महाराष्ट्र के अमरावती में एक शादी का कार्ड सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। कार्ड में टीपू सुल्तान और छत्रपति शिवाजी महाराज को लेकर किए गए ऐतिहासिक दावों ने नई बहस छेड़ दी है। मामले पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

महाराष्ट्र के अमरावती जिले से सामने आया एक शादी का कार्ड इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। सामान्य तौर पर शादी के निमंत्रण पत्र सिर्फ समारोह की जानकारी तक सीमित रहते हैं, लेकिन इस कार्ड में ऐतिहासिक व्यक्तित्वों और उनसे जुड़े दावों का उल्लेख होने के कारण यह अब सार्वजनिक चर्चा का विषय बन गया है।

कार्ड में मैसूर के शासक टीपू सुल्तान को “प्रेरणास्रोत” के रूप में प्रस्तुत किया गया है। वहीं मराठा साम्राज्य के संस्थापक छत्रपति शिवाजी महाराज का भी उल्लेख किया गया है। दोनों ऐतिहासिक व्यक्तित्वों के नाम और उनसे जुड़े दावों ने सोशल मीडिया पर नई बहस छेड़ दी है।

अमरावती के मिर्जापुर गांव से जुड़ा है मामला

जानकारी के अनुसार, यह शादी का कार्ड अमरावती जिले के वलगांव के पास स्थित मिर्जापुर गांव निवासी शोहेब अहमद के विवाह से संबंधित बताया जा रहा है। कार्ड में “शेरे मैसूर” के रूप में टीपू सुल्तान का नाम प्रमुखता से लिखा गया है। इसके साथ कई ऐतिहासिक दावे भी प्रकाशित किए गए हैं। इनमें टीपू सुल्तान के गुरु के रूप में पूर्णैया पंडित का उल्लेख, मंदिरों को भूमि दान देने और काशी के मंदिर को स्वर्ण मुद्राएं देने जैसी बातें शामिल हैं।

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छत्रपति शिवाजी महाराज को लेकर भी किए गए उल्लेख

कार्ड में छत्रपति शिवाजी महाराज को भी प्रेरणास्थान बताया गया है। इसके साथ उनके जीवन और शासनकाल से जुड़े कुछ दावों का भी जिक्र किया गया है। निमंत्रण पत्र में शिवाजी महाराज के राजनीतिक गुरु के रूप में याकूब शाह का नाम लिखा गया है। साथ ही रत्नागिरी क्षेत्र में दरगाह के लिए भूमि दान और रायगढ़ स्थित जगदीश्वर मंदिर के साथ मस्जिद निर्माण से जुड़े उल्लेख भी किए गए हैं। यही हिस्सा अब सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा चर्चा और बहस का कारण बन रहा है।

सोशल मीडिया पर बंटी राय

कार्ड वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं। कुछ लोग इसे इतिहास के अलग दृष्टिकोण को सामने लाने की कोशिश बता रहे हैं, जबकि कुछ लोगों ने कार्ड में लिखे दावों की सत्यता पर सवाल उठाए हैं। इतिहासकारों का मानना है कि ऐतिहासिक तथ्यों को लेकर अलग-अलग मत और व्याख्याएं हमेशा से मौजूद रही हैं। ऐसे में किसी भी दावे की पुष्टि प्रमाणित ऐतिहासिक स्रोतों के आधार पर ही की जानी चाहिए।

प्रशासन की ओर से नहीं आया आधिकारिक बयान

फिलहाल इस पूरे मामले पर प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि कार्ड वायरल होने के बाद स्थानीय स्तर पर चर्चा का माहौल बना हुआ है और कुछ लोग इसे लेकर विवाद की आशंका भी जता रहे हैं। अमरावती ही नहीं, बल्कि महाराष्ट्र के कई जिलों में यह कार्ड चर्चा का विषय बना हुआ है।

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