देश की राजधानी दिल्ली में CJP आंदोलन और बढ़ते राजनीतिक दबाव के बीच आखिरकार CM रेखा गुप्ता ने पहली बार चुप्पी तोड़ी। PM मोदी के फास्ट-ट्रैक कोर्ट ऐलान के बाद आखिर क्यों आया यह बयान?
Delhi CM Rekha Gupta: दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले एक महीने से जारी 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के उग्र आंदोलन ने पूरी राजधानी को हिलाकर रख दिया है। NEET पेपर लीक मामले और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर चल रहा यह विरोध प्रदर्शन अब एक ऐसे मोड़ पर पहुंच चुका है जहां से पीछे हटना नामुमकिन लग रहा है। 20 जुलाई को हुए संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हुई हिंसक झड़पों तथा बर्बर लाठीचार्ज ने पूरी दिल्ली सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया था। आंदोलनकारी लगातार दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की रहस्यमयी चुप्पी पर तीखे सवाल उठा रहे थे। लेकिन अब, चौतरफा दबाव और बढ़ते जनाक्रोश के बीच आखिरकार दिल्ली सरकार की नींद टूट गई है और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का पहला आधिकारिक बयान सामने आ गया है।
PM मोदी के ऐलान के बाद क्या बोलीं CM रेखा गुप्ता?
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने अपनी लंबी खामोशी को तोड़ते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस ऐतिहासिक फैसले का समर्थन किया है, जिसने देश के परीक्षा माफियाओं की रीढ़ तोड़ दी है। पीएम मोदी के ट्वीट पर त्वरित प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री ने लिखा, "प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में छात्रों के हितों की रक्षा और युवाओं के उज्ज्वल भविष्य को सुरक्षित रखना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।" रेखा गुप्ता का यह बयान ऐसे समय में आया है जब पूरी दिल्ली पुलिस और प्रशासन छात्रों पर हुई सख्त कार्रवाई को लेकर जनता के निशाने पर हैं। इस बयान के जरिए मुख्यमंत्री ने साफ कर दिया है कि दिल्ली सरकार पूरी तरह से केंद्र के कड़े रुख के साथ कदम से कदम मिलाकर चल रही है।
फास्ट-ट्रैक कोर्ट से क्या बदलेगा? "परिश्रम पर आघात करने वालों को भुगतना होगा अंजाम"
अपने बयान को आगे बढ़ाते हुए मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने पेपर लीक के खिलाफ सरकार के सबसे बड़े हथियार यानी 'फास्ट-ट्रैक कोर्ट्स' के गठन को एक युगांतकारी कदम बताया। उन्होंने कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए लिखा, "पेपर लीक के मामलों में फास्ट ट्रैक कोर्ट्स के गठन और दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई का यह निर्णय हर परिश्रमी छात्र के साथ न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। छात्रों के अधिकारों और उनके परिश्रम पर आघात करने वालों के विरुद्ध कानून पूरी कठोरता के साथ अपना कार्य करेगा।" इस बयान ने साफ कर दिया है कि अब केवल जांच नहीं होगी, बल्कि इन विशेष अदालतों के जरिए अपराधियों को रिकॉर्ड समय में सलाखों के पीछे भेजा जाएगा।
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आखिर CJP आंदोलन क्यों बना सरकार के लिए चुनौती?
दिल्ली में 20 जून से CJP के नेतृत्व में NEET पेपर लीक और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर आंदोलन जारी है। 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान प्रदर्शन उग्र हो गया, जिसमें प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के घायल होने की खबरें सामने आईं। इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने दिल्ली सरकार और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की चुप्पी पर सवाल उठाए। पुलिस कार्रवाई और लाठीचार्ज को लेकर भी सरकार विपक्ष के निशाने पर रही।
NDA की खुफिया बैठक से जंतर-मंतर के दंगल तक: 'घोर पाप' के अंत की शुरुआत?
इस पूरे विवाद में यह मोड़ तब आया जब खुद प्रधानमंत्री मोदी ने एनडीए (NDA) संसदीय दल की एक बेहद गोपनीय और उच्च स्तरीय बैठक में पेपर लीक को 'घोर पाप' करार दिया था। इसके तुरंत बाद पीएम मोदी ने सोशल मीडिया पर फास्ट-ट्रैक कोर्ट की घोषणा की, जिसके बाद मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को भी मोर्चे पर आना पड़ा। हालांकि, जंतर-मंतर पर डटे CJP के कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह केवल एक राजनीतिक पैंतरा है। विपक्ष और छात्र संगठन अब भी धर्मेंद्र प्रधान के तत्काल इस्तीफे की मांग पर अड़े हैं। 20 जून से शुरू हुआ यह आंदोलन अब एक राष्ट्रीय संकट बन चुका है।
सस्पेंस का अगला अध्याय: क्या शांत होगा छात्रों का गुस्सा या भड़केगी नई चिंगारी?
मुख्यमंत्री के इस पहले और बेहद नपे-तुले बयान के बाद अब सबसे बड़ा सस्पेंस यह बन गया है कि क्या दिल्ली सरकार का यह आश्वासन सड़कों पर उतरे आक्रोशित छात्रों को शांत कर पाएगा? एक तरफ जहां सरकार इसे 'परिश्रमी छात्रों के साथ न्याय' बता रही है, वहीं दूसरी तरफ 20 जुलाई की हिंसा के घाव अब भी छात्रों के दिलों में ताजा हैं। क्या मुख्यमंत्री का यह बयान छात्रों के गुस्से को ठंडा करेगा या फिर CJP इस बयान को सरकार की कमजोरी मानकर आंदोलन को और अधिक आक्रामक रूप देगी? आने वाले कुछ घंटे दिल्ली की सियासत और युवाओं के भविष्य के लिए बेहद संवेदनशील होने वाले हैं।
क्या अब बदलेगा आंदोलन का रुख?
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का यह पहला बयान ऐसे समय आया है जब CJP आंदोलन लगातार सरकार पर दबाव बनाए हुए है। अब राजनीतिक हलकों में यह चर्चा तेज है कि क्या केंद्र और दिल्ली सरकार के ताज़ा रुख से आंदोलन की दिशा बदलेगी या प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर पहले की तरह कायम रहेंगे। फिलहाल इतना तय है कि पेपर लीक का मुद्दा अब केवल परीक्षा व्यवस्था तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह राष्ट्रीय राजनीति का बड़ा विषय बन चुका है।
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