महाराष्ट्र के कोल्हापुर में एक परिवार ने दामाद को 1.5 किलो चांदी की कोल्हापुरी चप्पल भेंट की। 'अधिक मास' की परंपरा के तहत दिए गए इस 4 लाख के तोहफे का मकसद विदेश में बसे दामाद को संस्कृति से जोड़े रखना है।
आमतौर पर जब दामाद ससुराल आता है तो उसकी खूब आवभगत होती है। तरह-तरह के पकवान, नए कपड़े या सोने की अंगूठी जैसे तोहफे दिए जाते हैं। लेकिन महाराष्ट्र के कोल्हापुर में एक परिवार ने अपने दामाद को ऐसा तोहफा दिया है, जिसकी चर्चा पूरे देश में हो रही है। इस परिवार ने अपने दामाद के लिए कोई छोटी-मोटी चीज नहीं, बल्कि पूरी 1.5 किलो चांदी से बनी 'कोल्हापुरी चप्पल' गिफ्ट की है!

'अधिक मास' की खास परंपरा
महाराष्ट्र और कर्नाटक के कुछ हिस्सों में 'अधिक मास' या 'पुरुषोत्तम मास' का खास महत्व है। इस दौरान दामाद को खास तोहफे देने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। इसी परंपरा को यादगार बनाने के लिए कोल्हापुर के इस परिवार ने यह अनोखा तरीका अपनाया। उनका मकसद था कि भले ही दामाद विदेश में रहता हो, लेकिन वह अपनी मिट्टी और संस्कृति को कभी न भूले।
4 लाख रुपये की कीमत वाली चप्पल!
इस चांदी की कोल्हापुरी चप्पल की खासियत इसका वजन और इसकी बनावट है। करीब 9 इंच लंबी इस चप्पल को बनाने में 1.5 किलो शुद्ध चांदी का इस्तेमाल हुआ है। बाजार के मौजूदा भाव के हिसाब से इस चप्पल की कीमत करीब 4 लाख रुपये से भी ज्यादा है। सिर्फ चांदी ही नहीं, बल्कि इस पर की गई बारीक कारीगरी की मेहनत भी इसमें शामिल है।
8 दिन की मेहनत, शानदार कलाकृति
कोल्हापुर के मशहूर कारीगर विक्रांत माली ने इस खास चप्पल को तैयार किया है। उन्होंने बताया, "पहले मैंने चमड़े की एक असली पारंपरिक कोल्हापुरी चप्पल खरीदी। फिर उसी के डिजाइन को मॉडल बनाकर चांदी में इसका सांचा तैयार किया। इस चप्पल को बनाने में करीब 8 दिन की लगातार मेहनत लगी। यह सिर्फ एक तोहफा नहीं, बल्कि एक खूबसूरत कलाकृति है।"
विदेश में बसे दामाद को अपनी मिट्टी की याद
यह अनोखा तोहफा देने वाले परिवार का कहना है, 'हमारा दामाद विदेश में नौकरी करता है। हम चाहते हैं कि वह वहां की मॉडर्न जिंदगी जीते हुए भी हमारे कोल्हापुर के गौरव, यानी कोल्हापुरी चप्पल और यहां की परंपराओं को हमेशा याद रखे। यह तोहफा उसी भावना का प्रतीक है।'
सोने-चांदी के आसमान छूते भाव के इस दौर में दामाद के लिए इतना महंगा तोहफा देना सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है। कई लोग इसे "रॉयल गिफ्ट" बता रहे हैं, तो कुछ लोग परंपरा को जिंदा रखने के इस प्रयास की जमकर तारीफ कर रहे हैं।
