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ईरान-इजरायल तनाव से बिगड़ सकता है तेल का खेल, 110 डॉलर तक जा सकते हैं दाम!

इजरायल के ईरान पर हमले के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास तनाव बढ़ गया है। इससे तेल बाजारों पर भारी दबाव है। अगर ईरान ने सप्लाई रूट में रुकावट डाली तो कच्चे तेल की कीमतें 95 से 110 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं।

4 Min read
Author : Surya Prakash Tripathi
Published : Feb 28 2026, 04:05 PM IST
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Image Credit : Getty

इजरायल के ईरान पर हमले के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) दुनिया का सबसे बड़ा टेंशन पॉइंट बन गया है। यह एक संकरा समुद्री रास्ता है, जहां से दुनिया का ज्यादातर कच्चा तेल और LNG गैस गुजरती है। अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन के आंकड़ों के मुताबिक, 2024 में यहां से रोजाना करीब 20 मिलियन बैरल तेल की सप्लाई हुई। अगर यहां कोई भी रुकावट आती है, तो पूरी दुनिया में तेल की कीमतें बढ़ जाएंगी।

एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक है। इस इलाके में तनाव के खतरे से भी बाजार हिल जाते हैं।

सालों के प्रतिबंधों के बावजूद ईरान आज भी दुनिया के टॉप तेल उत्पादकों में शामिल है। 1970 के दशक में, यह दुनिया के सबसे बड़े उत्पादकों में से एक था, जो रोजाना लगभग छह मिलियन बैरल तेल निकालता था। ओपेक के अनुसार, आज उत्पादन लगभग 3.1 मिलियन बैरल प्रतिदिन है। ईरान के पास दुनिया के सबसे बड़े कच्चे तेल के भंडारों में से एक है, जो इसे वैश्विक ऊर्जा बाजारों के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बनाए रखता है।

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Image Credit : Asianet News

NDTV की एक रिपोर्ट में इक्विरस सिक्योरिटीज (Equirus Securities) के हवाले से कहा गया है कि अगर ईरान ने सप्लाई रोकी तो कच्चे तेल की कीमतें 95 से 110 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं। ईरान रोजाना करीब 3.3 मिलियन बैरल तेल का उत्पादन करता है, जो दुनिया की कुल सप्लाई का लगभग 3% है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि सप्लाई में 1% की कमी से कीमतें 3 से 5% तक बढ़ सकती हैं। अगर सिर्फ ईरानी सप्लाई बाधित होती है, तो कीमतें 9 से 15% तक बढ़ सकती हैं।

जब तेल की कीमत 70 डॉलर प्रति बैरल के करीब थी, तो इसका मतलब होता कि कीमतों में सीधे 6 से 11 डॉलर की बढ़ोतरी होगी, जिससे कीमतें बिना किसी बड़ी रुकावट के 76 से 81 डॉलर तक पहुंच जाएंगी।

ईरान को तेल निकालने में सिर्फ 10 डॉलर प्रति बैरल का खर्च आता है। सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे कुछ ही देशों की उत्पादन लागत इतनी कम है। इस वजह से, जब वैश्विक तेल की कीमतें बढ़ती हैं तो ईरान को बहुत फायदा होता है। अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद देश की अर्थव्यवस्था तेल से होने वाली आय पर बहुत अधिक निर्भर है। विश्लेषकों का अनुमान है कि ईरान रोजाना लगभग 1.3 से 1.5 मिलियन बैरल का निर्यात करता है, जिसका अधिकांश हिस्सा चीनी रिफाइनरियों में जाता है।

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Image Credit : Getty

हालांकि, बाजार सिर्फ सप्लाई में कमी पर ही रिएक्ट नहीं करते। अगर होर्मुज जलडमरूमध्य से शिपिंग को खतरा होता है, तो कीमतों में 'जियोपॉलिटिकल प्रीमियम' जुड़ जाता है। इक्विरस का अनुमान है कि यह प्रीमियम 20 से 40 डॉलर प्रति बैरल तक हो सकता है। ऐसी बढ़ोतरी तेल को 95 से 110 डॉलर प्रति बैरल के करीब या उससे आगे धकेल देगी।

जब से अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में अपनी सैन्य तैनाती बढ़ाई है, कच्चे तेल की कीमतें पहले ही करीब 10% बढ़ चुकी हैं। बढ़ती तेल की कीमतें दुनिया भर में महंगाई को और बढ़ा सकती हैं, जिससे ईंधन, परिवहन और भोजन की लागत प्रभावित होगी। 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर की वृद्धि 2022 की शुरुआत के बाद से उच्चतम स्तर होगी। उच्च ऊर्जा लागत वैश्विक आर्थिक विकास को धीमा कर सकती है।

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Image Credit : Getty

इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप की एक रिपोर्ट कहती है कि ईरान के पास होर्मुज को पूरी तरह बंद किए बिना भी कई विकल्प हैं। इनमें तेल टैंकरों को परेशान करना, सैन्य अभ्यास के दौरान जहाजों की आवाजाही रोकना, या जहाजों पर ड्रोन उड़ाना शामिल है। ऐसी कार्रवाइयां बिना किसी औपचारिक नाकाबंदी की घोषणा किए शिपिंग लागत और बीमा दरों को बढ़ा सकती हैं। ईरान बाजारों को चेतावनी का संकेत देने के लिए ट्रैफिक को धीमा या अस्थायी रूप से सीमित भी कर सकता है।

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Image Credit : X

अगर होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह बंद होता है, तो इससे ग्लोबल एनर्जी ट्रेड ठप हो जाएगा। इसके जवाब में अमेरिका नौसैनिक कार्रवाई कर सकता है। साथ ही, ईरान का अपना तेल निर्यात भी प्रभावित होगा, जो उसकी अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा सकता है।

अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा- संयुक्त राज्य अमेरिका की नीति के अनुसार, विशेष रूप से उनके प्रशासन की, 'ईरान के आतंकवादी शासन' को बढ़ते इजरायल-ईरान संघर्ष के बीच कभी भी परमाणु हथियार रखने की इजाजत नहीं दी जा सकती।

#WATCH | US President Donald Trump says, "A short time ago, the United States military began major combat operations in Iran. Our objective is to defend the American people by eliminating imminent threats from the Iranian regime, a vicious group of very hard, terrible people. Its… pic.twitter.com/EJNaBlYWCm

— ANI (@ANI) February 28, 2026

अपने वीडियो संबोधन में, ट्रंप ने ईरान को दुनिया का नंबर एक आतंकवादी प्रायोजक देश बताते हुए कहा कि देश ने विरोध प्रदर्शनों पर अपने ही हजारों नागरिकों को सड़क पर मार डाला।

(एएफपी इनपुट्स के साथ)

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About the Author

SP
Surya Prakash Tripathi
सूर्य प्रकाश त्रिपाठी। 20 जुलाई 2003 से पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्यरत। कुल 22 साल का अनुभव। 19 फरवरी 2024 से एशियानेट न्यूज हिंदी के साथ जुड़े हुए हैं। पत्रकारिता में परास्नातक की डिग्री के साथ इन्होंने डबल MA LLB भी किया हुआ है। इन्होंने क्राइम, धर्म और राजनीति के साथ सामाजिक मुद्दों पर लिखने की रुचि है। हिंदी दैनिक आज, डेली न्यूज एक्टिविस्ट, अमर उजाला, दैनिक भास्कर डिजिटल (DB DIGITAL) जैसे मीडिया संस्थानों में भी सूर्या सेवाएं दे चुके हैं।
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