Government Job Scam : क्या है सरकारी नौकरी का यह घोटाला? आखिर कौन बना रहा था फर्जी दस्तावेज? एक गांव, सैकड़ों फर्जी कागज और सरकारी नौकरी... जांच में खुला बड़ा सच? सरकारी नौकरी के लिए बनाया फर्जी जाल... अब खुलेगा पूरा नेटवर्क?

Jobs Scam Unearthed in Assam : असम में एक चौंकाने वाला भर्ती घोटाला सामने आया है, जिसने असली असमिया नौजवानों के रोजगार के मौकों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस घोटाले में असम के बाहर के कई उम्मीदवारों ने नकली दस्तावेज़ों के सहारे केंद्र सरकार के विभागों में नौकरियां हासिल कर लीं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन लोगों ने खुद को असम का स्थायी निवासी बताने के लिए फर्जी दस्तावेज़ों का इस्तेमाल किया। इन जाली कागज़ात में परमानेंट रेजिडेंट सर्टिफिकेट (PRC), जाति प्रमाण पत्र और आय प्रमाण पत्र शामिल हैं।

Add Asianetnews Hindi as a Preferred SourcegooglePreferred

फर्जी PRC से मिली सरकारी नौकरी?

यह घोटाला हाल ही में जोरहाट में सामने आया। इसके बाद नावशोलिया गांव सबका ध्यान खींच रहा है, क्योंकि आरोप है कि यहीं के पते पर दूसरे राज्यों के उम्मीदवारों के लिए फर्जी निवासी प्रमाण पत्र बनाए गए। जांच में पता चला है कि कई लोगों ने इन्हीं नकली दस्तावेज़ों के आधार पर असम के कोटे से केंद्र सरकार की नौकरी पाई है।

कैसे सामने आया इतना बड़ा सच

  • इस पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा जोरहाट के एडिशनल डिप्टी कमिश्नर पंकज बोरा की कोशिशों से हुआ। इस खुलासे ने अधिकारियों और आम लोगों को हैरान कर दिया है।
  • सूत्रों का कहना है कि नावशोलिया गांव के फर्जी PRC के साथ-साथ नकली जाति और आय प्रमाण पत्रों का इस्तेमाल CRPF, असम राइफल्स और CISF जैसे संगठनों में नौकरी पाने के लिए किया गया। जांच के दायरे में आए सभी लोगों ने कथित तौर पर नावशोलिया गांव से जुड़े फर्जी पते का इस्तेमाल किया।
  • आगे की जांच में यह भी पता चला कि इन उम्मीदवारों द्वारा जमा किए गए जाति और आय प्रमाण पत्र असल में असम के दूसरे लोगों के नाम पर जारी किए गए थे। इस धोखाधड़ी का पता सर्टिफिकेट नंबरों और उससे जुड़े रिकॉर्ड की जांच के बाद चला।

यह घोटाला सिर्फ जोरहाट तक नहीं

  • अधिकारियों को शक है कि यह घोटाला सिर्फ जोरहाट तक ही सीमित नहीं है। ऐसी चिंता बढ़ रही है कि असम के दूसरे हिस्सों में भी इसी तरह की धोखाधड़ी हुई होगी, जिससे बाहरी राज्यों के उम्मीदवार असम के योग्य युवाओं की नौकरियां छीन रहे हैं।
  • जांच में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि इन फर्जी दस्तावेज़ों को बनवाने और इस्तेमाल करने में किसने मदद की। इस रैकेट के पीछे किसी प्रभावशाली व्यक्ति या संगठित गिरोह के शामिल होने की भी आशंका जताई जा रही है।
  • जांचकर्ता इस बात की भी पड़ताल कर रहे हैं कि क्या नावशोलिया गांव को इसलिए चुना गया क्योंकि यह उन जगहों के करीब है जहां केंद्र सरकार के सुरक्षा बलों के जवान काम करते हैं और अक्सर किराए के मकानों में रहते हैं। शक है कि धोखेबाजों ने फर्जी दस्तावेज़ बनाते समय इसी कनेक्शन का फायदा उठाया होगा।
  • इस कथित घोटाले के सामने आने के बाद पूरे असम में चिंता की लहर है। कई लोगों ने इस मामले की पूरी जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि ऐसी धोखाधड़ी न केवल भर्ती प्रक्रिया की ईमानदारी को कमजोर करती है, बल्कि असम के काबिल युवाओं से उनके हक की नौकरियां भी छीनती है।
  • जोरहाट के एडिशनल डिप्टी कमिश्नर पंकज बोरा ने एएनआई को बताया, "असल में, हमें CRPF की कुछ यूनिट्स, शिलांग में असम राइफल्स के डायरेक्टर जनरल ऑफिस और NTPC दादरी में CISF की एक यूनिट से कुछ नए भर्ती हुए जवानों के PRC और दूसरे सर्टिफिकेट्स के वेरिफिकेशन के लिए रिक्वेस्ट मिली थी। जमा किए गए दस्तावेज़ों के अनुसार, इन लोगों ने खुद को जोरहाट जिले का निवासी बताया था। जब हमने इन दस्तावेज़ों की जांच की, तो हमने पाया कि वे नकली थे।"
  • उन्होंने आगे बताया, "सर्टिफिकेट नंबरों की जांच करने पर हमने पाया कि वे नंबर असल में दूसरे लोगों को जारी किए गए असली इनकम सर्टिफिकेट के थे। कुछ जोरहाट जिले के थे और कुछ असम के दूसरे जिलों के। लेकिन भर्ती अधिकारियों के सामने पेश किए गए सर्टिफिकेट उन असली दस्तावेज़ों से बिल्कुल अलग थे।"
  • बोरा ने मामले की जानकारी देते हुए कहा, "आगे की जांच से पता चला कि इन लोगों द्वारा पेश किए गए दस्तावेज़ों से जुड़ा कोई भी आवेदन उन सर्टिफिकेट नंबरों के तहत कभी मिला ही नहीं था। इन सबूतों के आधार पर, हम इस नतीजे पर पहुंचे कि ये सर्टिफिकेट पूरी तरह से जाली और मनगढ़ंत थे। फिलहाल, हम यह साबित कर चुके हैं कि ये लोग उन जगहों के नहीं हैं जिनका जिक्र उनकी पुलिस स्टेशन रिपोर्ट में है। इसलिए, उनके द्वारा जमा किए गए दस्तावेज़ साफ तौर पर नकली हैं।"
  • उन्होंने आगे कहा, "ये लोग असल में कहां के हैं, यह पक्के तौर पर कहना मुश्किल है। लेकिन भर्ती अधिकारियों से मिले कुछ सहायक दस्तावेज़ों से पता चलता है कि इन लोगों ने असम का निवासी होने का दावा किया, पर अपनी हाई स्कूल (माध्यमिक) और दूसरी शुरुआती परीक्षाएं उत्तर प्रदेश में दी थीं। हो सकता है कि वे उत्तर प्रदेश या किसी और राज्य के हों। एक बात जो सभी फर्जी दस्तावेज़ों में कॉमन है, वह है नावशोलिया गांव का बार-बार जिक्र होना।"