स्वीडन में एक भारतीय IT प्रोफेशनल ने वीडियो में वहां का वर्क कल्चर दिखाया। शाम 4:30 बजे ऑफिस खाली हो जाता है, जो बेहतर वर्क-लाइफ बैलेंस को दर्शाता है। वहां काम की गुणवत्ता को महत्व दिया जाता है, न कि काम के घंटों को।
भारत में ऑफिस की लंबी शिफ्ट और छुट्टियों की कमी पर अक्सर सोशल मीडिया पर बहस होती है। लेकिन यूरोप का वर्क कल्चर इससे बिल्कुल अलग है। स्वीडन में काम करने वाली स्वाति नाम की एक भारतीय आईटी प्रोफेशनल ने एक वीडियो शेयर किया है, जो दिखाता है कि वहां काम करने का तरीका कितना अलग है। स्वाति ने शाम 4:30 बजे अपने खाली ऑफिस का वीडियो सोशल मीडिया पर डाला है।
वीडियो में स्वाति ऑफिस के हर कैबिन से गुजरती हुई दिख रही हैं, लेकिन वहां एक भी इंसान मौजूद नहीं है। वीडियो में स्वाति कहती हैं, 'अभी सिर्फ शाम के 4:30 बजे हैं और देखिए, मेरा ऑफिस पूरी तरह से खाली है। यूरोप में वर्क-लाइफ बैलेंस को बहुत अहमियत दी जाती है'।
स्वाति बताती हैं कि यहां की कंपनियां इस बात पर ध्यान नहीं देतीं कि आप ऑफिस में कितने घंटे बैठते हैं, बल्कि इस पर कि आप काम कैसा करते हैं। यहां ओवर टाइम का कोई कल्चर नहीं है। शाम 5 बजे के बाद ऑफिस में रुकने की जरूरत नहीं पड़ती और न ही वीकेंड पर काम करना पड़ता है। लोग अपना काम खत्म करके सही समय पर घर लौट जाते हैं। इससे उन्हें अपने परिवार, दोस्तों के साथ वक्त बिताने और अपनी पसंद के काम करने का मौका मिलता है।
स्वाति का वीडियो वायरल होने के बाद कई लोगों ने इस पर कमेंट्स किए। एक यूजर ने लिखा, 'भारत में तो इसका ठीक उल्टा होता है।' वहीं कुछ लोगों ने कमेंट किया, 'काश हर जगह काम करने का ऐसा माहौल होता।' कई लोगों ने यह भी कहा कि स्वीडन के 'फ्लेक्सिबल वर्किंग आवर्स' कर्मचारियों की मेंटल हेल्थ के लिए बहुत फायदेमंद हैं।


