राजस्थान के बाड़मेर जिले में भारत-पाकिस्तान बॉर्डर के पास स्थित लीलमा और जस जैसिंदर रेलवे स्टेशन अपनी अनोखी व्यवस्था के कारण चर्चा में हैं। यहां लंबे समय तक न प्लेटफॉर्म था, न स्टेशन बिल्डिंग और न ही टिकट काउंटर। टिकट बेचने का काम ठेके पर होता है, जहां कर्मचारी ट्रेन आने से कुछ मिनट पहले बैग में टिकट लेकर पहुंचता है और टिकट बेचकर चला जाता है।
भारतीय रेलवे तरक्की के नए नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। फिर चाहे बात वर्ल्ड क्लास इन्फ्रास्ट्रक्चर की हो या फिर डिजिटल सर्विसेज की। हर दिन इंडियन रेलवे में बदलाव आ रहा है। साथ ही अब वंदे भारत और बुलेट ट्रेन जैसी गाड़ियों की बात होती है तो हमारा सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है। इसी बीच आज हम आपको एक ऐसे स्टेशन के बारे में बताते हैं, जहां ना तो कोई बिल्डिंग है और ना कोई टिकट काउंटर...यहां टीसी बैग में भरकर टिकट काटता है।

भारत-पाक बॉर्डर के पास अनोखा रेलवे स्टेशन
दरअसल, यह अनोखा रेलवे स्टेशन राजस्थान के बाड़मेर जिले में भारत-पाकिस्तान बॉर्डर पास है। जो लीलमा और जस जैसिंदर रेलवे स्टेशन के नाम से जाना जाता है। यह स्टेशन आजादी से पहले का है। लेकिन यहां अब तक प्लेटफॉर्म नहीं था। अब पहली बार यहां पर 600-600 मीटर लंबे प्लेटफॉर्म बन रहे हैं। इतना ही नहीं लीलमा में तो इमारत क्या टिकट खिड़की तक नहीं है। यहां पर ठेके पर काम होता है, यानि टिकट बेंचने का काम निजी हाथों में है। ठेकाकर्मी एक बैग मे ट्रेन आने से करीब 15 से 20 मिनट पहले आता है और टिकट बेंचकर चला जाता है।
सिर्फ पटरियां और बैग वाला टिकट सिस्टम!
बता दें कि पहले यहां स्टेशन के नाम पर सिर्फ पटरियां थीं। जहां बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक को सीढ़ियों से सीधे ट्रेन में चढ़ना-उतरना पड़ता था। जिससे हादसे होने की आंशका बनी रहती थी। लेकिन अब यहां के लोगों के लिए खुशखबरी है की भरतीय रेलवे विकास करने जा रहा है। जिसके लिए बिजली का काम पूरा हो चुका है। जल्द ही सारी व्यवस्थाएं हो जाएंगी।


