इंदौर में ग्लोबल काबुली चना कॉन्क्लेव 2026 में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को उद्योग का दर्जा देने की घोषणा की। कृषि आधारित उद्योग, निवेश प्रोत्साहन और 5 वर्षीय रोडमैप पर सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।
डॉ. मोहन यादव ने इंदौर स्थित ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में आयोजित ‘ग्लोबल काबुली चना कॉन्क्लेव 2026’ के उद्घाटन समारोह में भाग लेकर कार्यक्रम को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश कृषि और दलहन-तिलहन उत्पादन में तेजी से आगे बढ़ रहा है और देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है।
मध्यप्रदेश में खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को उद्योग का दर्जा देने की घोषणा
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में खाद्य प्रसंस्करण (Food Processing) को बढ़ावा देने के लिए सरकार गंभीरता से कार्य कर रही है। उन्होंने निवेशकों से आह्वान किया कि वे खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना में निवेश करें। राज्य सरकार हर संभव सहायता प्रदान करेगी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि मध्यप्रदेश में खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को उद्योग का दर्जा दिया जाएगा, जिससे निवेश और रोजगार दोनों को बढ़ावा मिलेगा।
कृषि आधारित उद्योग और एग्री-प्रोसेसिंग में देश का अग्रणी राज्य बनने का लक्ष्य
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार का लक्ष्य मध्यप्रदेश को कृषि आधारित उद्योगों और खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनाना है। सरकार किसान, उद्योग और व्यापार को साथ लेकर विकास का नया मॉडल तैयार कर रही है। उन्होंने कहा कि निजी क्षेत्र में खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना को प्रोत्साहित किया जाएगा और शासन की ओर से पूर्ण सहयोग दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने बताया कि चना भारतीय भोजन का महत्वपूर्ण हिस्सा है और विशेष रूप से शाकाहारी समाज के लिए यह पोषण का प्रमुख स्रोत है। भारत विश्व में दाल उत्पादन और उपभोग दोनों में अग्रणी है। उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में किसानों के हित संरक्षण और कल्याण के लिए अनेक योजनाएं चलाई जा रही हैं तथा वैश्विक मंचों पर भी किसानों का पक्ष मजबूती से रखा जा रहा है।
कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए 5 वर्ष का रोडमैप
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार ने किसानों और कृषि आधारित उद्योगों को प्रोत्साहित करने के लिए 5 वर्ष का रोडमैप तैयार किया है। उद्योग स्थापना के नियमों को सरल बनाया गया है। भूमि, बिजली, पानी और करों में रियायत दी जा रही है। श्रम आधारित उद्योगों के लिए प्रति श्रमिक 5 हजार रुपये प्रतिमाह तक सहायता देने का प्रावधान है। उन्होंने कहा कि अगले पांच वर्षों में राज्य के बजट को दोगुना करने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे कृषि, उद्योग और रोजगार के क्षेत्र में व्यापक विकास सुनिश्चित किया जा सके।


