India Australia Uranium Deal: ऑस्ट्रेलिया से भारत को यूरेनियम सप्लाई का रास्ता खुलने के बाद यह समझौता चर्चा में है। जानिए भारत को यूरेनियम की जरूरत क्यों है, इसका इस्तेमाल कहां होगा, ऑस्ट्रेलिया के पास कितना भंडार है और इससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा व परमाणु बिजली उत्पादन को क्या फायदा मिलेगा।
भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच यूरेनियम आपूर्ति को लेकर हुई सहमति सिर्फ दो देशों के बीच व्यापारिक समझौता नहीं है, बल्कि यह भारत की ऊर्जा सुरक्षा और भविष्य की बिजली जरूरतों से भी जुड़ा अहम कदम माना जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज की बातचीत के बाद दोनों देशों ने आर्थिक और रणनीतिक सहयोग को और मजबूत करने पर जोर दिया। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर भारत को यूरेनियम की जरूरत क्यों है और इससे आम लोगों को क्या फायदा होगा?
यूरेनियम क्या है और इसका इस्तेमाल कहां होता है?
यूरेनियम एक प्राकृतिक रेडियोधर्मी धातु है, जिसका सबसे बड़ा उपयोग परमाणु बिजलीघरों में ईंधन के रूप में किया जाता है। परमाणु रिएक्टर में इससे बड़ी मात्रा में बिजली पैदा होती है। इसके अलावा चिकित्सा, वैज्ञानिक अनुसंधान और कुछ औद्योगिक क्षेत्रों में भी इसका उपयोग होता है। भारत को ऑस्ट्रेलिया से मिलने वाला यूरेनियम केवल असैनिक और शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रमों में इस्तेमाल किया जाएगा।
भारत को यूरेनियम की जरूरत क्यों पड़ रही है?
भारत की बिजली मांग लगातार बढ़ रही है। हालांकि देश में झारखंड, राजस्थान, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक और मेघालय जैसे राज्यों में यूरेनियम के भंडार मौजूद हैं, लेकिन घरेलू उत्पादन जरूरत के मुकाबले कम है। यही वजह है कि भारत पहले से कजाखस्तान, कनाडा और नामीबिया जैसे देशों से यूरेनियम आयात करता है। अब ऑस्ट्रेलिया भी इस सूची में शामिल हो गया है, जिससे भविष्य में ईंधन की स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
ऑस्ट्रेलिया क्यों है भारत के लिए अहम साझेदार?
ऑस्ट्रेलिया दुनिया के सबसे बड़े यूरेनियम संसाधनों वाले देशों में शामिल है। वैश्विक स्तर पर उपलब्ध आर्थिक रूप से निकाले जा सकने वाले यूरेनियम का लगभग 28 से 30 प्रतिशत हिस्सा वहीं मौजूद है। ऑलंपिक डैम, रेंजर और फोर माइल जैसी खदानें दुनिया की प्रमुख यूरेनियम परियोजनाओं में गिनी जाती हैं। ऐसे में भारत के लिए ऑस्ट्रेलिया एक भरोसेमंद और दीर्घकालिक आपूर्तिकर्ता बन सकता है।
इस समझौते से भारत को क्या मिलेगा?
ऑस्ट्रेलिया से यूरेनियम मिलने पर भारत अपने परमाणु बिजलीघरों को नियमित ईंधन उपलब्ध करा सकेगा। इससे स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने, कोयले पर निर्भरता कम करने और ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने में मदद मिलेगी। साथ ही भविष्य में बनने वाले नए परमाणु संयंत्रों के संचालन के लिए भी ईंधन की उपलब्धता आसान होगी।
क्या आम लोगों को भी होगा फायदा?
यदि परमाणु ऊर्जा उत्पादन बढ़ता है तो देश में बिजली आपूर्ति अधिक स्थिर हो सकती है। उद्योगों को बेहतर ऊर्जा मिलेगी, जिससे आर्थिक गतिविधियों को गति मिल सकती है। साथ ही परमाणु ऊर्जा से कार्बन उत्सर्जन अपेक्षाकृत कम होता है, इसलिए यह स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम माना जाता है। हालांकि बिजली की कीमत और वितरण व्यवस्था कई अन्य कारकों पर भी निर्भर करती है, लेकिन यह समझौता भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा रणनीति को मजबूत करने वाला अहम कदम माना जा रहा है।


