Lawrence Bishnoi gang Mumbai: मुंबई में लॉरेंस बिश्नोई गैंग के नाम पर जूलर, बिल्डर और कारोबारियों से रंगदारी मांगने के कई मामले सामने आए हैं। जांच में कई आरोपियों का गैंग से सीधा कनेक्शन नहीं मिला।
मुंबई में गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के नाम का इस्तेमाल कर कारोबारियों को डराने-धमकाने के मामले लगातार सामने आते रहे हैं। जूलर, बिल्डर, कैटरिंग संचालक और होटल कारोबारी तक अलग-अलग समय पर धमकी भरे कॉल और रंगदारी की मांग की शिकायत कर चुके हैं। लेकिन इन मामलों की एक अहम परत यह भी है कि हर आरोपी का बिश्नोई गैंग से सीधा संबंध साबित नहीं हुआ है। कई मामलों में गैंग का नाम सिर्फ डर पैदा करने और पैसे ऐंठने के लिए इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई।
जूलर से 20 लाख, बिल्डर से मांगे 10 करोड़
फरवरी 2026 में विलेपार्ले के सर्राफा कारोबारी अजित जैन से पहले 20 लाख और फिर 5 लाख रुपये मांगे गए। रकम लेने पहुंचे पांच लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार किया। जांच में बिश्नोई गैंग के नाम का इस्तेमाल कर ठगी करने की बात सामने आई।
जनवरी में बोरीवली के एक जूलर से 30 लाख रुपये मांगे गए। पुलिस ने चार आरोपियों को पकड़ा, लेकिन सीधे गैंग कनेक्शन के सबूत नहीं मिले। वहीं फरवरी में ठाणे के एक बिल्डर को विदेशी नंबर से कॉल कर 10 करोड़ रुपये की मांग की गई। इस मामले में नौपाड़ा पुलिस ने FIR दर्ज की।
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विदेशी नंबरों से धमकी, परिवार को भी निशाना बनाने की बात
दक्षिण मुंबई के एक बिल्डर को जनवरी से अप्रैल 2026 के बीच अलग-अलग नंबरों से लगातार धमकी भरे फोन आए। कॉल करने वालों ने खुद को लॉरेंस गैंग से जुड़ा बताया और रकम नहीं देने पर निर्माण साइट पर हमला करने की धमकी दी।
मालाड के एक कैटरिंग कारोबारी को विदेशी नंबर से कॉल कर 5 लाख रुपये ऐंठने का मामला भी सामने आया। वहीं अगस्त 2025 में मालाड के एक होटल कारोबारी से 20 लाख रुपये मांगे गए थे।
विलेपार्ले के एक जूलर से हर महीने 2 लाख रुपये देने की मांग की गई और परिवार को निशाना बनाने की धमकी दी गई। पुलिस ने बाद में पश्चिम बंगाल से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया, जिनमें कथित तौर पर कारोबारी का एक कर्मचारी भी शामिल था।
गैंग का नाम सुनकर पैसे देना सबसे बड़ी गलती
सांताक्रुज के एक जूलर को दुकान पर हमला करने की धमकी दी गई। पुलिस ने तीन लोगों को पकड़ा तो जांच में सामने आया कि धमकी के पीछे कथित तौर पर वेतन को लेकर विवाद था।
रिटायर्ड मुंबई पुलिस अधिकारी एसीपी कैलाश आह्वाड के मुताबिक, किसी गैंगस्टर का नाम लेकर रंगदारी मांगने वाला हर व्यक्ति उस गैंग का सदस्य हो, यह जरूरी नहीं। पुलिस ऐसे मामलों में कॉल रिकॉर्ड, डिजिटल साक्ष्य, पैसों के लेनदेन और आरोपियों के संपर्कों की जांच करती है।
ऐसी धमकी मिलने पर कारोबारियों को डरकर रकम देने के बजाय तुरंत पुलिस को सूचना देनी चाहिए और कॉल, नंबर, मैसेज तथा अन्य डिजिटल सबूत सुरक्षित रखने चाहिए।
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