Paper Leak Bill 2026: केंद्र सरकार ने नया Public Examinations Amendment Bill 2026 पेश कर दिया है। अब पेपर लीक करने वालों की खैर नहीं होगी। जानें 5 बड़े बदलाव।
Anti-Paper Leak Bill 2026: केंद्र सरकार ने सोमवार को पेपर लीक और नकल रोकने के लिए नया कानून (संशोधन बिल 2026) पेश कर दिया है। यह 2024 में बने पुराने कानून से कहीं ज्यादा सख्त है। हाल ही में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में हुए छात्रों के भारी विरोध प्रदर्शन और पीएम नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) के वादे के बाद यह सख्त कदम उठाया गया है। सरकार का मकसद साफ है कि पेपर लीक करने वालों को ऐसी सजा मिले जो मिसाल बने। नए एंटी-पेपर लीक बिल में क्या-क्या बदला? आइए 5 पॉइंट्स में समझते हैं...
नए एंटी-पेपर लीक बिल के 5 सबसे बड़े बदलाव
1. संगठित पेपर लीक पर अब 10 साल की जेल
पहले क्या था: 2024 के कानून के तहत संगठित नकल और पेपर लीक में शामिल लोगों के लिए अधिकतम 5 साल की सजा का प्रावधान था।
अब क्या होगा: नए बिल में इसे दोगुना बढ़ाकर 10 साल कर दिया गया है। सरकार का स्पष्ट मानना है कि पेपर लीक कोई सामान्य अपराध नहीं, बल्कि एक संगठित आपराधिक नेटवर्क (Organized Crime Network) है, जिससे निपटने के लिए कठोरतम कानून जरूरी है।
2. नकल माफियाओं पर ₹10 करोड़ का भारी जुर्माना और वसूली
पहले क्या था: जुर्माने की सीमा कम थी, जिसे कोचिंग माफिया आसानी से भरकर छूट जाते थे।
अब क्या होगा: दोषियों पर अधिकतम ₹10 करोड़ तक का जुर्माना लगेगा। सबसे बड़ी बात कि अगर पेपर लीक से परीक्षा रद्द हुई, तो दोबारा एग्जाम कराने का पूरा खर्च भी आरोपियों की संपत्ति बेचकर वसूला जाएगा।
3. AI और डिजिटल नकल भी कानून के दायरे में
पहले क्या था: कानून में ज्यादा फोकस पर्चा आउट होने (फिजिकल पेपर लीक) पर था।
अब क्या होगा: नकल के नए तरीकों को भी कानून में जोड़ा गया है। अगर किसी ने AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) की मदद से नकल कराई, सिस्टम हैक किया या स्क्रीन शेयरिंग से धांधली की, तो उस पर भी 10 साल जेल वाला यही कानून लागू होगा।
4.सिर्फ सॉल्वर नहीं, अब अधिकारी और कंपनियां भी नपेंगी
पहले क्या था: अक्सर सिर्फ पर्चा लीक करने वाले छोटे दलाल या छात्र पकड़े जाते थे।
अब क्या होगा: अब परीक्षा कराने वाली एजेंसियां जैसे NTA, टेक कंपनियां (जो कंप्यूटर लैब देती हैं), कोचिंग सेंटर और सरकारी अधिकारी भी कानून के दायरे में होंगे। अगर इनकी लापरवाही या मिलीभगत साबित हुई, तो सीधे जेल होगी।
5. फास्ट-ट्रैक कोर्ट में सुनवाई, तुरंत होगी सजा
पहले क्या था: कोर्ट में केस सालों तक चलता था और आरोपी जमानत पर बाहर आ जाते थे।
अब क्या होगा: पेपर लीक के केस सुनने के लिए स्पेशल 'फास्ट-ट्रैक कोर्ट' बनेंगे। जांच एजेंसियों (CBI या पुलिस) को ज्यादा पावर दी गई है, ताकि दोषियों को बिना देरी के तुरंत सजा मिल सके।
पीएम मोदी ने सख्त से सख्त सजा का किया था वादा
नया संशोधन हाल में हुए युवा आंदोलनों, विशेष रूप से कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में हुए हफ्तों लंबे विरोध प्रदर्शनों के बाद उठाया गया है। छात्रों की मांग थी कि पेपर लीक करने वालों पर सिर्फ दिखावटी कार्रवाई न हो, बल्कि सिस्टम को पूरी तरह साफ किया जाए। छात्रों के गुस्से और चिंताओं को देखते हुए, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद राष्ट्र के नाम संबोधन में यह भरोसा दिलाया था कि किसी भी ईमानदार छात्र की मेहनत बेकार नहीं जाने दी जाएगी। पीएम मोदी ने पेपर लीक माफियाओं के खिलाफ फास्ट-ट्रैक कोर्ट (Fast-track courts) बनाने और बिना किसी देरी के सख्त सजा देने का वादा किया था।
NTA में सुधार के लिए नंदन नीलेकणी के हाथ में कमान
सिर्फ कानून सख्त करना ही नहीं, बल्कि सिस्टम की कमियों को हमेशा के लिए खत्म करने के लिए सरकार ने एक हाई-पावर्ड टास्क फोर्स का गठन किया है। इसकी जिम्मेदारी इंफोसिस (Infosys) के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणी (Nandan Nilekani) को सौंपी गई है। यह टीम नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) में तकनीकी सुधारों (Technology-driven reforms) पर काम करेगी, ताकि परीक्षा प्रणाली में छात्रों का भरोसा फिर से लौट सके।


