Kapurthala jail: कपूरथला में एक परिवार ने 35 वर्षीय रवि कुमार को मृत समझकर अंतिम संस्कार कर दिया, लेकिन तीन हफ्ते बाद जेल से फोन आया कि रवि जिंदा है और जेल में बंद है। अब पुलिस उस अज्ञात शव की पहचान और पूरी घटना की जांच कर रही है।
Kapurthala Shocking Case: पंजाब के कपूरथला में एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने परिवार के साथ-साथ पुलिस को भी हैरान कर दिया। एक परिवार ने अपने 35 वर्षीय बेटे रवि कुमार को मृत समझकर उसका अंतिम संस्कार कर दिया था। करीब तीन सप्ताह बाद परिवार को जेल प्रशासन का फोन आया और पता चला कि रवि कुमार जिंदा है और कपूरथला जिला जेल में बंद है।
2 सितंबर को जेल अधिकारियों की ओर से परिवार से संपर्क किए जाने के बाद पूरे मामले की तस्वीर बदल गई। जानकारी सामने आई कि रवि 5 अगस्त से जेल में बंद था। अब पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस शव को रवि समझकर परिवार ने अंतिम संस्कार किया, आखिर वह किसका था।
धार्मिक कार्यक्रम से लापता हुआ था रवि
परिवार के अनुसार, रवि कुमार नशे की समस्या से जूझ रहा था और 5 अगस्त को पड़ोस में आयोजित एक धार्मिक कार्यक्रम के दौरान अचानक लापता हो गया था। परिवार ने उसकी तलाश शुरू की और कपूरथला सिटी थाने में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के मुताबिक, यह शिकायत 7 अगस्त को दर्ज की गई थी। परिवार उस समय रवि की तलाश में जुटा था, लेकिन कुछ ही दिनों बाद उन्हें एक अज्ञात शव मिलने की सूचना मिली।
सड़े-गले शव की पहचान कपड़ों से की
12 अगस्त को कपूरथला पुलिस ने परिवार को बताया कि कंजली वेटलैंड इलाके से एक सड़ा-गला शव बरामद हुआ है। परिवार को शव की पहचान के लिए बुलाया गया। परिवार के सदस्य अमनदीप के मुताबिक, शव का चेहरा बुरी तरह खराब हो चुका था। ऐसे में परिवार ने उसके कपड़ों के आधार पर शव की पहचान रवि के रूप में कर ली। इसके अगले ही दिन, 13 अगस्त को परिवार ने शव का अंतिम संस्कार कर दिया। परिवार को उस वक्त बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि जिस व्यक्ति को वे अपना बेटा समझकर अंतिम विदाई दे रहे हैं, रवि कुमार उस समय जीवित था।
तीन सप्ताह बाद जेल से आया फोन
करीब तीन सप्ताह बाद 2 सितंबर को कपूरथला जिला जेल से परिवार के पास फोन आया। जेल अधिकारियों ने बताया कि रवि कुमार जेल में बंद है और वह पूरी तरह जिंदा है। यह खबर सुनकर परिवार के लिए स्थिति अविश्वसनीय थी। एक तरफ बेटे के जिंदा होने की राहत थी, तो दूसरी तरफ उस शव को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया जिसका अंतिम संस्कार किया जा चुका था। परिवार ने जेल जाकर रवि से मुलाकात भी की। रवि ने कथित तौर पर बताया कि उसे 5 अगस्त को जालंधर कमिश्नरेट पुलिस ने गिरफ्तार किया था और उसी दिन कपूरथला जेल भेज दिया गया था।
पुलिस ने गलती मानी, प्रक्रिया पर दिया जोर
कपूरथला के DSP शीतल सिंह ने रवि के जेल में होने की पुष्टि की। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि मामले में गलती हुई है। हालांकि पुलिस का कहना है कि अज्ञात शव की पहचान के मामले में निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया गया था।
पुलिस के मुताबिक, शव काफी सड़ चुका था और परिवार ने कपड़ों के आधार पर उसकी पहचान रवि के रूप में की थी। यही वजह रही कि शव की पहचान को लेकर आगे वैज्ञानिक पुष्टि नहीं हो सकी।
एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, रवि को 5 अगस्त को जालंधर कमिश्नरेट पुलिस ने गिरफ्तार किया था और उसी दिन कपूरथला जेल भेज दिया गया था। वहीं, जेल प्रशासन को बाद में पता चला कि गिरफ्तारी की जानकारी परिवार तक नहीं पहुंची थी। इसके बाद 2 सितंबर को परिवार से संपर्क किया गया।
अब सबसे बड़ा सवाल- किसका था वह शव?
रवि के जिंदा मिलने के बाद पुलिस की जांच अब पूरी तरह नए मोड़ पर पहुंच गई है। कंजली वेटलैंड से बरामद शव अब अज्ञात है और पुलिस को उसकी पहचान करनी होगी। अधिकारी के मुताबिक, पोस्टमार्टम के दौरान DNA जांच के लिए कोई जैविक नमूना सुरक्षित नहीं किया गया था, क्योंकि उस समय परिवार ने शव की पहचान रवि के रूप में कर दी थी। ऐसे में अब DNA जांच की संभावना भी सीमित हो गई है।
पुलिस अब कंजली वेटलैंड और आसपास के इलाके से जुड़े तकनीकी साक्ष्यों की जांच कर रही है। इसमें सेल टावर डंप डेटा जैसे सुराग भी शामिल हैं। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि मृत व्यक्ति कौन था और वह किन परिस्थितियों में कंजली इलाके तक पहुंचा।
रवि कुमार के जिंदा मिलने से परिवार को जहां बड़ी राहत मिली है, वहीं अज्ञात शव की पहचान अब पुलिस के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गई है। जांच आगे बढ़ने के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि आखिर वह शव किसका था और उसकी पहचान में इतनी बड़ी चूक कैसे हुई।
