IIT Bombay student death : IIT बॉम्बे में 19 सितंबर को 20 साल के बीटेक छात्र साहिल वाकोडे ने जान दे दी। इस घटना के बाद देश में हड़कंप मचा है कि टॉप संस्थान में भी ऐसी घटनाएं भी होती हैं। लेकिन IIT कैंपस के जो रिपोर्ट सामने आई है, उसने हर किसी को चौंका दिया है कि सबसे बड़े इंजीनियरिंग संस्थानों में छात्रों पर कितना दबाव है।
नई दिल्ली : विशु अधाना की रिपोर्ट। देश के सबसे प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग संस्थान, यानी इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (IIT) से एक डराने वाली रिपोर्ट सामने आई है। एक IIT एलुमनाई ग्रुप के मुताबिक, पिछले दो दशकों में 171 IIT छात्रों ने सुसाइड या अप्राकृतिक कारणों से अपनी जान गंवाई है। चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से करीब 70 प्रतिशत मौतें सिर्फ पिछले 10 सालों में दर्ज की गई हैं।
जानिए कब कितने IIT छात्र ने किए सुसाइड
- यह डेटा साल 2006 से लेकर सितंबर 2026 तक का है। आंकड़ों के मुताबिक, 2006 से 2015 के बीच 51 छात्रों ने सुसाइड किया, जबकि 2016 से सितंबर 2026 के बीच यह आंकड़ा बढ़कर 120 हो गया। इस तरह करीब 20 साल के पीरियड में कुल 171 मौतें दर्ज की गईं।
- ग्लोबल IIT एलुमनाई सपोर्ट ग्रुप के फाउंडर और IIT कानपुर के पूर्व छात्र धीरज सिंह ने यह डेटा तैयार किया है। धीरज का कहना है कि सुसाइड के मामलों में इतनी बड़ी बढ़ोतरी की वजह सिर्फ छात्रों की बढ़ती संख्या नहीं हो सकती।
सबसे ज्यादा मौतें इस एक समय हुईं
- रिपोर्ट के मुताबिक, 82 प्रतिशत सुसाइड के मामले IIT कैंपस के अंदर ही हुए हैं। सबसे ज्यादा मौतें परीक्षा और रिजल्ट के समय हुईं, जबकि सेमेस्टर ब्रेक के दौरान इन मामलों में कमी देखी गई।
- धीरज सिंह ने कहा, "सबूत बताते हैं कि IIT में छात्रों का सुसाइड करना कोई मामूली या छिटपुट घटना नहीं है, बल्कि यह एक गंभीर और लगातार बिगड़ता पब्लिक हेल्थ क्राइसिस है। इन घटनाओं का एक पैटर्न है, जिनका पहले से अंदाजा लगाया जा सकता है और इन्हें रोका भी जा सकता है।"
दो महीनों में IIT में दो छात्रों की मौत
- यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब पिछले दो महीनों में IIT में दो छात्रों की मौत के बाद जमकर विरोध प्रदर्शन हुए हैं। इन घटनाओं ने संस्थानों की जांच और छात्रों की भलाई के लिए बने सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
- IIT दिल्ली में 22 अगस्त को 31 साल के एमएससी फिजिक्स के छात्र ऋषिकेश कुमार की मौत हो गई थी। इसके बाद छात्रों ने निष्पक्ष जांच और जवाबदेही की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। दबाव बढ़ने पर संस्थान ने मौत के कारणों की जांच के लिए एक बाहरी जांच कमेटी बना दी।
IIT बॉम्बे की घटना से पूरे देश में हड़कंप
वहीं, IIT बॉम्बे में 19 सितंबर को 20 साल के बीटेक छात्र साहिल वाकोडे ने जान दे दी। यह घटना मिड-सेमेस्टर परीक्षा के दौरान हुई, जहां कथित तौर पर साहिल को मोबाइल फोन और AI प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करते हुए पकड़ा गया था। इस घटना के बाद कैंपस में भारी विरोध हुआ। बाद में IIT बॉम्बे ने अपने शुरुआती बयान के लिए माफी मांगी और कहा कि जांच पूरी होने तक ऐसे बयान देना गलत था।
जानिए कौन से ग्रुप के स्टूडेंट्स ने किया सुसाइड
- धीरज सिंह की रिपोर्ट यह भी बताती है कि बीटेक करने वाले लड़के और पीएचडी करने वाली लड़कियां सबसे ज्यादा खतरे में हैं। पिछले 20 सालों में हुए कुल सुसाइड में से करीब 60 प्रतिशत मामले इन्हीं दोनों ग्रुप से जुड़े हैं।
- यह डेटा सामाजिक वर्गों के बीच के अंतर को भी उजागर करता है। रिपोर्ट के मुताबिक, जनरल कैटेगरी के छात्रों की तुलना में एससी (SC) और एसटी (ST) छात्रों की मौत की दर लगभग दोगुनी रही। साथ ही, जनरल और ओबीसी (OBC) छात्रों के मुकाबले एससी-एसटी छात्रों ने कम उम्र में ही अपनी जान दे दी।
- रिपोर्ट का दावा है कि कोविड के बाद वाले समय में, जनरल कैटेगरी के छात्रों की तुलना में एससी छात्रों की सुसाइड दर 2.6 गुना और एसटी छात्रों की दर 4.2 गुना ज्यादा रही।


