Sonam Raghuvanshi Bail Cancelled : इंदौर के राजा रघुवंशी मर्डर केस में सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने हत्याकांड की मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी की जमानत रद्द कर दी है। कोर्ट ने साफ तौर पर कहा कि आरोपी को जेल जाना ही होगा।
नई दिल्ली/इंदौर. राज रघुवंशी मर्डर केस मामले पर गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। जिसमें मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी को मिली ज़मानत रद्द कर दी गई। बता दें कि सोनम पर मेघालय में हनीमून के दौरान अपने पति राजा रघुवंशी की हत्या का आरोप है। अदालत ने साफ तौर पर कहा कि इस स्टेज पर सोनम का ज़मानत पर बाहर रहना चल रहे ट्रायल में रुकावट डाल सकता है। इसलिए उसे जेल जाना होगा।
सोनम फिर से जमानत के लिए दे सकती है अर्जी
दरअसल, मामले की सुनावई जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस पीबी वराले की बेंच की। जहां सुप्रीम कोर्ट ने सोनम के पक्ष में दिए गए ज़मानत के आदेशों को रद्द कर दिया और उसे दो हफ़्ते के अंदर सरेंडर करने का निर्देश दिया है। हालांकि, कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर छह महीने के अंदर ट्रायल पूरा नहीं होता है, तो वह ट्रायल कोर्ट के सामने फिर से ज़मानत के लिए अर्ज़ी दे सकती है।
सुप्रीम कोर्ट ने क्यों सोनम की जमानत की रद्द
कोर्ट ने कहा, "हमारा मानना है कि इस स्टेज पर प्रतिवादी (सोनम) का ज़मानत पर बाहर रहना चल रहे ट्रायल में बाधा डाल सकता है. ऐसे मामले में, हम ज़मानत के आदेश को रद्द करने के पक्ष में हैं। प्रतिवादी को सरेंडर करने के लिए दो हफ़्ते का समय दिया गया है। अगर छह महीने में ट्रायल पूरा नहीं होता है, तो प्रतिवादी ज़मानत के लिए आवेदन दे सकती है।
मेघालय सरकार की अपील पर हुआ फैसला
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में यह अपील मेघालय सरकार ने दायर की थी। सरकार ने मेघालय की एक अदालत के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें 10 फरवरी, 2026 की एक सप्लीमेंट्री चार्जशीट के बाद एडिशनल चार्ज तय होने पर सोनम को ज़मानत दे दी गई थी।
राजा रघुवंशी मर्डर केस की पूरी टाइमलाइन
अभियोजन पक्ष के मुताबिक, सोनम शादी के बाद अपने पति राजा रघुवंशी के साथ हनीमून के लिए मेघालय गई थी। आरोप है कि वहीं पर उसने तीन साथियों की मदद से राजा की हत्या करवा दी। घटना के बाद सोनम कथित तौर पर लापता हो गई, जिसके बाद FIR दर्ज की गई. बाद में 9 जून, 2025 को उसने उत्तर प्रदेश के गाज़ीपुर ज़िले के नंदगंज पुलिस स्टेशन में सरेंडर कर दिया, जिसके बाद उसे गिरफ़्तार कर लिया गया। फिर उसे ट्रांज़िट रिमांड के लिए चीफ़ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा यह खतरनाक क्राइम
सुप्रीम कोर्ट में अभियोजन पक्ष ने दलील दी कि सोनम के ख़िलाफ़ आरोप बहुत गंभीर हैं और घटना के बाद उसके गायब होने की कोई वजह सामने नहीं आई है. उन्होंने यह भी बताया कि उसे 9 जून, 2025 को गिरफ़्तारी के आधार और ज़रूरी दस्तावेज़ दे दिए गए थे।गिरफ़्तारी के कारणों में धारा 103(1) की जगह गलती से धारा 403(1) लिखा होना एक टाइपिंग की गलती थी।
सोनम के वकील ने रखी क्या दलील
- इस अपील का विरोध करते हुए, सोनम के वकील ने सुप्रीम कोर्ट के 'मिहिर राजेश शाह बनाम महाराष्ट्र राज्य' मामले के फ़ैसले का हवाला दिया। उनकी दलील थी कि गिरफ़्तारी के कारणों को ठीक से बताना अनुच्छेद 21 के तहत एक संवैधानिक ज़रूरत है, और सोनम को उसकी गिरफ़्तारी के असली कारण नहीं बताए गए थे।
- इस दलील को खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह मामला गिरफ़्तारी के कारण बिल्कुल न बताने का नहीं है, बल्कि बताए गए कारणों के पर्याप्त होने पर सवाल उठाने का है।
- कोर्ट ने टिप्पणी की, "ऐसा नहीं है कि उसे गिरफ़्तारी के आधार नहीं दिए गए. गिरफ़्तारी के आधार न देने और उसके तहत पर्याप्त कारण देने में अंतर होता है. दूसरे मामले में, हुए नुकसान को देखना होता है. दूसरी बात, ऐसी दलील जल्द से जल्द उठाई जानी चाहिए थी।


