Italy Burqa Ban: इटली के स्कूलों में बुर्का बैन करने की तैयारी है। PM मेलोनी प्रस्ताव लाने जा रही हैं। 24 देशों में पहले से चेहरा ढकने पर पाबंदियां लागू हैं।

Italy School Burqa Ban: यूरोप के प्रमुख देश इटली के स्कूलों में अब बुर्का और नकाब पहनने वालों की एंट्री पर रोक लगाने की तैयारी चल रही है। प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की सरकार ने इसके लिए कमर कस ली है। रविवार को पीएम मेलोनी ने कहा कि क्लासरूम के अंदर किसी का भी चेहरा ढका नहीं होना चाहिए और किसी भी छात्रा पर रिवाजों के नाम पर पर्दा करने का दबाव नहीं डाला जा सकता है। अगर ये प्रस्ताव संसद से पास हो जाता है, तो इटली दुनिया का एक ऐसा देश बन जाएगा जहां चेहरा ढकने वाले कपड़ों पर कानूनी पाबंदी लागू होगी। आइए जानते हैं कि मेलोनी सरकार का प्लान क्या है और अब तक किन-किन देशों में बुर्का बैन है...

स्कूलों में बुर्का-नकाब पर क्यों रोक लगाना चाहती हैं मेलोनी सरकार?

मेलोनी ने रविवार को अपनी पार्टी के एक कार्यक्रम में कहा कि स्कूल में छात्रों का चेहरा खुला होना चाहिए। उनका कहना है कि, परंपरा के नाम पर किसी लड़की या महिला पर चेहरा ढकने का दबाव नहीं होना चाहिए। सरकार जल्द ही इस बारे में कैबिनेट के सामने प्रस्ताव रखने वाली है। प्रस्ताव में खास तौर पर बुर्का और नकाब का जिक्र है। हिजाब को लेकर ऐसा कोई बैन घोषित नहीं किया गया है।

इटली में 1975 से है चेहरा ढकने को लेकर कानून

दिलचस्प बात ये है कि इटली में चेहरा ढकने को लेकर नया कानून पहली बार नहीं आ रहा है। देश में 1975 से ऐसा कानून मौजूद है, जिसके तहत सार्वजनिक जगह पर इस तरह चेहरा ढकना मना है जिससे पहचान छिप जाए। कुछ खास परिस्थितियों में इसमें छूट भी दी जा सकती है। 2008 में एक कोर्ट के फैसले में कहा गया था कि सिर्फ धार्मिक या सांस्कृतिक वजह से चेहरा ढकने को अपने आप कानून का उल्लंघन नहीं माना जा सकता। मामले की पूरी परिस्थिति देखना जरूरी होगा। अब मेलोनी सरकार स्कूलों के लिए बुर्का और नकाब पर अलग नियम लाने की तैयारी कर रही है।

विदेशी छात्रों की संख्या भी होगी सीमित?

मेलोनी सरकार का प्रस्ताव सिर्फ बुर्का-नकाब तक सीमित नहीं है। स्कूलों की कक्षाओं में विदेशी छात्रों की संख्या के लिए अधिकतम सीमा तय करने की भी योजना है। हालांकि, सरकार ने अभी ये साफ नहीं किया है कि एक क्लास में कितने विदेशी छात्र रखे जाएंगे। इटली में विदेशी छात्रों की संख्या को लेकर 30% की सीमा का नियम पहले से मौजूद है, लेकिन सरकार इसे नए तरीके से लागू करने या मजबूत करने की तैयारी कर रही है। प्रस्ताव के तहत ऐसे विदेशी छात्रों के माता-पिता को इटैलियन भाषा सीखनी पड़ सकती है, जिनके बच्चों को स्कूल की पढ़ाई और वहां के माहौल में घुलने-मिलने में गंभीर दिक्कत हो रही है। सरकार का कहना है कि भाषा की जानकारी बच्चों के स्कूल में बेहतर तरीके से शामिल होने में मदद करेगी।

9.3 लाख विदेशी छात्र, 2027 चुनाव से पहले बड़ा मुद्दा

Fondazione ISMU के आंकड़ों के मुताबिक, इटली के स्कूलों में करीब 9.3 लाख ऐसे छात्र हैं जिनके पास इटली की नागरिकता नहीं है। यानी स्कूलों में पढ़ने वाले करीब हर 100 छात्रों में 12 विदेशी नागरिकता वाले छात्र हैं। इटली में इमिग्रेशन यानी दूसरे देशों से आने वाले लोगों का मुद्दा पहले से ही राजनीति में अहम है। 2027 में आम चुनाव भी होने हैं। मेलोनी की पार्टी ब्रदर्स ऑफ इटली (Brothers of Italy) को नेशनल फ्यूचर (FN) से भी चुनौती मिल रही है। FN ने जुलाई में ही स्कूलों में बुर्का और नकाब पर रोक की मांग की थी। अब मेलोनी सरकार की ओर से इसी दिशा में प्रस्ताव लाने की तैयारी हो रही है। सरकार की मंजूरी के बाद प्रस्ताव को कानून बनाने के लिए संसद में भेजा जाएगा। इसे कानून बनने के लिए संसद की मंजूरी लेनी होगी। यानी फिलहाल इटली में स्कूलों के लिए बुर्का और नकाब पर रोक सरकार की प्रस्तावित योजना है, लागू कानून नहीं।

इटली से पहले कई देशों में अलग-अलग रोक

इटली ऐसा पहला देश नहीं होगा जहां चेहरे को पूरी तरह ढकने वाले कपड़ों पर रोक की बात हो रही है। फ्रांस, बेल्जियम और चीन समेत कई देशों में सार्वजनिक जगहों पर बुर्का या नकाब को लेकर अलग-अलग तरह के नियम लागू हैं। हालांकि, हर देश में इन नियमों का दायरा एक जैसा नहीं है। कहीं सार्वजनिक जगहों पर रोक है तो कहीं कुछ खास जगहों या हालात में नियम लागू होते हैं। यूरोप में फ्रांस और बेल्जियम के मामलों में यूरोपियन कोर्ट ऑफ ह्यूमन राइट्स ने भी सार्वजनिक जगहों पर चेहरे को पूरी तरह ढकने पर लगी पाबंदियों को बरकरार रखा था। इन फैसलों पर मानवाधिकार संगठनों और संयुक्त राष्ट्र की ओर से आपत्तियां भी सामने आई थीं।

इटली से पहले किन देशों में बुर्का बैन है?

यूरोप: फ्रांस, इटली, लक्जमबर्ग, नीदरलैंड, पुर्तगाल, स्विट्जरलैंड, ऑस्ट्रिया, बेल्जियम, बुल्गारिया और डेनमार्क

एशिया: चीन (शिनजियांग), कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, श्रीलंका, ताजिकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान और उज्बेकिस्तान।

अफ्रीका: कैमरून, चाड, कांगो गणराज्य, गैबॉन, सेनेगल, ट्यूनीशिया और जाम्बिया।