Gorakhpur Kidnapping Case: गोरखपुर में 12 वर्षीय बच्चे ने पढ़ाई से बचने के लिए रास्ते में 'बचाओ, किडनैपर' चिल्लाना शुरू कर दिया। सूचना पर पुलिस ने 50 से ज्यादा CCTV खंगाले, लेकिन जांच में पता चला कि कथित किडनैपर कोई और नहीं बल्कि बच्चे के अपने माता-पिता ही थे।
Gorakhpur Viral Video: गोरखपुर में सामने आया एक मामला पहले अपहरण की सनसनी बन गया, लेकिन जांच पूरी होने पर इसकी सच्चाई ने पुलिस को भी चौंका दिया। एक 12 वर्षीय बच्चा बाइक पर बैठकर लगातार "बचाओ... बचाओ... किडनैपर" चिल्लाता रहा। राहगीरों ने इसे अपहरण समझकर तुरंत पुलिस को सूचना दी। इसके बाद दो थानों की पुलिस और चार टीमें हरकत में आ गईं। करीब 50 सीसीटीवी कैमरों की जांच के बाद जो सच सामने आया, उसने सभी को हैरान कर दिया।
'किडनैपर' निकले बच्चे के अपने माता-पिता
जानकारी के मुताबिक, चिलुआताल थाना क्षेत्र के शास्त्री नगर निवासी 12 वर्षीय भरत भूषण पिछले कुछ दिनों से अपने मामा के घर रह रहा था। परिवार का कहना है कि बच्चा पढ़ाई में रुचि नहीं ले रहा था, इसलिए उसकी मां शालिनी उसे कुछ दिन के लिए मामा के घर छोड़ आई थीं।
बुधवार को जब माता-पिता उसे वापस घर ले जाने पहुंचे तो बच्चे ने जाने से इनकार कर दिया। काफी समझाने के बाद भी वह नहीं माना। आखिरकार मां उसे बाइक पर बैठाकर घर ले जाने लगी। इसी दौरान बच्चा रास्ते भर जोर-जोर से "बचाओ... बचाओ... किडनैपर" चिल्लाने लगा। यह देखकर राहगीरों को अपहरण का शक हुआ और उन्होंने पुलिस को सूचना दे दी।
50 CCTV कैमरे खंगालने के बाद सामने आई सच्चाई
सूचना मिलते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। अधिकारियों के निर्देश पर चिलुआताल और गुलरिया थाना पुलिस की संयुक्त टीम बनाई गई। पुलिस ने इलाके के 50 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली और बाइक का पीछा करते हुए बच्चे तक पहुंची। पूछताछ में पता चला कि जिन लोगों को बच्चा किडनैपर बता रहा था, वे उसके अपने माता-पिता थे। परिवार ने पुलिस को बताया कि बच्चा सिर्फ पढ़ाई से बचने और मामा के घर रुकने के लिए ऐसा कर रहा था।
पुलिस ने जांच के बाद परिवार को जाने दिया
सीओ गोरखनाथ रवि कुमार सिंह ने बताया कि स्पोर्ट्स कॉलेज के पास एक राहगीर ने कंट्रोल रूम को सूचना दी थी कि एक बच्चा बाइक पर बैठा "बचाओ, किडनैपर" चिल्ला रहा है। सूचना को गंभीरता से लेते हुए तत्काल चार टीमें गठित की गईं और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर जांच शुरू की गई।
जांच में स्पष्ट हुआ कि कोई अपहरण नहीं हुआ था। बच्चा अपने माता-पिता के साथ सुरक्षित था और घर जाने से बचने के लिए ऐसा कर रहा था। आवश्यक पूछताछ और वीडियोग्राफी की प्रक्रिया पूरी करने के बाद पुलिस ने परिवार को जाने दिया। इस घटना ने यह भी दिखाया कि पुलिस ने सूचना मिलने के बाद बिना देर किए तेजी से कार्रवाई की, जिससे संभावित खतरे की पूरी तरह जांच सुनिश्चित हो सकी।


