Ganesh Chaturthi celebration: अंटार्कटिका के मैत्री रिसर्च स्टेशन पर भारतीय वैज्ञानिकों ने बर्फ से भगवान गणेश की मूर्ति बनाकर गणेश चतुर्थी मनाई। घर से हजारों किलोमीटर दूर इस टीम ने पूरे विधि-विधान से पूजा, आरती की और मोदक भी बनाए।

Indian scientists in Antarctica: गणेश चतुर्थी का उत्साह सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है। इस साल देश से करीब 15 हजार किलोमीटर दूर अंटार्कटिका के मैत्री रिसर्च स्टेशन पर तैनात भारतीय वैज्ञानिकों ने भी बेहद खास अंदाज में बप्पा का स्वागत किया। यहां वैज्ञानिकों ने बर्फ से भगवान गणेश की मूर्ति बनाई और पूरे पारंपरिक उत्साह के साथ पूजा-अर्चना की।

बर्फ को तराशकर बनाए ‘Snow Bappa’

नेशनल सेंटर फॉर पोलर एंड ओशन रिसर्च (NCPOR) से जुड़े डॉक्टर अनिरुद्ध धर ने इस खास गणेशोत्सव का वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया। वीडियो में मैत्री स्टेशन पर मौजूद वैज्ञानिक बर्फ को तराशकर भगवान गणेश की प्रतिमा तैयार करते दिखाई दे रहे हैं।

बर्फ से बनी इस प्रतिमा को फूलों और माला से सजाया गया। इसके बाद वैज्ञानिकों ने एक साथ मिलकर पूजा और आरती की। बर्फीले और बेहद कठिन वातावरण के बीच गणपति बप्पा के जयकारों ने वहां का माहौल पूरी तरह उत्सवमय कर दिया।

15 हजार किलोमीटर दूर गूंजा ‘गणपति बप्पा मोरया’

अंटार्कटिका में रहने वाले वैज्ञानिकों के लिए घर और परिवार से हजारों किलोमीटर दूर त्योहार मनाना आसान नहीं होता। इसके बावजूद टीम ने गणेश चतुर्थी की परंपराओं को बनाए रखा। पूजा के दौरान वैज्ञानिकों ने ‘गणपति बप्पा मोरया’ के जयकारे लगाए। इस खास जश्न में हाथ से बनाए गए मोदक भी शामिल रहे। बर्फीले महाद्वीप पर भारतीय त्योहार का यह रंग सोशल मीडिया यूजर्स को खूब पसंद आया।

नदी नहीं, बाल्टी में हुआ बप्पा का विसर्जन

इस गणेशोत्सव का सबसे दिलचस्प हिस्सा विसर्जन रहा। आमतौर पर गणेश प्रतिमा का विसर्जन नदी, तालाब या समुद्र में किया जाता है, लेकिन अंटार्कटिका में वैज्ञानिकों ने इसके लिए एक अलग तरीका अपनाया।

उन्होंने बर्फ से बनी गणेश प्रतिमा को रिसर्च स्टेशन के अंदर पानी से भरी बाल्टी में रखा। पानी के संपर्क में आने के बाद बर्फ धीरे-धीरे पिघलती गई और प्रतिमा पानी में बदल गई। इस तरह बिना किसी बाहरी जलस्रोत को प्रभावित किए विसर्जन पूरा किया गया।

वैज्ञानिक ने बताया ‘Eco-Friendly Visarjan’

डॉक्टर अनिरुद्ध धर ने वीडियो शेयर करते हुए इसे ‘इको-फ्रेंडली विसर्जन’ बताया। उन्होंने बर्फ से बनी गणेश प्रतिमा को बेहद टिकाऊ और पर्यावरण के अनुकूल बताया।

धर ने कमेंट में अपने अनुभव का एक दिलचस्प किस्सा भी साझा किया। उन्होंने बताया कि मुंबई के परेल इलाके में लालबाग के राजा के साथ तीन साल बिताने के बावजूद अपने पहले विसर्जन में शामिल होने के लिए उन्हें करीब 15 हजार किलोमीटर दूर अंटार्कटिका तक आना पड़ा।

सोशल मीडिया पर छाया ‘सबसे कूल बप्पा’

अंटार्कटिका में गणेश चतुर्थी का यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से लोगों का ध्यान खींच रहा है। यूजर्स ने वैज्ञानिकों के इस अनोखे अंदाज की तारीफ की और बर्फ से बनी गणेश प्रतिमा को ‘अब तक के सबसे कूल बप्पा’ जैसे कमेंट दिए।

मैत्री स्टेशन का यह गणेशोत्सव दिखाता है कि भारतीय त्योहार और परंपराएं दुनिया के सबसे दूर और चुनौतीपूर्ण इलाकों में भी लोगों को अपनी संस्कृति से जोड़े रख सकती हैं। बर्फ से बने बप्पा, मोदक और अनोखे विसर्जन ने अंटार्कटिका में गणेश चतुर्थी को यादगार बना दिया।