ईरान-अमेरिका तनाव चरम पर है। अमेरिकी नौसेना ने ईरानी बंदरगाहों की घेराबंदी की है, जिसके जवाब में ईरान ने भी चेतावनी दी है। इस कारण कच्चे तेल की कीमतें $100 पार कर गई हैं और क्षेत्र में युद्ध की आशंका बढ़ गई है।
दुबई: ईरान और अमेरिका के बीच तनाव खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिकी नौसेना ने ईरान के बंदरगाहों की घेराबंदी शुरू कर दी है। अमेरिका के सेंट्रल कमांड ने साफ कहा है कि ईरान के तटों और बंदरगाहों से आने-जाने वाले किसी भी जहाज को रोक दिया जाएगा। डोनाल्ड ट्रंप सरकार ने यह कड़ा कदम पाकिस्तान में हुई शांति वार्ता के फेल हो जाने के बाद उठाया है। इसका मकसद ईरान की अर्थव्यवस्था को पूरी तरह से कमजोर करना है।
अमेरिका की इस कार्रवाई पर ईरान की सेना और रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने भी पलटवार करते हुए गंभीर चेतावनी दी है। ईरान ने ऐलान किया है कि अगर उसके बंदरगाहों को निशाना बनाया गया, तो फारस की खाड़ी और ओमान सागर में कोई भी बंदरगाह सुरक्षित नहीं रहेगा। ईरान का रुख साफ है- 'सुरक्षा या तो सबके लिए होगी, या किसी के लिए नहीं'। इस तनातनी का असर भी दिखने लगा है। होर्मुज जलडमरूमध्य, जहां से रोज करीब 135 जहाज गुजरते थे, वहां अब ट्रैफिक ना के बराबर रह गया है।
राष्ट्रपति ट्रंप ने बताया है कि यह नाकेबंदी आज भारतीय समय के मुताबिक शाम 7:30 बजे से पूरी तरह लागू हो जाएगी। इस खबर के आते ही दुनिया भर के तेल बाजार में हड़कंप मच गया है। कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। बताया जा रहा है कि शांति वार्ता इसलिए टूटी क्योंकि अमेरिका ने ईरान की मांगें ठुकरा दी थीं। ईरान चाहता था कि युद्ध में बर्बाद हुई उसकी अर्थव्यवस्था और संपत्ति के लिए उसे मुआवजा दिया जाए। अब 22 अप्रैल को संघर्ष विराम की मियाद खत्म होने वाली है, ऐसे में पूरी दुनिया को इस इलाके में एक बड़ी जंग छिड़ने का डर सता रहा है।
