India Pakistan Nuclear Warning: UN में भारत ने पाकिस्तान को परमाणु ब्लैकमेल के खिलाफ चेताया। भारत ने अपनी 3 रेड लाइन्स, ऑपरेशन सिंदूर, सिंधु जल संधि और परमाणु प्रसार पर भी अपना रुख स्पष्ट किया।
India Warns Pak UNGA: संयुक्त राष्ट्र महासभा की पहली समिति में भारत ने पाकिस्तान के गैर-जिम्मेदाराना रवैये और गीदड़भभकियों का करारा जवाब दिया है। जेनेवा में निशस्त्रीकरण सम्मेलन में भारत के वरिष्ठ सलाहकार अनमोल शेर सिंह बेदी ने 'राइट ऑफ रिप्लाई' का इस्तेमाल करते हुए स्पष्ट किया कि परमाणु हथियारों का इस्तेमाल राजनीतिक दबाव या ब्लैकमेल के लिए नहीं किया जा सकता। भारत किसी भी दबाव में नहीं झुकेगा।यहां जानिए UN में भारत द्वारा पाकिस्तान को दी गई चेतावनी के मुख्य बिंदु:
UN में भारत की पाकिस्तान को चेतावनी
- जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग: भारत ने पाकिस्तान की अनावश्यक बयानबाजी को खारिज करते हुए दोहराया कि जम्मू-कश्मीर भारत का अटूट और अविभाज्य हिस्सा था, है और रहेगा।
- परमाणु ब्लैकमेल पर करारा प्रहार: भारत ने कहा कि सब-कन्वेंशनल (पारंपरिक युद्ध से निचले स्तर की) आतंकी गतिविधियों को छिपाने के लिए परमाणु साए का इस्तेमाल करना खतरनाक है। इससे संयम की गुंजाइश खत्म होती है और तनाव बढ़ता है।
India-Pakistan Tension: भारत की तीन रेड लाइन्स
भारत ने आतंकवाद और राष्ट्रीय सुरक्षा पर अपना रुख दोहराते हुए तीन स्पष्ट सिद्धांत बताए।
- पहला: भारत पर किसी भी आतंकी हमले का मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा।
- दूसरा: भारत परमाणु ब्लैकमेल के आगे नहीं झुकेगा।
- तीसरा: आतंकवाद को बढ़ावा देने वालों और उसकी साजिश रचने वालों के बीच कोई फर्क नहीं किया जाएगा।
भारत ने इन कार्रवाइयों को लक्षित और नपी-तुली बताया
- 'ऑपरेशन सिंदूर' का संदर्भ: मई 2025 में की गई सैन्य कार्रवाई का जिक्र करते हुए भारत ने बताया कि 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले (जिसमें 26 निर्दोष नागरिक मारे गए थे) के जवाब में आत्मरक्षा के तहत 7 मई 2025 को 'ऑपरेशन सिंदूर' चलाकर आतंकी ढांचे को तबाह किया गया था।
- सिंधु जल संधि पर सख्त रुख: भारत ने साफ किया कि सिंधु जल संधि आपसी विश्वास और सहयोग पर टिकी है। जब तक सीमा पार आतंकवाद पूरी तरह बंद नहीं होता, तब तक इस संधि के फायदों की उम्मीद नहीं की जा सकती।
- ए.क्यू. खान नेटवर्क और परमाणु प्रसार का मुद्दा: भारत ने पाकिस्तानी वैज्ञानिक अब्दुल कादिर खान के अंतरराष्ट्रीय अवैध परमाणु प्रसार नेटवर्क की याद दिलाते हुए दुनिया को आगाह किया कि ऐसे गैर-जिम्मेदार देशों को सैन्य तकनीक देने से पहले भारी सतर्कता बरतनी चाहिए।


