क्या खान सर को बदनाम करने के लिए FIR में नाम जोड़ा गया, जैसा वकील दावा कर रहे हैं? कोचिंग सेंटर के बाहर हुई फायरिंग आत्मरक्षा थी या किसी बड़ी साजिश का हिस्सा? गिरफ्तार गार्ड्स के वीडियो से आखिर कौन-सा नया सच सामने आएगा? कोर्ट से राहत मिलने के बाद क्या पुलिस जांच खान सर को क्लीन चिट देगी या नए खुलासे होंगे?

Khan Sir Patna Case: बिहार की राजधानी पटना से इस वक्त की सबसे सनसनीखेज और बड़ी खबर सामने आ रही है, जिसने शिक्षा जगत से लेकर सोशल मीडिया तक भारी हड़कंप मचा दिया है। देश के सबसे मशहूर टीचर और यूट्यूबर फैसल खान, जिन्हें पूरी दुनिया 'खान सर' के नाम से जानती है, उन्हें कोर्ट से एक बहुत बड़ी और अप्रत्याशित राहत मिली है। पटना के डिस्ट्रिक्ट जज ने मुसल्लहपुर हाट स्थित उनके कोचिंग इंस्टीट्यूट में हुई फायरिंग और तोड़फोड़ के मामले में खान सर की गिरफ्तारी पर फिलहाल रोक लगा दी है। पटना के एसएसपी कार्तिकेय शर्मा के मुताबिक, कदमकुआं पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर में खान सर का नाम मुख्य आरोपियों में शामिल है। लेकिन इस एफआईआर के पीछे की कहानी में एक ऐसा सस्पेंस छुपा है, जिसने पुलिस प्रशासन को भी उलझा दिया है।

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आधी रात का वो खौफनाक हमला... क्या खान सर को बदनाम करने की रची गई साजिश?

इस पूरे मामले की शुरुआत 2 जून की काली रात को हुई, जब पटना के मुसल्लहपुर हाट में स्थित 'खान ग्लोबल स्टडीज़ इंस्टीट्यूट' के बाहर अचानक हड़कंप मच गया। बताया जा रहा है कि 15 से 20 अज्ञात लोगों के एक उग्र गुट ने अचानक कोचिंग सेंटर पर धावा बोल दिया। हमलावरों ने न सिर्फ खान सर के पोस्टर फाड़ दिए, बल्कि परिसर पर अंधाधुंध पथराव भी शुरू कर दिया। इस अचानक हुए हमले के बाद अपनी और छात्रों की सुरक्षा के लिए कोचिंग के दो गार्ड्स ने हवा में गोलियां चलाईं। सस्पेंस तब गहरा गया जब घटना के अगले ही दिन यानी 3 जून को हजारों छात्रों की भारी भीड़ इंस्टीट्यूट के बाहर जमा हो गई, जिसके बाद पूरे इलाके को छावनी में तब्दील करना पड़ा। पुलिस ने आनन-फानन में एक वीडियो के आधार पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 109 और आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज कर दोनों गार्ड्स को हिरासत में ले लिया।

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कोर्ट रूम का सस्पेंस: वकील का दावा-'बदले की भावना से फंसाया गया'

खान सर के वकील अरविंद कुमार महौर ने अदालत के सामने जो दलीलें पेश कीं, उसने इस पूरे केस का रुख ही पलट कर रख दिया। वकील ने बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि खान सर के खिलाफ दर्ज यह एफआईआर "उन्हें समाज में बदनाम करने और उनका करियर तबाह करने की एक गहरी साजिश" का हिस्सा है। उन्होंने कोर्ट को बताया कि खान सर के स्टाफ ने कुछ दिनों पहले एक प्रतिद्वंद्वी (राइवल) कोचिंग सेंटर के डायरेक्टर के खिलाफ केस दर्ज कराया था। इसी खुन्नस और बदले की कार्रवाई के तौर पर विरोधी गुट के इशारे पर डिस्क्लोज़र स्टेटमेंट में खान सर का नाम घसीटा गया है। वकील ने साफ किया कि खान सर पुलिस के सामने सरेंडर नहीं करेंगे, बल्कि कोर्ट में अग्रिम ज़मानत (anticipatory bail) की अर्ज़ी दाखिल कर इस साजिश का पर्दाफाश करेंगे।

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कोचिंग माफिया का खूनी खेल या खुद की रची कहानी? प्रेस कॉन्फ्रेंस से मचा बवाल

यह विवाद तब और ज्यादा पेचीदा हो गया जब गुरुवार को एक विरोधी कोचिंग इंस्टीट्यूट के सदस्यों ने अचानक एक प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई। उन्होंने मीडिया के सामने लाइव आकर यह चौंकाने वाला आरोप लगाया कि यह पूरी घटना किसी बाहरी ने नहीं, बल्कि खुद खान सर ने पब्लिसिटी बटोरने के लिए करवाई थी। दूसरी तरफ, खान सर ने शुरुआत में ही साफ कर दिया था कि इस हमले के पीछे पटना के बड़े कोचिंग माफिया और उनके प्रतिद्वंद्वी शामिल हैं, जो उनकी बढ़ती लोकप्रियता से जलते हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि केवल निष्पक्ष पुलिस जांच से ही यह साफ हो पाएगा कि उस रात असल में क्या खेल खेला गया था। फिलहाल, अदालत द्वारा गिरफ्तारी पर रोक लगाए जाने से खान सर के करोड़ों फैंस ने राहत की सांस ली है, लेकिन पटना की गलियों में कोचिंग वॉर का यह सस्पेंस अब एक नया और खतरनाक रूप ले चुका है।