महाराष्ट्र में महायुति गठबंधन में सत्ता संघर्ष तेज हो गया है। शिंदे गुट ने BMC के 29 कॉर्पोरेटरों का रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया, जो मेयर पद और सीट बंटवारे पर बीजेपी के साथ मतभेद को दर्शाता है।

मुंबई: महाराष्ट्र के सत्ताधारी गठबंधन 'महायुति' में सत्ता को लेकर खींचतान तेज हो गई है। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना ने अचानक बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) के 29 कॉर्पोरेटरों का रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया, जिससे गठबंधन के अंदर की अनबन खुलकर सामने आ गई है। संकेत हैं कि सीट बंटवारे और सत्ता में हिस्सेदारी को लेकर बीजेपी के साथ रिश्तों में दरार आ गई है।

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सहयोगियों को भी चौंकाने वाला यह कदम राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। पार्टी मुख्यालय पहुंचे कॉर्पोरेटर इस फैसले से उलझन में पड़ गए। अटकलें हैं कि इस कड़े फैसले के पीछे बीएमसी में अहम कमेटी अध्यक्ष पदों और मेयर पद को लेकर शिंदे गुट के अंदर चल रही नाराजगी है।

वहीं, मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे का कैबिनेट बैठक से दूर रहना और उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के साथ होने वाली मुलाकात को रद्द करने से इन अटकलों को और हवा मिली है। शिंदे मुंबई की राजनीतिक चर्चाओं से दूर, अपने पैतृक गांव दारे के लिए निकल गए और सतारा में स्थानीय प्रचार कार्यक्रमों में हिस्सा लिया।

शिवसेना के संस्थापक बालासाहेब ठाकरे के जन्म शताब्दी वर्ष में मुंबई पर नियंत्रण हासिल करना शिंदे गुट के लिए राजनीतिक प्रतिष्ठा का सवाल है। शिंदे गुट ने पांच साल के मेयर कार्यकाल में पहले ढाई साल अपने लिए रखने का 'स्प्लिट टर्म' फॉर्मूला पेश किया था। बीएमसी में 89 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बीजेपी ने इस पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। 29 कॉर्पोरेटरों के साथ शिंदे गुट एक अहम ताकत बना हुआ है, लेकिन मंगलवार की घटनाओं ने गठबंधन के भविष्य पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि दोनों पक्ष दावा कर रहे हैं कि गठबंधन मजबूत है, लेकिन सत्ता की यह खींचतान महायुति में एक बड़ा संकट पैदा कर रही है।