कर्नाटक सरकार 2026-27 तक 15,000 शिक्षकों की भर्ती करेगी। 3,900 करोड़ की लागत से 800 नए पब्लिक स्कूल बनेंगे। मुफ्त पाठ्यपुस्तक योजना का विस्तार अब PUC छात्रों तक भी किया गया है, साथ ही स्कूलों का ढांचा सुधारा जाएगा।

बेंगलुरु: कर्नाटक सरकार ने शिक्षा के क्षेत्र में कई बड़े ऐलान किए हैं। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने बताया कि साल 2026-27 तक स्कूलों और कॉलेजों में खाली पड़े 15,000 शिक्षकों के पद भरे जाएंगे। इसके अलावा, अगले 3 सालों में 3,900 करोड़ रुपये खर्च करके 800 नए कर्नाटक पब्लिक स्कूल (KPS) बनाए जाएंगे। सरकार ने आंगनवाड़ी बच्चों के लिए एक्टिविटी बुक्स, क्लास 1 से 10 तक के बच्चों के लिए टेक्स्टबुक और वैल्यू एजुकेशन की किताबें और प्री-यूनिवर्सिटी (PUC) के छात्रों को मुफ्त में टेक्स्टबुक देने का भी ऐलान किया है।

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सरकार ने 2025-26 के बजट में किए गए वादे को भी पूरा किया है, जिसके तहत 184 सरकारी प्राइमरी स्कूलों को हाई स्कूल और 50 हाई स्कूलों को प्री-यूनिवर्सिटी कॉलेजों में अपग्रेड किया गया है। स्कूलों की मान्यता और रिन्यूअल की प्रक्रिया को आसान बनाते हुए अब ऑनलाइन कर दिया गया है। 2025-26 से छात्रों को मिलने वाले फायदे, जैसे स्कॉलरशिप वगैरह, पहली बार सीधे उनके बैंक खातों में (DBT) भेजे जा रहे हैं। ग्रामीण और कन्नड़ मीडियम में पढ़ाई के सर्टिफिकेट भी अब ऑनलाइन मिल रहे हैं।

800 नए पब्लिक स्कूल बनेंगे

'बेहतर पढ़ाई, उज्ज्वल भविष्य' के नारे के साथ एक ही छत के नीचे अच्छी शिक्षा देने के लिए 800 स्कूलों को कर्नाटक पब्लिक स्कूल के तौर पर अपग्रेड किया जाएगा। इनमें से 500 स्कूल ADB की मदद से, 200 KKRDB फंड से और 100 KMERC फंड से बनेंगे। इस पूरे प्रोजेक्ट पर अगले तीन सालों में 3,900 करोड़ रुपये खर्च होंगे।

ट्रांसफर काउंसलिंग के दौरान कर्नाटक पब्लिक स्कूलों (KPS) में शिक्षकों के पदों को अहमियत दी जाएगी और उन्हें प्राथमिकता के आधार पर भरा जाएगा। इन स्कूलों में खाली पदों पर भर्ती को भी तरजीह दी जाएगी।

PUC छात्रों को भी मुफ्त किताबें

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार सरकारी स्कूलों को मजबूत करने, एडमिशन बढ़ाने और पढ़ाई के नतीजों को बेहतर करने के लिए प्रतिबद्ध है। अभी तक क्लास 1 से 10 तक के सरकारी स्कूल के छात्रों को मुफ्त किताबें दी जा रही थीं। अब 2026-27 से इस योजना को बढ़ाते हुए प्री-प्राइमरी के बच्चों को एक्टिविटी बुक्स, क्लास 1 से 10 तक वैल्यू एजुकेशन की किताबें और प्री-यूनिवर्सिटी (PUC) के छात्रों को भी मुफ्त में टेक्स्टबुक दी जाएंगी।

सरकारी प्राइमरी, हाई स्कूलों और प्री-यूनिवर्सिटी कॉलेजों में नए क्लासरूम बनाने और मरम्मत के लिए 565 करोड़ रुपये, टॉयलेट बनाने के लिए 75 करोड़ रुपये और फर्नीचर खरीदने के लिए 25 करोड़ रुपये दिए जाएंगे। स्कूलों के रखरखाव के लिए 125 करोड़ रुपये का अनुदान सीधे स्कूल डेवलपमेंट कमेटियों को भेजा जाएगा।

सरकारी प्राइमरी स्कूलों में bilingual यानी दो भाषाओं में क्लास शुरू करने के लिए शिक्षकों की क्षमता बढ़ाने पर भी जोर दिया जाएगा। इसके लिए 24 करोड़ रुपये खर्च करके शिक्षकों को इंग्लिश भाषा की ट्रेनिंग दी जाएगी। IIT धारवाड़ के साथ मिलकर 8वीं से 12वीं क्लास तक के करीब 12.28 लाख छात्रों के लिए AI पर आधारित डिजिटल ट्यूटर की सुविधा दी जाएगी। इस पर करीब 5 करोड़ रुपये खर्च होंगे, जिससे बच्चे अपनी रफ्तार से खुद सीख सकेंगे।

छात्रों में तनाव कम करने और उनकी मेंटल हेल्थ को बेहतर बनाने के लिए 204 BRC सेंटरों में एक-एक हेल्थ काउंसलर की नियुक्ति की जाएगी। विजयपुरा के सैनिक स्कूल के हॉस्टल की बिल्डिंग को दोबारा बनाने के लिए इस साल 10 करोड़ रुपये दिए जाएंगे।

इसके अलावा, स्कूल-कॉलेजों और यूनिवर्सिटी में नशे के इस्तेमाल को रोकने के लिए सख्त नियम बनाए जाएंगे। छात्रों को जागरूक करने के लिए कार्यक्रम चलाए जाएंगे और मदद के लिए हेल्पलाइन सेंटर भी बनाए जाएंगे।