पिछले तीन सालों में, सरकारी बैंकों ने मिनिमम बैलेंस न रखने वाले ग्राहकों से करीब 8,000 करोड़ रुपये का जुर्माना वसूला है। पंजाब नेशनल बैंक ने सबसे ज़्यादा जुर्माना वसूला है, और SMS सेवाओं के लिए भी बैंकों ने हज़ारों करोड़ का चार्ज लिया है।
नई दिल्ली: आम लोगों तक बैंकिंग सेवाओं को पहुंचाने की कोशिशों के बीच, यह बात सामने आई है कि पिछले तीन सालों में सरकारी बैंकों ने ग्राहकों से भारी जुर्माना वसूला है। देश के 12 बड़े बैंकों ने सेविंग्स अकाउंट में मिनिमम बैलेंस (Minimum Balance) न रखने पर करीब 8,000 करोड़ रुपये वसूले हैं। केंद्र सरकार द्वारा संसद में पेश किए गए आंकड़ों के मुताबिक, मिनिमम बैलेंस का जुर्माना वसूलने में पंजाब नेशनल बैंक (PNB) सबसे आगे है। अकेले इस बैंक ने पिछले तीन सालों में ग्राहकों से जुर्माने के तौर पर 1,500 करोड़ रुपये वसूले हैं। यह सरकारी बैंकों में सबसे ज़्यादा वसूली है।
दूसरे बड़े बैंकों के आंकड़े
PNB के बाद, लिस्ट में दूसरे बड़े बैंक भी शामिल हैं। बैंक ऑफ बड़ौदा ने 1,272 करोड़ रुपये वसूले, जबकि इंडियन बैंक ने जुर्माने के तौर पर 1,166 करोड़ रुपये लिए हैं। कर्नाटक के केनरा बैंक ने 1,027 करोड़ रुपये और देश के सबसे बड़े बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने ग्राहकों से 932 करोड़ रुपये का शुल्क वसूला है।
SMS सर्विस पर भी वसूली: 3,388 करोड़ रुपये का चार्ज
सिर्फ मिनिमम बैलेंस ही नहीं, बल्कि बैंकों की SMS अलर्ट सुविधा के लिए भी ग्राहकों ने भारी कीमत चुकाई है। सरकार ने जानकारी दी है कि SBI को छोड़कर बाकी सभी सरकारी बैंकों ने मिलकर पिछले तीन सालों में SMS सुविधा के लिए ग्राहकों से 3,388 करोड़ रुपये वसूले हैं।
