ईरान-इजराइल तनाव के चलते कच्चे तेल और गैस की कीमतों में भारी उछाल आया है। इंडियन बास्केट 146 डॉलर तक पहुंच गई है, जिससे भारत में पेट्रोल-डीजल, LPG और रोजमर्रा की चीजों के दाम बढ़ने की आशंका है।

Iran-Israel-US War Global Impact: मिडिल-ईस्ट में ईरान के साथ अमेरिका-इजराइल युद्ध को 20 दिन हो चुके हैं। होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से जहां तेल-गैस की ग्लोबल सप्लाई बाधित हुई है, वहीं क्रूड ऑयल की कीमतें भी आसमान छू रही हैं। हालात बिगड़ने के बाद बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 116 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है। वहीं यूरोप में नैचुरल गैस की कीमतों में लगभग 20% की बढ़ोतरी देखी गई। यह उछाल तब आया जब इजराइल ने ईरान के साउथ पारस गैस फील्ड पर हमला किया और जवाब में ईरान ने कतर के एक बड़े LNG हब को नुकसान पहुंचाया। इसके बाद ईरान ने वैश्विक एनर्जी मार्केट पर गंभीर असर की चेतावनी भी दी।

अमेरिका में भी महंगी हुई गैस

AAA की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका में गैस की कीमत बढ़कर 3.88 डॉलर प्रति गैलन हो गई है। यह संकेत है कि इस तनाव का असर सिर्फ मिडिल ईस्ट ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया पर पड़ रहा है।

19 मार्च को 30% तक उछले कच्चे तेल के दाम

19 मार्च को ईरान द्वारा खाड़ी देशों के एनर्जी ठिकानों पर नए हमलों के बाद ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल और गैस की कीमतों में 30% तक की तेजी दर्ज की गई। जंग शुरू होने से पहले 27 फरवरी को ब्रेंट क्रूड 73 डॉलर से नीचे था, जो अब बढ़कर 116 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया है।

इंडियन बास्केट 146 डॉलर के पार

भारत में कच्चे तेल की कीमतें लगभग दोगुनी होकर 146 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं। भारत अपनी जरूरत का करीब 85% कच्चा तेल और 50% से ज्यादा गैस आयात करता है, इसलिए ग्लोबल मार्केट में हलचल का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।

कितना महंगा हो सकता है पेट्रोल-डीजल?

अगर कच्चे तेल की कीमतें इसी स्तर पर बनी रहती हैं, तो सरकारी तेल कंपनियों के लिए मौजूदा रेट पर पेट्रोल-डीजल बेचना मुश्किल हो जाएगा। आने वाले समय में पेट्रोल-डीजल के दाम 10 से 15 रुपए तक बढ़ सकते हैं। साथ ही गैस की कमी के कारण LPG सिलेंडर की कीमतों में भी बढ़ोतरी हो सकती है। हाल ही में घरेलू LPG सिलेंडर के दाम 60 रुपए बढ़ाए गए थे।

महंगाई की मार: खाने-पीने की चीजें भी होंगी महंगी

कच्चा तेल सिर्फ ईंधन ही नहीं, बल्कि पेंट, प्लास्टिक, खाद (फर्टिलाइजर) और दवाइयों के निर्माण में भी इस्तेमाल होता है। डीजल महंगा होने से ट्रांसपोर्ट की लागत बढ़ेगी, जिससे फल, सब्जी और अनाज के दाम भी बढ़ सकते हैं। इसका सीधा असर आम आदमी के बजट पर पड़ेगा।

कच्चे तेल के तीन प्रमुख बेंचमार्क

दुनिया में कच्चे तेल की कीमतें मुख्य रूप से तीन बेंचमार्क से तय होती हैं:

  • ब्रेंट क्रूड: उत्तरी सागर (यूरोप) से निकलता है और ग्लोबल मार्केट में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होता है।
  • WTI (West Texas Intermediate): अमेरिका का प्रमुख मानक, जो अपनी शुद्धता के लिए जाना जाता है।
  • OPEC बास्केट: OPEC देशों द्वारा उत्पादित तेलों का औसत मिश्रण।

इंडियन बास्केट क्या है?

भारत अलग-अलग देशों जैसे इराक, सऊदी अरब, रूस और UAE से अलग-अलग तरह का कच्चा तेल खरीदता है। इन सभी तेलों की औसत कीमत को 'इंडियन बास्केट' कहा जाता है। यही भारत के लिए तेल की वास्तविक लागत को दर्शाता है।