसाई, कर्टोरिम में रह रहा था. घटना मंगलवार की बताई जा रही है. उस समय छात्र घर में अकेला था. उसकी मां और बहन अपने पैतृक गांव गई हुई थीं, जबकि पिता रेलवे में गार्ड के पद पर तैनात हैं और ड्यूटी पर गए थे. जब पिता काम से लौटे तो उन्होंने बेटे को फंदे से लटका हुआ पाया. इसके बाद स्थानीय पुलिस को सूचना दी गई.

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सुसाइड नोट में छलका दर्द

पुलिस को मौके से एक कथित सुसाइड नोट भी मिला है. शुरुआती जानकारी के अनुसार छात्र ने नोट में लिखा था कि वह अब किसी भी प्रतिस्पर्धी परीक्षा में शामिल नहीं होना चाहता. सूत्रों के मुताबिक छात्र NEET-UG 2026 परीक्षा रद्द होने के बाद मानसिक रूप से टूट गया था. उसे इस बात का गहरा तनाव था कि अब पूरी तैयारी और कठिन प्रक्रिया से दोबारा गुजरना पड़ेगा. हालांकि पुलिस मामले की जांच कर रही है और आधिकारिक रूप से सभी पहलुओं की पुष्टि अभी बाकी है.

क्यों रद्द हुई NEET-UG 2026 परीक्षा?

NEET-UG 2026 परीक्षा 3 मई को आयोजित की गई थी, लेकिन बाद में पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ी के आरोप सामने आने लगे. इसके बाद राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी यानी National Testing Agency ने परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया. मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच Central Bureau of Investigation को सौंप दी गई. CBI ने आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और अन्य धाराओं में केस दर्ज किया है.

पेपर लीक नेटवर्क की जांच में बड़े खुलासे

जांच एजेंसियों के मुताबिक पेपर लीक का नेटवर्क कई राज्यों तक फैला हुआ था. शुरुआती जांच में हरियाणा, राजस्थान और उत्तराखंड तक इसके तार जुड़े होने की बात सामने आई है. सूत्रों के अनुसार प्रश्नपत्र व्हाट्सएप और टेलीग्राम ग्रुप्स के जरिए फैलाए गए थे. जांच के दौरान दो भाइयों, मंगीलाल और दिनेश बिवाल को गिरफ्तार किया गया है. आरोप है कि उन्होंने गुरुग्राम के एक डॉक्टर से पेपर हासिल किया था. अब जांच एजेंसियां उन छात्रों और अभिभावकों की पहचान करने में जुटी हैं, जिन्होंने कथित तौर पर लीक पेपर खरीदने के लिए पैसे दिए थे.

छात्रों पर बढ़ता मानसिक दबाव बना चिंता का विषय

विशेषज्ञों का कहना है कि मेडिकल और इंजीनियरिंग जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार बढ़ती प्रतिस्पर्धा छात्रों पर भारी मानसिक दबाव डाल रही है. हर साल लाखों छात्र सीमित सीटों के लिए तैयारी करते हैं. कई छात्र वर्षों तक कोचिंग, टेस्ट सीरीज और लगातार पढ़ाई के दबाव में रहते हैं. ऐसे में परीक्षा रद्द होना या अनिश्चितता पैदा होना कई छात्रों के लिए भावनात्मक रूप से बेहद मुश्किल स्थिति बन सकता है. मनोवैज्ञानिक मानते हैं कि ऐसे समय में परिवार, स्कूल और संस्थानों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है. छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को केवल “पढ़ाई का हिस्सा” मानकर नजरअंदाज करना खतरनाक साबित हो सकता है.

परीक्षा व्यवस्था पर उठ रहे सवाल

NEET जैसी राष्ट्रीय परीक्षा में बार-बार पेपर लीक और गड़बड़ी के आरोप सामने आने से छात्रों और अभिभावकों का भरोसा प्रभावित हो रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि केवल जांच और गिरफ्तारी काफी नहीं है, बल्कि परीक्षा प्रणाली को तकनीकी रूप से और अधिक सुरक्षित बनाने की जरूरत है, ताकि मेहनत करने वाले छात्रों का विश्वास बना रहे. गोवा की यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए केवल अकादमिक सहायता ही नहीं, बल्कि मानसिक और भावनात्मक सहयोग भी उतना ही जरूरी है.

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Disclaimer: आत्महत्या किसी समस्या का हल नहीं है। अगर आपके मन में भी सुसाइड या खुद को चोट पहुंचाने जैसे ख्याल आ रहे हैं तो आप फौरन घर-परिवार, दोस्तों और साइकेट्रिस्ट की मदद ले सकते हैं। इसके अलावा आप इन हेल्पलाइन नंबरों पर कॉल करके भी मदद मांग सकते हैं। आसरा (मुंबई) 022-27546669, सुमैत्री (दिल्ली) 011-23389090, रोशनी (हैदराबाद) 040-66202000, लाइफलाइन 033-64643267 (कोलकाता)। मानसिक तनाव होने पर काउंसलिंग के लिए हेल्पलाइन नंबर 14416 और 1800 8914416 पर संपर्क कर घर बैठे मदद पा सकते हैं।