Kamal Kharazi Attack: ईरान के पूर्व विदेश मंत्री और वरिष्ठ कूटनीतिज्ञ कमाल खराजी पर तेहरान में कथित अमेरिका-इजराइल स्ट्राइक की खबर सामने आई है। शांति वार्ता के बीच हुए इस हमले से मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ सकता है। जानिए कौन हैं कमाल खराजी और क्यों बना यह हमला बड़ी खबर।
Kamal Kharazi: मध्य पूर्व में चल रहे तनाव के बीच एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने कूटनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। ईरान के वरिष्ठ नेता और पूर्व विदेश मंत्री कमाल खराजी पर कथित रूप से अमेरिका और इजराइल की संयुक्त स्ट्राइक की खबर सामने आई है। बताया जा रहा है कि जिस नेता के जरिए पाकिस्तान ईरान के साथ शांति समझौते की बातचीत कर रहा था, वही अब हमले में गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। यह घटना ऐसे समय में हुई है जब अमेरिका, ईरान और उसके सहयोगियों के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है और युद्ध की आशंका को लेकर दुनिया भर में चिंता बढ़ रही है।
तेहरान में घर पर हुआ हमला
ईरानी समाचार पत्र मिहान के मुताबिक बुधवार (1 अप्रैल) को तेहरान के अजौरानियेह इलाके में कमाल खराजी के घर को निशाना बनाया गया। रिपोर्ट के अनुसार इस हमले में खराजी गंभीर रूप से घायल हो गए और उन्हें तुरंत एक अस्पताल में भर्ती कराया गया। हालांकि अभी तक अमेरिका या इजराइल की ओर से इस हमले को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। लेकिन ईरान में इसे लेकर काफी गुस्सा देखा जा रहा है।
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कौन हैं कमाल खराजी?
81 साल के कमाल खराजी ईरान के सबसे अनुभवी और प्रभावशाली कूटनीतिज्ञों में गिने जाते हैं।
- 1997 से 2005 तक ईरान के विदेश मंत्री रहे
- विदेश मंत्री पद छोड़ने के बाद सुप्रीम लीडर कार्यालय से जुड़े
- ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के करीबी माने जाते हैं
- वर्तमान में मोज्तबा खामेनेई के विदेश सलाहकार की भूमिका में सक्रिय
खराजी की पढ़ाई भी अमेरिका में हुई थी। उन्होंने 1975 में ह्यूस्टन यूनिवर्सिटी से पीएचडी की डिग्री हासिल की थी। कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय राजनीति में उनका अनुभव बेहद लंबा माना जाता है।
पाकिस्तान क्यों कर रहा था उनसे संपर्क?
मौजूदा हालात में ईरान और अमेरिका के बीच शांति की कोशिशें चल रही थीं। इस बातचीत में पाकिस्तान एक तरह से संदेशवाहक की भूमिका निभा रहा था। सूत्रों के अनुसार पाकिस्तान की तरफ से भेजे जा रहे अधिकतर संदेश कमाल खराजी के जरिए ही ईरान तक पहुंचाए जा रहे थे। इसलिए उन्हें इस पूरी कूटनीतिक प्रक्रिया का अहम चेहरा माना जा रहा था।
खराजी पर हमला क्यों?
सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि आखिर शांति वार्ता के बीच खराजी को क्यों निशाना बनाया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि वह ईरान की तरफ से शांति समझौते की कोशिशों में सक्रिय थे। ऐसे में यह हमला उन प्रयासों को कमजोर करने की कोशिश भी हो सकता है। हालांकि इजराइल ने इस हमले पर अभी तक कोई टिप्पणी नहीं की है।
ट्रंप की चेतावनी से बढ़ा तनाव
इसी बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का एक बयान भी काफी चर्चा में है। उन्होंने कहा कि अगर युद्ध जारी रहा तो अमेरिका ईरान पर भारी बमबारी कर सकता है। ट्रंप ने कहा कि जरूरत पड़ी तो ईरान को “पाषाण काल” में भेज दिया जाएगा। दूसरी ओर ईरान की तरफ से भी सख्त बयान आया है। ईरान के नेतृत्व ने साफ कहा है कि जब तक उनके लक्ष्य पूरे नहीं होते, तब तक संघर्ष जारी रहेगा।
शांति समझौते की कोशिश कहां तक पहुंची?
मौजूदा समय में ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम करने के लिए कई देश मध्यस्थता की कोशिश कर रहे हैं। इस पहल में शामिल देश:
- चीन
- तुर्की
- पाकिस्तान
- मिस्र
- सऊदी अरब
बताया जा रहा है कि अमेरिका की तरफ से बातचीत की जिम्मेदारी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस संभाल रहे हैं। चीन ने इस संकट को खत्म करने के लिए अमेरिका को 5 सूत्री प्रस्ताव भी दिया है। इसमें प्रमुख बातें हैं:
- युद्धविराम लागू करना
- होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलना
- ईरान पर हमले रोकना
- क्षेत्रीय तनाव कम करना
लेकिन कमाल खराजी पर हुए हमले के बाद इन शांति प्रयासों को बड़ा झटका लग सकता है।
क्या बढ़ेगा युद्ध का खतरा?
विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर यह हमला सच में अमेरिका या इजराइल से जुड़ा हुआ पाया जाता है तो इससे मध्य पूर्व में तनाव और ज्यादा बढ़ सकता है। दूसरी तरफ अगर खराजी की हालत गंभीर बनी रहती है तो ईरान के अंदर भी इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक और सैन्य प्रतिक्रिया तेज हो सकती है। फिलहाल दुनिया की नजरें तेहरान और वॉशिंगटन दोनों पर टिकी हुई हैं।
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