केतन अग्रवाल की मौत के 17 दिन बाद दादा देवीचंद अग्रवाल का निधन हो गया। परिवार ने इसे गहरे सदमे का असर बताया। उधर, केतन हत्याकांड में सिया गोयल और चेतन चौधरी के खिलाफ पुलिस जांच तेज है।
Ketan Agarwal Murder Case: कहते हैं कि अपनों को खोने का गम किसी भी शारीरिक बीमारी से कहीं ज्यादा जानलेवा होता है। पुणे के लोहगढ़ किले से गिरकर हुई 250 वर्षीय केतन अग्रवाल की रहस्यमयी मौत के गम में डूबे अग्रवाल परिवार पर दुखों का एक और पहाड़ टूट पड़ा है। पोते की मौत के ठीक 17 दिन बाद, शनिवार रात ठीक 9:45 बजे पुणे के एक निजी अस्पताल में केतन के 71 वर्षीय दादा, देवीचंद अग्रवाल ने अंतिम सांस ली। डॉक्टरों के मुताबिक, केतन की मौत की खबर सुनने के बाद से ही उनकी हालत लगातार बिगड़ती जा रही थी। लेकिन क्या यह सिर्फ एक सामान्य मौत थी, या इसके पीछे उस खौफनाक सच का सदमा था जिसने पूरे परिवार की बुनियाद हिलाकर रख दी थी? परिवार का साफ कहना है कि बुजुर्ग दादा अपने पोते को खोने का दर्द बर्दाश्त नहीं कर पाए और उनका दिल इस गहरे सदमे को सह नहीं सका।


'मेरे बुढ़ापे का सहारा चला गया': व्हीलचेयर पर बैठे बुजुर्ग की वो आखिरी भावुक हुंकार
मौत से कुछ ही दिन पहले का वह मंजर आज भी पूरी हाउसिंग सोसाइटी के लोगों की आंखों में आंसू ला देता है। 27 जून को जब केतन के लिए न्याय की मांग को लेकर एक कैंडल मार्च निकाला गया, तो गंभीर रूप से बीमार होने के बावजूद देवीचंद अग्रवाल उसमें शामिल हुए थे। मीडिया एजेंसी ANI से बात करते हुए बुजुर्ग दादा कैमरे के सामने फूट-फूट कर रो पड़े थे। कांपती आवाज और डबडबाई आंखों के साथ उन्होंने कहा था, "मेरे बुढ़ापे का सहारा चला गया... अब मैं किसके लिए जिऊंगा?" लेकिन उस रोने में सिर्फ दुख नहीं था, बल्कि एक गहरा आक्रोश और न्याय की एक ऐसी तड़प थी जिसने पूरे देश का ध्यान इस केस की तरफ खींच लिया। उन्होंने आंसू बहाते हुए मांग की थी कि उनके पोते के हत्यारों को सिर्फ जेल नहीं, बल्कि सीधे मौत की सजा मिलनी चाहिए।
बीमारी के बावजूद कैंडल मार्च में पहुंचे, न्याय की आखिरी उम्मीद नहीं छोड़ी
27 जून को, तबीयत खराब होने के बावजूद देवीचंद अग्रवाल अपनी हाउसिंग सोसाइटी में आयोजित कैंडल मार्च में शामिल हुए थे। उस दौरान उन्होंने अपने पोते के लिए न्याय की भावुक अपील की थी। आंसुओं के बीच उन्होंने आरोप लगाया था कि उनके परिवार के साथ विश्वासघात हुआ है। उन्होंने कहा था कि जिन लोगों पर दशकों से भरोसा था, उन्हीं ने उनके परिवार को धोखा दिया। उन्होंने मुख्य आरोपियों सिया गोयल और चेतन चौधरी के खिलाफ कड़ी सजा की मांग करते हुए कहा था कि उन्हें "मौत की सज़ा" मिलनी चाहिए।
35 साल का पुराना भरोसा और वो खौफनाक धोखा: क्या सब कुछ पहले से तय था?
