Fake bank website scam: जालसाज गूगल की 'फायरबेस' सर्विस का दुरुपयोग कर फर्जी बैंकिंग वेबसाइट व ऐप बना रहे हैं। ये यूजर्स की क्रेडिट कार्ड और OTP जैसी वित्तीय जानकारी चुराते हैं। सरकार ने गूगल को ऐसे सैकड़ों अकाउंट्स बंद करने का निर्देश दिया है।
Fake banking apps: बड़े बैंकों के नाम पर फर्जी वेबसाइट और ऐप बनाकर ऑनलाइन फ्रॉड करने का एक बड़ा मामला सामने आया है। जालसाज इसके लिए गूगल की 'फायरबेस' सर्विस का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं। सरकार ने पाया कि ये धोखेबाज खतरनाक सॉफ्टवेयर फैलाने और यूजर्स के फोन से उनकी फाइनेंशियल जानकारी चुराने के लिए फायरबेस का इस्तेमाल कर रहे थे। इसके बाद केंद्र सरकार ने गूगल को ऐसे सैकड़ों अकाउंट्स को बंद करने का निर्देश दिया है।
सिर्फ अगस्त में 57 वेबसाइटें
इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर ने अकेले अगस्त महीने में गूगल को फायरबेस पर चल रही कम से कम 57 वेबसाइटों और डेटाबेस को हटाने के लिए कहा। जांच में पता चला कि इनका इस्तेमाल यूजर्स के फोन से क्रेडिट कार्ड की जानकारी और वन-टाइम पासवर्ड (OTP) जैसे सीक्रेट डेटा चुराने के लिए किया जा रहा था। गूगल को नोटिस मिलने के 3 घंटे के अंदर संबंधित लिंक हटाने का निर्देश भी दिया गया है।
बैंकों के नाम पर फर्जी ऐप्स
जिन 57 वेबसाइटों और डेटाबेस को हटाने के लिए कहा गया, उनमें से 7 पेज भारत के बड़े बैंकों के नाम और लोगो की नकल करके बनाए गए थे। कुछ फर्जी वेबसाइटें स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI), ICICI बैंक और एक्सिस बैंक जैसे बैंकों के नाम पर चल रही थीं। ये जालसाज नए क्रेडिट कार्ड, रिवॉर्ड पॉइंट्स या क्रेडिट लिमिट बढ़ाने जैसे ऑफर्स का लालच देकर यूजर्स को ऐप इंस्टॉल करने के लिए उकसाते थे।
ऐप इंस्टॉल करते ही जानकारी लीक
धोखेबाजों ने इन खतरनाक ऐप्स को बिल्कुल असली बैंकिंग ऐप्स जैसा बनाया था। जैसे ही कोई यूजर ऐप इंस्टॉल करता है, उसके फोन की सारी जानकारी जालसाजों के कंट्रोल वाले फायरबेस डेटाबेस में चली जाती है। अधिकारियों ने पाया कि इसके जरिए धोखेबाज फोन में मौजूद दूसरे ऐप्स तक भी पहुंच बना सकते हैं और बैंकिंग जानकारी का इस्तेमाल करके पैसे उड़ा सकते हैं।
किसान योजना के नाम पर भी धोखाधड़ी
जांच में यह भी पता चला है कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के नाम पर भी धोखाधड़ी की जा रही है। जालसाज लोगों को आर्थिक मदद दिलाने का वादा करके फर्जी वेबसाइटों पर ले जाते हैं। फिर पैसे पाने के लिए एक खास ऐप डाउनलोड करने को कहा जाता है। ऐप इंस्टॉल होते ही यूजर की सारी जानकारी धोखेबाजों के डेटाबेस में पहुंच जाती है।
‘एंड्रॉयड गॉड मोड’ का खतरा
साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स ऐसे खतरनाक ऐप्स को ‘एंड्रॉयड गॉड मोड’ कहते हैं। यह एक ऐसा खतरनाक सॉफ्टवेयर है, जो जालसाजों को यूजर के फोन पर लगभग पूरा कंट्रोल दे देता है। इस तरह के ऐप्स को अक्सर बैंकिंग, सरकारी सेवाओं या बिजली कंपनियों जैसे भरोसेमंद संस्थानों के नाम और लोगो का इस्तेमाल करके फैलाया जाता है। आमतौर पर मैसेज या दूसरे ऑनलाइन तरीकों से भेजे गए लिंक पर क्लिक करके ऐप इंस्टॉल करने के लिए कहा जाता है।
डिजिटल लेनदेन बढ़ने के साथ बढ़ी ठगी
भारत में डिजिटल पेमेंट बहुत तेजी से बढ़ रहा है और इसी के साथ साइबर फ्रॉड के मामले भी बढ़ रहे हैं। एक सरकारी अनुमान के मुताबिक, 2025 तक साइबर धोखाधड़ी से भारतीयों को करीब 2.4 बिलियन डॉलर का नुकसान हो सकता है। मार्च 2026 में खत्म हुए एक साल में, भारत के रियल-टाइम पेमेंट सिस्टम के जरिए ही लगभग 242 बिलियन लेनदेन हुए। इसके साथ ही भारत दुनिया के सबसे बड़े डिजिटल पेमेंट बाजारों में से एक बन गया है।
गूगल का क्या कहना है?
इस मामले पर गूगल ने साफ किया है कि वह फिशिंग, मैलवेयर सॉफ्टवेयर और फाइनेंशियल फ्रॉड जैसी गतिविधियों के लिए अपनी सेवाओं के इस्तेमाल पर सख्ती से रोक लगाता है। कंपनी ने यह भी कहा कि कानून लागू करने वाली एजेंसियों से मिलने वाली शिकायतों और कंटेंट हटाने के निर्देशों की जांच करके जरूरी कार्रवाई की जाती है।


