राजस्थान के खाटूश्यामजी में नगर पालिका अध्यक्ष पद का चुनाव टाल दिया गया है। कांग्रेस उम्मीदवार लक्ष्मी देवी के वोटिंग के लिए नहीं पहुंचने पर यह फैसला लिया गया। आरोप है कि अचानक से कैंडिडेट का अपहरण हो गया है।

सीकर (राजस्थान)। खाटूश्यामजी में सोमवार को नगर पालिका अध्यक्ष पद का चुनाव अनिश्चित काल के लिए टल गया। दरअसल, वार्ड नंबर 10 से पार्षद और कांग्रेस उम्मीदवार लक्ष्मी देवी पोलिंग बूथ पर पहुंची ही नहीं। खाटूश्यामजी नगर पालिका के रिटर्निंग ऑफिसर कपिल उपाध्याय ने यह जानकारी दी।
उपाध्याय ने बताया कि वोटिंग पूरी न होने के कारण राज्य चुनाव आयोग के निर्देश पर मतपेटियों को सील कर दिया गया है। उन्होंने साफ किया कि अब चुनाव की नई तारीख तभी घोषित होगी, जब गायब उम्मीदवार का पता चल जाएगा।

वोटिंग के बीच उम्मीदवार का अपहरण

रिटर्निंग ऑफिसर ने कहा, "शहरी निकाय चुनाव 2026 के तहत आज खाटूश्यामजी नगर पालिका अध्यक्ष पद के लिए वोटिंग हो रही थी। लेकिन राज्य चुनाव आयोग के आदेश के बाद, अध्यक्ष और उपाध्यक्ष दोनों पदों के चुनाव अगले आदेश तक टाल दिए गए हैं।

सुबह से ही चुनाव को लेकर बीजेपी और कांग्रेस, दोनों खेमों में काफी हलचल थी। वोटिंग के दौरान दोनों पार्टियों के नेताओं और समर्थकों के बीच माहौल काफी तनावपूर्ण रहा। लेकिन जब कांग्रेस प्रत्याशी लक्ष्मी देवी पोलिंग स्टेशन नहीं आईं, तो स्थिति पूरी तरह से उलझ गई। इस बीच, लक्ष्मी देवी के परिवार वालों ने उनके अपहरण का केस दर्ज करने की मांग कर दी है।

बीजेपी और कांग्रेस के आगे बेबस हुआ चुनाव आयोग

बीजेपी और कांग्रेस दोनों के समर्थकों ने अपनी-अपनी मांगों को लेकर नगर पालिका परिसर में धरना शुरू कर दिया। जब तय समय में वोटिंग आगे नहीं बढ़ी, तो समय सीमा बढ़ाकर सुबह 10:30 बजे कर दी गई। इसके बावजूद चुनाव को लेकर कोई समाधान नहीं निकला। आखिरकार, राज्य चुनाव आयोग के निर्देश पर मतपेटियों को सील करने का फैसला लिया गया। बाद में दोनों पार्टियों ने नगर पालिका परिसर में अपना धरना खत्म कर दिया। इसके बाद कड़ी सुरक्षा के बीच मतपेटियों को स्ट्रॉन्ग रूम में शिफ्ट करने का काम शुरू हुआ।

पुलिस कैंडिडेट की कर रही तलाश

खाटूश्यामजी में निकाय प्रमुख का चुनाव फिलहाल अटक गया है। अब सबकी नजरें पुलिस और प्रशासन पर टिकी हैं, जो चुनाव आयोग की अगली घोषणा से पहले लक्ष्मी देवी की तलाश में जुटे हैं। दूसरी तरफ, अजमेर में बीजेपी का बोर्ड बनने के बाद आज डिप्टी मेयर पद के लिए भी चुनाव हो रहा था। 
गौरतलब है कि अजमेर में मेयर चुनाव के दौरान कांग्रेस पार्षदों ने अपनी ही पार्टी से बगावत कर बीजेपी को वोट दे दिया था। 80 वार्डों में से बीजेपी ने 32 सीटें जीती थीं, लेकिन 43 वोटों के साथ उन्होंने बोर्ड पर कब्जा जमा लिया। वहीं, 37 सीटें जीतने वाली कांग्रेस अपने उसी आंकड़े पर सिमट कर रह गई।