बेंगलुरु हाईकोर्ट ने बाइक टैक्सी को मंजूरी दे दी है। डिविजन बेंच ने सिंगल बेंच के बैन के फैसले को रद्द कर दिया। अब सरकार को दोपहिया वाहनों को ट्रांसपोर्ट गाड़ी के रूप में रजिस्टर करने की अनुमति देनी होगी।

बेंगलुरु: हाईकोर्ट की डिविजन बेंच ने शुक्रवार को राज्य में बाइक को ट्रांसपोर्ट गाड़ी (टैक्सी) के तौर पर इस्तेमाल करने की इजाजत दे दी है। ओला, उबर और रैपिडो जैसी एग्रीगेटर कंपनियों ने हाईकोर्ट की सिंगल बेंच के उस फैसले को रद्द करने की मांग की थी, जिसमें बाइक टैक्सी पर बैन लगाने के सरकारी फैसले को सही ठहराया गया था। इसके लिए उन्होंने डिविजन बेंच में अपील की थी।

सरकार को इजाजत देने का निर्देश

इन अपीलों को मानते हुए, चीफ़ जस्टिस विभु बाखरू की अगुवाई वाली डिविजन बेंच ने कहा कि दोपहिया वाहन मालिक अपनी गाड़ियों को ट्रांसपोर्ट गाड़ी के तौर पर रजिस्टर कराने के लिए आवेदन कर सकते हैं। ऐसे आवेदनों पर कानूनी दायरे में विचार किया जाना चाहिए। सरकार को वाहन मालिकों को ट्रांसपोर्ट गाड़ी के रूप में रजिस्ट्रेशन देने और कॉन्ट्रैक्ट कैरिज के तौर पर काम करने की इजाजत देनी चाहिए। बेंच ने यह भी कहा कि रीजनल ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 74(2) के तहत ज़रूरी शर्तें लगा सकती है।

इसके अलावा, डिविजन बेंच ने साफ किया कि रीजनल ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट के अधिकारी मौजूदा नियमों की समीक्षा तो कर सकते हैं, लेकिन वे इस आधार पर इजाजत देने से मना नहीं कर सकते कि दोपहिया वाहनों का इस्तेमाल ट्रांसपोर्ट गाड़ी या कॉन्ट्रैक्ट कैरिज के रूप में नहीं किया जा सकता। साथ ही, सिंगल बेंच के 2 अप्रैल, 2025 के उस आदेश को भी रद्द कर दिया, जिसमें सरकार को बाइक टैक्सी का संचालन बंद कराने का निर्देश दिया गया था।

सिंगल बेंच के आदेश के खिलाफ़ अर्जी

राज्य सरकार ने बाइक टैक्सी के लिए कोई नियम नहीं बनाए हैं। बिना नियमों के बाइक टैक्सी नहीं चल सकती। जब तक मोटर व्हीकल एक्ट, 1988 की धारा 3 के तहत ज़रूरी नियमों के साथ गाइडलाइंस जारी नहीं की जातीं, तब तक राज्य में बाइक टैक्सी नहीं चल सकती। हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने 2 अप्रैल, 2025 को राज्य सरकार और ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट को निर्देश दिया था कि छह हफ़्तों के अंदर सभी बाइक टैक्सी का संचालन बंद कराया जाए। इसी आदेश को चुनौती देते हुए एग्रीगेटर कंपनियों ने डिविजन बेंच में अपील की थी।