योग दिवस के मौके पर पीएम मोदी ने कोलकाता में योग किया। 75 की उम्र में भी वे कई योगासन नियमित करते हैं। जानिए भद्रासन, ताड़ासन, अर्धचक्रासन और वक्रासन के फायदे।

International Yoga day 2026: 21 जून को दुनिया भर में 12वां अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया जा रहा है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोलकाता के प्रसिद्ध रेड रोड पर आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लिया और हजारों लोगों के साथ योगाभ्यास किया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि योग आज दुनिया का सबसे बड़ा सामुदायिक उत्सव बन चुका है। यह अलग-अलग देशों, संस्कृतियों और लोगों को जोड़ने का एक सशक्त माध्यम है।

Add Asianetnews Hindi as a Preferred SourcegooglePreferred

योग दिवस के दौरान पीएम मोदी ने ताड़ासन, अर्धचक्रासन, भद्रासन और त्रिकोणासन सहित कई योगासन किए। प्रधानमंत्री लंबे समय से योग को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बताते रहे हैं। आइए जानते हैं उन 6 योगासनों के बारे में, जिन्हें पीएम मोदी नियमित रूप से करते हैं और जो स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद माने जाते हैं।

भद्रासन के फायदे: शरीर और मन को देता है स्थिरता

भद्रासन को ध्यान और मानसिक शांति के लिए महत्वपूर्ण योगासन माना जाता है। इसे 'ग्रेसफुल पोज' भी कहा जाता है। इस आसन के नियमित अभ्यास से शरीर मजबूत होता है और मन शांत रहता है। यह कूल्हों, जांघों और घुटनों की मांसपेशियों में खिंचाव पैदा करता है, जिससे जोड़ों का लचीलापन बढ़ता है। सही मुद्रा में बैठने से रीढ़ की हड्डी को मजबूती मिलती है। साथ ही यह ध्यान लगाने में मदद करता है और तनाव व चिंता को कम करने में सहायक होता है।

ताड़ासन के लाभ: शरीर को देता है संतुलन और ऊर्जा

ताड़ासन एक सरल लेकिन बेहद प्रभावी योगासन है। यह रीढ़ से जुड़ी तंत्रिकाओं को सक्रिय करने में मदद करता है। इसके अभ्यास से जांघें, घुटने और एड़ियां मजबूत होती हैं। ताड़ासन का नियमित अभ्यास शारीरिक और मानसिक संतुलन बनाए रखने में मदद करता है। इसके दौरान पूरे शरीर की अच्छी स्ट्रेचिंग होती है, जिससे शरीर में हल्कापन और नई ऊर्जा का अनुभव होता है।

त्रिकोणासन के फायदे: कमर और रीढ़ को बनाता है मजबूत

त्रिकोणासन शरीर की कई महत्वपूर्ण मांसपेशियों को मजबूत बनाने में मदद करता है। यह कमर, जांघों, कंधों और रीढ़ की हड्डी पर सकारात्मक प्रभाव डालता है। यह आसन मानसिक तनाव कम करने में भी सहायक माना जाता है। इसके अभ्यास से पाचन अंगों को हल्की मालिश मिलती है, जिससे पाचन क्षमता बेहतर हो सकती है। साथ ही शरीर का संतुलन और एकाग्रता बढ़ाने में भी यह उपयोगी है। हालांकि, स्लिप डिस्क या साइटिका की समस्या वाले लोगों को विशेषज्ञ की सलाह के बिना यह आसन नहीं करना चाहिए।

अर्धचक्रासन के लाभ: रीढ़ की लचक बढ़ाने में मददगार

अर्धचक्रासन में शरीर आधे पहिए जैसी आकृति बनाता है। यह योगासन रीढ़ की हड्डी को अधिक लचीला बनाने में मदद करता है और पीठ व गर्दन की मांसपेशियों को मजबूत करता है। इसके नियमित अभ्यास से शरीर की मुद्रा में सुधार हो सकता है। साथ ही यह फेफड़ों की कार्यक्षमता और श्वसन क्षमता को बेहतर बनाने में भी लाभकारी माना जाता है।

उष्ट्रासन के फायदे: सीने और फेफड़ों के लिए लाभकारी

उष्ट्रासन एक लोकप्रिय बैक-बेंड योगासन है। यह पीठ और गर्दन की मांसपेशियों को मजबूत बनाने में मदद करता है। माना जाता है कि इसके अभ्यास से सिर और सीने में रक्त संचार बेहतर होता है। यह आसन सीने को खोलता है, जिससे फेफड़ों की क्षमता बढ़ सकती है और सांस लेने की प्रक्रिया अधिक प्रभावी हो सकती है। नियमित अभ्यास से शरीर में लचीलापन भी बढ़ता है।

वक्रासन के लाभ: रीढ़ और पाचन तंत्र को पहुंचाता है फायदा

वक्रासन रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाए रखने में मदद करता है। यह शरीर के अंदरूनी अंगों को सक्रिय करने वाला महत्वपूर्ण योगासन माना जाता है। यह अग्नाशय को उत्तेजित कर रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित रखने में सहायक माना जाता है। इसके अलावा वक्रासन लिवर के लिए भी लाभकारी बताया जाता है। यह पीठ और कंधों में जकड़न कम करके शरीर में ऊर्जा का संचार करने में मदद करता है।

योग को जीवनशैली का हिस्सा बनाने की सलाह

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार योग को स्वस्थ जीवन का आधार बताते रहे हैं। उनका कहना है कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि शरीर, मन और आत्मा के बीच संतुलन स्थापित करने का माध्यम है। नियमित योगाभ्यास से फिटनेस, मानसिक शांति और बेहतर स्वास्थ्य प्राप्त किया जा सकता है।