आंध्र प्रदेश में भारत के पहले 5वीं पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर AMCA के निर्माण केंद्र की नींव रखी गई। साथ ही नौसेना सिस्टम, गोला-बारूद व ड्रोन बनाने की कई परियोजनाओं का भी शिलान्यास हुआ। इन प्रोजेक्ट्स का लक्ष्य रक्षा में आत्मनिर्भरता बढ़ाना है।
नई दिल्ली: भारत ने गुरुवार को एक बड़ी कामयाबी की तरफ कदम बढ़ाया है। आंध्र प्रदेश के पुट्टपर्थी में एक ऐसे सेंटर की नींव रखी गई है, जहां देश के पहले पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर एयरक्राफ्ट (लड़ाकू विमान) को तैयार किया जाएगा। इस विमान का नाम एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) है। इस मौके पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू मौजूद थे। उन्होंने मिलकर फाइटर जेट, नौसेना सिस्टम, गोला-बारूद और ड्रोन बनाने से जुड़े कई बड़े प्रोजेक्ट्स का शिलान्यास किया।

AMCA प्रोग्राम क्या है?
पुट्टपर्थी में बन रहे इस सेंटर को बनाने में करीब 2,000 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। यह पूरा प्रोग्राम करीब 15,000 करोड़ रुपये का है। इस सेंटर को DRDO से जुड़ी संस्था एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (ADA) चलाएगी। AMCA एक ट्विन-इंजन, मल्टीरोल यानी कई तरह की भूमिका निभाने वाला लड़ाकू विमान होगा। इसकी सीधी टक्कर अमेरिका के F-35, रूस के Su-57 और चीन के J-20 जैसे विमानों से होगी। फिलहाल भारत के पास कोई भी पांचवीं पीढ़ी का विमान नहीं है। देश में बना सबसे काबिल जेट 'तेजस' है, जो चौथी पीढ़ी का प्लेटफॉर्म है और 2016 में सेना में शामिल हुआ था। कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी ने मार्च 2024 में AMCA प्रोग्राम को मंजूरी दी थी। लक्ष्य है कि 2030 के दशक की शुरुआत तक इसे ऑपरेशनल क्लीयरेंस मिल जाए।
नौसेना और समुद्री सिस्टम
एक दूसरे प्रोजेक्ट की नींव अनाकापल्ली जिले के टी. सिरसपल्ली में रखी गई। यहां नौसेना से जुड़े सिस्टम बनाए जाएंगे। सरकारी कंपनी भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL) इस प्लांट को 480 करोड़ रुपये की लागत से बना रही है। यहां ऑटोनॉमस अंडरवाटर व्हीकल (बिना ड्राइवर वाली पनडुब्बियां), अंडरवाटर काउंटरमेजर सिस्टम और अगली पीढ़ी के टॉरपीडो बनेंगे। ये ऐसे सिस्टम हैं जो भारत अब तक बड़े पैमाने पर दूसरे देशों से खरीदता आया है।
गोला-बारूद और एनर्जेटिक्स
मदकसीरा में दो और प्रोजेक्ट्स का उद्घाटन हुआ। भारत फोर्ज की सब्सिडियरी कंपनी, अग्नेयस्त्र एनर्जेटिक्स लिमिटेड, एक डिफेंस एनर्जेटिक्स फैसिलिटी में 1,500 करोड़ रुपये का निवेश करेगी। वहीं, HFCL लिमिटेड गोला-बारूद और इलेक्ट्रिक फ्यूज बनाने के प्लांट में करीब 1,200 करोड़ रुपये का निवेश करेगी। इलेक्ट्रिक फ्यूज तोप के गोलों, बमों और मिसाइलों में लगने वाले बहुत ज़रूरी पुर्जे होते हैं, जिनके लिए भारत अब तक विदेशों पर निर्भर रहा है।
ड्रोन मैन्युफैक्चरिंग
इसके अलावा, आठ ड्रोन कंपनियों के एक समूह ने कुरनूल में एक मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर स्थापित करने के लिए भी एक समझौते पर हस्ताक्षर किए। एक अधिकारी ने बताया, "यह कदम सरकार की उस व्यापक कोशिश का हिस्सा है, जिसके तहत देश में ही ड्रोन इंडस्ट्री को बढ़ावा दिया जा रहा है। हाल के युद्धों में सस्ते ड्रोनों की भूमिका को देखते हुए यह प्राथमिकता और भी बढ़ गई है।"
इसका बड़ा मतलब क्या है?
राजनाथ सिंह ने बताया कि 2014 में देश में रक्षा उत्पादन 46,000 करोड़ रुपये का था, जो आज बढ़कर लगभग 1.54 लाख करोड़ रुपये हो गया है। वहीं, रक्षा निर्यात 600 करोड़ रुपये से बढ़कर लगभग 40,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। भारत ऐतिहासिक रूप से दुनिया के सबसे बड़े हथियार खरीदारों में से एक रहा है। सरकार ने इस निर्भरता को कम करने के लिए कई सुधार किए हैं। जैसे, एक पॉजिटिव इंडिजेनाइजेशन लिस्ट बनाई गई है, जिसके तहत कई चीजों के आयात पर रोक है। साथ ही, रक्षा उत्पादन में FDI की सीमा भी बढ़ाई गई है। इनके अलावा, कई और कंपनियों ने भी राज्य में रक्षा यूनिट लगाने के लिए आंध्र प्रदेश सरकार के साथ एमओयू साइन किए हैं।
