ईरान ने अमेरिका का F-15 फाइटर जेट मार गिराया। विमान का पायलट दुश्मन की धरती पर उतर गया। अमेरिकी सेना ने एक साहसी बचाव अभियान चलाकर अपने सीनियर कर्नल को सुरक्षित निकाल लिया।
नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच जब तनाव चरम पर था, तब एक ऐसी घटना हुई जो किसी हॉलीवुड फिल्म की कहानी लगती है। ईरान ने अमेरिका का एक F-15 ईगल फाइटर जेट मार गिराया। लेकिन अमेरिकी सेना ने एक बेहद साहसी ऑपरेशन चलाकर अपने पायलट को दुश्मन की जमीन से सुरक्षित निकाल लिया। यह पायलट कोई और नहीं, बल्कि एक सीनियर कर्नल रैंक का अधिकारी था।
विमान क्रैश होने से ठीक पहले पायलट ने खुद को इजेक्ट कर लिया और पैराशूट की मदद से ईरान की धरती पर उतरा। उसके पास सिर्फ एक पिस्टल, थोड़ा-सा खाना, एक लोकेटर बीकन और सिक्योर कम्युनिकेशन के लिए एक डिवाइस थी। अपनी ट्रेनिंग का इस्तेमाल करते हुए पायलट ने सबसे पहले क्रैश साइट से खुद को दूर किया, क्योंकि उसे पता था कि दुश्मन सबसे पहले वहीं पहुंचेगा। इसके बाद वह पास की पहाड़ियों में एक दरार में जाकर छिप गया।
जान बचाने की कोशिश में वह करीब 7000 फीट ऊंचे पहाड़ पर चढ़ गया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस ऊंचाई पर छिपना तो आसान था, लेकिन इसने रेस्क्यू ऑपरेशन को बेहद मुश्किल बना दिया। यह मुश्किल इलाका उसके लिए एक ही वक्त में ढाल भी था और चुनौती भी। जब पायलट अपनी जान बचाने के लिए संघर्ष कर रहा था, तब ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) समेत कई सुरक्षा बल उसकी बड़े पैमाने पर तलाश कर रहे थे। अधिकारियों ने आम लोगों से भी पायलट को खोजने में मदद करने को कहा।
खतरे को भांपते हुए अमेरिकी पायलट ने अपने लोकेटर बीकन का इस्तेमाल बहुत कम किया, क्योंकि इसके सिग्नल को दुश्मन ट्रैक कर सकता था। इसकी जगह उसने अमेरिकी सेना से संपर्क करने के लिए एन्क्रिप्टेड कम्युनिकेशन सिस्टम का सहारा लिया। इससे अमेरिकी सेना उसकी लोकेशन को बिना किसी को बताए ट्रैक कर पा रही थी। यह घटना बताती है कि सेना की SERE (सर्वाइवल, इवेजन, रेजिस्टेंस एंड एस्केप) ट्रेनिंग कितनी असरदार होती है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, जब पायलट छिपा हुआ था, तब अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने ईरानी सेना को गुमराह करने के लिए एक प्लान बनाया। उन्होंने अफवाह फैलाई कि लापता पायलट मिल गया है और उसे किसी दूसरी जगह शिफ्ट कर दिया गया है। यह ट्रिक काम कर गई। ईरानी सेना का ध्यान असली जगह से भटक गया, जिससे अमेरिकी सेना को रेस्क्यू मिशन की प्लानिंग के लिए कीमती वक्त मिल गया। इस बीच, अमेरिकी विमानों ने पायलट के ठिकाने के पास आ रहे एक ईरानी काफिले पर हमला भी किया।
पायलट की सटीक लोकेशन मिलते ही एक बड़ा रेस्क्यू मिशन शुरू किया गया। इसमें स्पेशल कमांडो और लड़ाकू विमानों की एक बड़ी टीम शामिल थी। रिपोर्ट्स बताती हैं कि इस मिशन में नेवी सील टीम सिक्स जैसी एलीट यूनिट भी शामिल थी। तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे अमेरिकी इतिहास के सबसे साहसी बचाव अभियानों में से एक बताया।
मिशन के दौरान अमेरिकी सेना को ईरानी सैनिकों को पीछे हटाने के लिए हमला करना पड़ा। ईरानी मीडिया ने भी इस ऑपरेशन में अपने सैनिकों के मारे जाने की खबर दी थी। आखिरकार, पायलट को सुरक्षित ईरान से बाहर निकाल लिया गया। अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि इजेक्ट करते वक्त और भागने की कोशिश में पायलट को चोटें आई थीं, लेकिन अब वह ठीक हो रहा है। यह घटना आधुनिक युद्ध के कई पहलुओं को दिखाती है - एक सैनिक का मुश्किल हालात में बचना, खुफिया एजेंसियों की चालाकी और एक बड़ी सैन्य ताकत का इस्तेमाल कर चलाया गया रेस्क्यू ऑपरेशन।


