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E-7A वेजटेल सर्विलांस एयरक्राफ्ट की क्या है खासियत? जिसे ऑस्ट्रेलिया ने UAE सुरक्षा के लिए भेजा
Breaking Defense Move: मिडिल ईस्ट में बढ़ते Iran-Israel War के बीच ऑस्ट्रेलिया ने UAE की सुरक्षा के लिए E-7A वेजटेल जासूसी जेट और एडवांस्ड मिसाइलें भेजने का फैसला किया। क्या यह कदम खाड़ी क्षेत्र में तनाव कम करेगा या युद्ध को और बढ़ाएगा?

Australia Defense Move UAE: मिडिल ईस्ट में बढ़ते ईरान-इज़राइल विवाद (Iran-Israel Conflict) के बीच अब एक और बड़ा देश खुलकर सामने आ गया है। ऑस्ट्रेलिया ने संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की सुरक्षा के लिए जासूसी विमान और एडवांस्ड मिसाइलें भेजने का फैसला किया है। इस कदम को खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव और ईरान के लगातार हमलों के बीच एक बड़ा रणनीतिक कदम माना जा रहा है। ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज़ और रक्षा मंत्री रिचर्ड मार्लेस ने बताया कि यह फैसला क्षेत्र में सुरक्षा बढ़ाने और वहां मौजूद ऑस्ट्रेलियाई नागरिकों की रक्षा के लिए लिया गया है।
क्या है ऑस्ट्रेलिया का वेजटेल जासूसी विमान?
ऑस्ट्रेलिया ने E-7A वेजटेल सर्विलांस एयरक्राफ्ट (E-7A Wedgetail Surveillance Aircraft) तैनात करने की घोषणा की है। यह एक अत्याधुनिक लंबी दूरी का जासूसी और निगरानी विमान है, जो दुश्मन के ड्रोन, मिसाइल और एयरक्राफ्ट की गतिविधियों को काफी दूर से ट्रैक कर सकता है। रक्षा मंत्री रिचर्ड मार्लेस के मुताबिक यह विमान करीब 85 सैन्य कर्मियों के साथ तैनात होगा और इस सप्ताह के अंत तक ऑपरेशनल हो सकता है। शुरुआती योजना के अनुसार इसे चार हफ्तों के लिए खाड़ी क्षेत्र में तैनात किया जाएगा। इस विमान का मुख्य उद्देश्य खाड़ी के हवाई क्षेत्र की निगरानी करना और संभावित हमलों से पहले चेतावनी देना है।
क्या ईरान के हमलों से बढ़ गया है खाड़ी क्षेत्र का खतरा?
ऑस्ट्रेलिया के अधिकारियों के मुताबिक हाल के दिनों में ईरान ने खाड़ी क्षेत्र के कई देशों को निशाना बनाया है। UAE ने दावा किया है कि उसने अब तक 1500 से ज्यादा रॉकेट और ड्रोन हमलों को इंटरसेप्ट कर गिराया है। लगातार बढ़ते इन हमलों से पूरे मिडिल ईस्ट में तनाव और अस्थिरता बढ़ गई है। सरकार का कहना है कि यह हमले आम नागरिकों के लिए बड़ा खतरा बन सकते हैं, इसलिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग जरूरी हो गया है।
The situation in the Middle East continues to deteriorate. @AlboMP announced this morning that Australia will be deploying an E7A and crew to the Gulf, and we will be supplying the UAE with defensive missiles to assist in keeping airspace open and ensure Australians can return… pic.twitter.com/XOLxdc1QOm
— Richard Marles (@RichardMarlesMP) March 9, 2026
क्या UAE को मिलेंगी एडवांस्ड एयर-टू-एयर मिसाइलें?
ऑस्ट्रेलिया ने सिर्फ निगरानी विमान ही नहीं भेजा है, बल्कि UAE को एडवांस्ड मीडियम-रेंज एयर-टू-एयर मिसाइलें देने का भी फैसला किया है। सरकार का कहना है कि ये हथियार पूरी तरह रक्षा के उद्देश्य से दिए जा रहे हैं ताकि किसी भी संभावित मिसाइल या ड्रोन हमले का जवाब दिया जा सके। रिचर्ड मार्लेस ने साफ कहा कि ऑस्ट्रेलिया इस युद्ध में जमीनी सैनिक नहीं भेजेगा और उसकी भूमिका केवल सुरक्षा और निगरानी तक सीमित रहेगी।
क्या इस युद्ध का असर पूरी दुनिया पर पड़ रहा है?
US-Israel और Iran के बीच बढ़ते संघर्ष का असर अब वैश्विक स्तर पर दिखाई देने लगा है। इस तनाव के कारण तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई हैं और कई देशों में ऊर्जा सप्लाई प्रभावित हो रही है। इसके अलावा मिडिल ईस्ट के कई हिस्सों में एयर ट्रांसपोर्ट और फ्लाइट ऑपरेशन भी प्रभावित हुए हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय यात्रा और व्यापार पर असर पड़ा है।
क्या युद्ध जल्द खत्म होने वाला है?
हाल ही में अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि ईरान के खिलाफ चल रहा सैन्य अभियान जल्द खत्म हो सकता है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि यह प्रक्रिया अभी तुरंत खत्म नहीं होगी।दूसरी ओर, ईरान के डिप्टी विदेश मंत्री ने कहा है कि तेहरान तभी संघर्ष खत्म करेगा जब उसे भरोसा होगा कि उस पर दोबारा हमला नहीं किया जाएगा।
मिडिल ईस्ट में कितने ऑस्ट्रेलियाई नागरिक हैं?
ऑस्ट्रेलियाई सरकार के मुताबिक इस समय करीब 1,15,000 ऑस्ट्रेलियाई नागरिक मिडिल ईस्ट में रह रहे हैं, जिनमें से लगभग 24,000 लोग UAE में हैं। यही वजह है कि सरकार क्षेत्र में हवाई सुरक्षा बनाए रखने और जरूरत पड़ने पर अपने नागरिकों को सुरक्षित निकालने के लिए तैयारी कर रही है। ऑस्ट्रेलिया का कहना है कि उसका उद्देश्य युद्ध को बढ़ाना नहीं बल्कि क्षेत्र की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। सरकार ने सभी देशों से अपील की है कि वे अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का पालन करें और आम लोगों की सुरक्षा को प्राथमिकता दें।
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