इस पूरी मर्डर मिस्ट्री का सबसे हैरान कर देने वाला पहलू वह 'धोखा' है, जिसने अग्रवाल परिवार को भीतर से तोड़ दिया। देवीचंद अग्रवाल ने अपनी मौत से पहले उस गहरे राज पर से पर्दा उठाया था जिसने इस रिश्ते को ही एक जाल बना दिया था। उन्होंने बताया था, "हम उस लड़की (मंगेतर सिया गोयल) के परिवार को पिछले 35 सालों से जानते थे। हमें क्या पता था कि जिस पर हम दशकों से भरोसा कर रहे हैं, वही हमारे घर का चिराग बुझा देंगे।" बुजुर्ग का गंभीर आरोप था कि लड़की के परिवार को अच्छी तरह मालूम था कि उनकी बेटी किसी और से प्यार करती है। इसके बावजूद, सिया की बुआ और फूफा ने अग्रवाल परिवार पर इस शादी के लिए लगातार दबाव बनाया। उन्होंने बार-बार देवीचंद जी से कहा था, "आप चिंता मत करिए, लड़की बहुत अच्छी है, सब ठीक हो जाएगा।" लेकिन इस 'भरोसे' की आड़ में जो खौफनाक साजिश पक रही थी, उसका अंदाजा किसी को नहीं था।

लोहगढ़ किले का वो काला सच: क्या हुआ था 18 जून की उस शाम को?
रहस्य की शुरुआत 18 जून को पुणे के पास स्थित ऐतिहासिक लोहगढ़ किले से हुई। 25 वर्षीय केतन अग्रवाल वहां अपनी मंगेतर सिया गोयल के साथ घूमने गया था, लेकिन वह वहां से कभी जिंदा वापस नहीं लौटा। शुरुआत में इसे एक हादसा दिखाने की कोशिश की गई, लेकिन पुणे ग्रामीण पुलिस और लोनावला ग्रामीण पुलिस की सतर्कता ने जल्द ही इस हादसे के पीछे छिपी एक सोची-समझी हत्या की साजिश को बेनकाब कर दिया। जांच में सामने आया कि मुख्य आरोपी सिया गोयल इस शादी से खुश नहीं थी और अपने परिवार के दबाव के आगे बेबस थी। अपनी जिंदगी के इस पड़ाव पर शादी से बचने के लिए उसने अपने कथित प्रेमी चेतन चौधरी के साथ मिलकर एक ऐसा प्लान बनाया जिसे सुनकर पुलिस अधिकारियों के भी रोंगटे खड़े हो गए।
खुले मैदान में मर्डर का 'डेमो': साजिश की वो इनसाइड स्टोरी जिसने पुलिस को भी चौंकाया
इस मामले में सबसे चौंकाने वाला और सस्पेंस से भरा मोड़ तब आया जब पुलिस दोनों आरोपियों को रिमांड पर लेकर जांच को आगे बढ़ा रही थी। गुरुवार को पुणे ग्रामीण पुलिस आरोपी सिया गोयल को पुणे के लुल्ला नगर इलाके में स्थित एक सुनसान और खुले मैदान में लेकर गई। वहां जो खुलासा हुआ, उसने इस मर्डर मिस्ट्री को और भी ज्यादा संगीन बना दिया। पता चला कि लोहगढ़ किले की पहाड़ियों से केतन को नीचे धकेलने से पहले, सिया और उसके प्रेमी चेतन चौधरी ने इसी लुल्ला नगर के मैदान में हत्या की पूरी योजना का बाकायदा रिहर्सल (क्राइम री-एनेक्टमेंट) किया था। उन्होंने बकायदा प्लान किया था कि केतन को किस तरह बातों में फंसाकर खाई के किनारे ले जाना है और कैसे बिना किसी सबूत के उसे नीचे धकेलना है।
अब दो मौतों ने और गहरा कर दिया मामला
केतन अग्रवाल की मौत पहले से ही कई सवालों के घेरे में थी। अब उनके दादा के निधन ने इस पूरे मामले को और अधिक भावनात्मक और गंभीर बना दिया है। परिवार इसे केवल एक हादसा नहीं, बल्कि लगातार मिल रहे मानसिक आघात का परिणाम मान रहा है। उधर, पुलिस सिया गोयल और चेतन चौधरी के खिलाफ सबूत जुटाने में लगी है। आने वाले दिनों में अदालत में पेश होने वाले साक्ष्य और जांच रिपोर्ट यह तय करेंगे कि केतन अग्रवाल की मौत के पीछे की पूरी सच्चाई क्या थी। फिलहाल, अग्रवाल परिवार दोहरे शोक के बीच केवल एक ही मांग दोहरा रहा है-केतन को न्याय मिले। लेकिन इस न्याय की लड़ाई के बीच, अग्रवाल परिवार ने अपने घर के दो अहम सदस्यों को हमेशा के लिए खो दिया है।

