Iran war effect on Condom Price: ईरान जंग का असर अब कंडोम की कीमतों पर भी पड़ सकता है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इसे बनाने में जिन चीजों की जरुरत होती है, उनकी कमी से कंडोम बनाने की लागत बढ़ गई है, जिससे भारत में कीमतें 40-50% तक बढ़ने का खतरा है। 

Condom Price Hike Reason: ईरान जंग का असर अब कंडोम पर भी पड़ सकता है। देश में कंडोम की कीमतें 50% तक बढ़ सकती हैं और आने वाले दिनों में मार्केट से आपके पसंदीदा ब्रांड्स गायब भी हो सकते हैं। आप सोच रहे होंगे कि मिसाइलें खाड़ी देशों में गिर रही हैं, तो भारत में कंडोम क्यों महंगा होने का खतरा है? दरअसल, सारा खेल सप्लाई चेन का है। कंडोम बनाने के लिए जिन खास चीजों की जरूरत होती है, उनमें से ज्यादातर भारत बाहर से मंगाता है। मिंट की रिपोर्ट के मुताबिक, कंडोम बनाने में मुख्य तौर पर 6 चीजों का इस्तेमाल होता है। जंग की वजह से इनमें से लगभग हर चीज की सप्लाई चैन टूट गई है। इसी वजह से कंडोम बनाने वाली बड़ी कंपनियां जैसे मैनकाइंड फार्मा (Manforce), HLL लाइफकेयर और क्यूपिड लिमिटेड कच्चे माल की भारी किल्लत से जूझ रही हैं।

कंडोम किन 6 चीजों से बनता है?

  1. नेचुरल लेटेक्स: कंडोम का बेस, जो रबड़ के पेड़ों से मिलता है।
  2. अमोनिया: लेटेक्स को जमने से बचाने के लिए अमोनिया सबसे जरूरी है। भारत अपनी जरूरत का 86% अमोनिया सऊदी अरब, कतर और ओमान जैसे देशों से मंगाता है। जंग की वजह से 'हॉर्मुज रूट' बंद है और जहाज नहीं आ पा रहे हैं। यह इस क्राइसिस का मुख्य कारण बताया जा रहा है।
  3. सिलिकॉन ऑयल: यह कंडोम को चिकनाहट (लुब्रिकेशन) देता है। चीन से आने वाले इस तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं।
  4. सल्फर और जिंक ऑक्साइड: मजबूती के लिए जरूरी इन रसायनों के दाम भी बढ़ गए हैं।
  5. पैकेजिंग मटेरियल: एल्युमीनियम और PVC फॉयल की कीमतें अब स्थिर नहीं हैं।
  6. फ्लेवर और कलर्स: इनकी सप्लाई पर भी ग्लोबल लॉजिस्टिक्स का असर पड़ा है।

कंडोम की कीमतें बढ़ीं, तो क्या होगा असर?

हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार, कंडोम की कीमतों में थोड़ी सी बढ़ोतरी भी बहुत बड़ा असर डालती है। अगर कीमतें 50% बढ़ीं, तो आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग इनका इस्तेमाल कम कर सकता है, जिससे अनचाहे गर्भ के मामले बढ़ेंगे। कंडोम कम इस्तेमाल होने से यौन संचारित रोगों (STIs) का खतरा बढ़ सकता है। इसके अलावा भारत सरकार का लक्ष्य 2030 तक गर्भनिरोधकों की मांग को 75% पूरा करना है, लेकिन इस किल्लत से 'नेशनल फैमिली प्लानिंग प्रोग्राम' को तगड़ा झटका लग सकता है।

कंडोम बनाने वाली कंपनियां क्यों हैं चुप?

जब मैनफोर्स, ड्यूरेक्स और कामसूत्र जैसे बड़े ब्रांड्स इस पर कुछ भी कहने से इनकार कर रही हैं, लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स और इंडस्ट्री के सूत्रों की माने तो सप्लायर्स ने कच्चे माल की जमाखोरी शुरू कर दी है, जिससे कीमतें और ज्यादा बढ़ रही हैं। अगर जल्द ही हालात नहीं सुधरे, तो मार्केट से कुछ बड़े ब्रांड्स के पैकेट गायब हो सकते हैं।