लक्षद्वीप प्रशासन ने 'जनहित' में FR 56(j) के तहत 47 कर्मचारियों को जबरन रिटायर कर दिया है। 33 साल की सेवा या 56 वर्ष की आयु पूरी कर चुके कर्मचारी हटाए गए हैं। उन्हें 3 महीने का वेतन और पेंशन लाभ मिलेगा।

कवरत्ती: लक्षद्वीप प्रशासन ने अपने अलग-अलग विभागों में काम कर रहे 47 कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया है, यानी उन्हें जबरन रिटायर कर दिया गया है। प्रशासन ने यह बड़ा कदम फंडामेंटल रूल (FR) 56(j) के तहत मिले विशेष अधिकार का इस्तेमाल करते हुए उठाया है। इस बारे में आधिकारिक आदेश कवरत्ती के सचिवालय सर्विस सेक्शन से जारी हुए हैं।

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जिन लोगों को नौकरी से हटाया गया है, उनमें अलग-अलग द्वीपों के 37 मल्टी-टास्किंग स्टाफ, 6 अपर डिवीजन क्लर्क, 3 लोअर डिवीजन क्लर्क और एक स्टेनोग्राफर शामिल हैं। इस साल यह दूसरी बार है जब प्रशासन ने इस तरह एक साथ इतने कर्मचारियों को नौकरी से निकाला है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, जिन कर्मचारियों ने 33 साल की सर्विस पूरी कर ली थी या जिनकी उम्र 56 साल हो गई थी, उन्हें इस लिस्ट में शामिल किया गया है। प्रशासन का आधिकारिक तौर पर कहना है कि यह फैसला 'जनहित' में लिया गया है। इसके लिए एक स्पेशल रिव्यू कमेटी बनाई गई थी, जिसने कर्मचारियों के सर्विस रिकॉर्ड की जांच की और अपनी सिफारिशें दीं।

विशेष सचिव पद्मकर राम त्रिपाठी की तरफ से जारी आदेश में कहा गया है कि यह फैसला आदेश मिलने की तारीख से ही लागू होगा। हालांकि, हटाए गए कर्मचारियों को नोटिस पीरियड के बदले तीन महीने की सैलरी और भत्ते दिए जाएंगे। इसके अलावा, वे मौजूदा नियमों के तहत पेंशन फायदों के भी हकदार होंगे। प्रशासन के इस अचानक लिए गए फैसले से द्वीप के कर्मचारियों और आम लोगों में काफी चिंता का माहौल है।