सीनियर भारतीय पत्रकार आरफा खानम शेरवानी का एक वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर बवाल मच गया है। वीडियो में वह नमाज़ को "खामोश इबादत" बता रही हैं, जिस पर लोगों ने तीखी प्रतिक्रिया दी और उन पर जमीनी हकीकत को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया।

सीनियर भारतीय पत्रकार आरफा खानम शेरवानी का एक वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर बवाल मच गया है। वीडियो में वह नमाज़ को "खामोश इबादत" बता रही हैं, जिस पर लोगों ने तीखी प्रतिक्रिया दी और उन पर जमीनी हकीकत को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया। ऑनलाइन वायरल हो रहे इस वीडियो में, शेरवानी इस्लामी इबादत के शांत और बिना किसी बाधा वाले स्वभाव पर जोर देती हैं।

“जुम्मे की नमाज़ के बारे में सोचिए। इसे पूरा करने में मुश्किल से 5 से 15 मिनट लगते हैं। कोई हंगामा नहीं होता। कोई शोर नहीं। पड़ोसियों को कोई परेशानी नहीं होती। मुझे लगता है, दुनिया में नमाज़ सबसे खामोश इबादतों में से एक है, जिसमें पूरी तरह से खामोशी होती है। आपके मुंह से एक शब्द भी नहीं निकलता।”

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इस वीडियो पर तुरंत ही आलोचनाओं की बौछार हो गई। कई सोशल मीडिया यूजर्स ने अज़ान और नमाज़ के लिए लाउडस्पीकर के इस्तेमाल का जिक्र करते हुए कहा कि कई मोहल्लों का अनुभव शेरवानी के "पूरी तरह खामोशी" वाले दावे के बिल्कुल उलट है।

एक यूजर ने सालों की परेशानी बयां करते हुए लिखा, “मेरे घर के पीछे मस्जिद थी, दिन में 5 बार लाउडस्पीकर की रोज़ आवाज़ सुनना और रमज़ान में 1 महीने फट-फट आवाज़ सुनना, वो टॉर्चर था हमारे परिवार के लिए। 6 साल गुज़ारा है डॉकयार्ड रोड, मुंबई में।”

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एक और यूजर ने लिखा, “खामोश नमाज़ है जिसमें मुंह से एक शब्द नहीं निकलता, तो वो जो रोज़ दिन में पांच बार लाउडस्पीकर पर जो चिल्ला-चिल्ला के आवाज़ सुनाई देती है, वो शब्द कहां से निकलते हैं।”

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